You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
किसान प्रदर्शन: हिंसा के बाद सिंघु और टिकरी बॉर्डर के कैसे हैं हालात
- Author, अरविंद छाबड़ा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
शुक्रवार को दोपहर करीब 1.30 बजे सिंघु बॉर्डर से क़रीब एक किलोमीटर की दूरी पर माहौल में अचानक तेज़ी आ गई.
हम बॉर्डर पर पहुंचे तो हमारी आंखों में तेज जलन महसूस हुई. ये आंसू गैस का असर था जिसे हाल में ही पुलिस ने फ़ायर किया था ताकि तलवारों और डंडों से लैस पत्थरबाज़ी कर रही भीड़ को तितर-बितर किया जा सके.
पुलिस हाथों में लाठियां लिए कुछ लोगों का पीछा भी करती दिखाई दी. एक पुलिस अफ़सर के हाथ से काफ़ी ख़ून बह रहा था. उन्हें उनके सहयोगी पुलिसवालों ने वहां से निकाला. पुलिसवालों के हाथ में वह तलवार भी थी जिससे पुलिस अफ़सर पर हमला किया गया था.
गुज़रे दो महीनों से ज़्यादा वक़्त से सिंघु बॉर्डर पर किसानों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था. लेकिन, यह प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया था.
देश के अलग-अलग राज्यों से 26 नवंबर से ही किसान यहां जुटना शुरू हो गए थे, जिसमें ज़्यादातर किसान पंजाब और हरियाणा से आए थे. ये किसान केंद्र सरकार के लाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, सरकार का लगातार कहना है कि ये क़ानून किसानों के हित में हैं.
दिल्ली पुलिस का कहना है कि आसपास के इलाक़ों के कुछ लोगों के बॉर्डर पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने की मांग करने और नारेबाज़ी करने के चलते यह हिंसा हुई है.
इन लोगों का कहना है कि लंबे वक़्त से जारी विरोध-प्रदर्शनों के चलते उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है. इन लोगों में गणतंत्र दिवस के दिन प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित रूप से किए गए राष्ट्रीय ध्वज के "अपमान" को लेकर भी ग़ुस्सा था.
इसी तरह का लेकिन अपेक्षाकृत थोड़ा शांत प्रदर्शन गुरुवार को भी हुआ था जिसमें शामिल लोगों का कहना था कि वे स्थानीय नागरिक हैं.
पुलिस ने किए ढांचागत बदलाव
इसके चलते चारों तरफ़ तनाव पैदा हो गया है. स्थानीय प्रशासन ने गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा के चलते यहां कुछ ढांचागत बदलाव किए हैं.
पुलिस ने अब दिल्ली-सिंघु बॉर्डर रोड को प्रदर्शन स्थल से क़रीब दो किलोमीटर पहले ही रोक दिया है.
उन्होंने प्रदर्शन वाले दो मंचों के बीच के इलाक़े को भी बंद कर दिया है. यानी आप एक मंच से दूसरे तक चलकर नहीं जा सकते हैं.
पहले लोग आसानी से इधर से उधर जा सकते थे. एक जेसीबी मशीन को भी यहां लगा दिया गया है ताकि दिल्ली से हरियाणा को जोड़ने वाले सिंघु बॉर्डर पर सड़क को खोदा जा सके.
टिकरी बॉर्डर पर क्या हैं हालात
ऐसे ही कुछ हालात टिकरी बॉर्डर पर भी हैं. यहां भी अब पहले से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी और ज़्यादा अवरोधक लगा दिए गए हैं.
दोनों ही जगहों पर एक के बाद एक स्पीकर गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा का ज़िक्र कर रहे थे.
सिंघु बॉर्डर पर एक महिला ने भाषण में कहा, "लाल क़िले पर हुई घटना की हम निंदा करते हैं. लेकिन, इसका मतलब ये नहीं है कि इससे हमारा विरोध-प्रदर्शन ख़त्म हो जाएगा. मीडिया ऐसे दिखा रहा है जैसे कि सभी किसान अपने घरों पर जा रहे हैं. ये हक़ीक़त नहीं है. केवल वो लोग वापस लौट रहे हैं जो कि ख़ासतौर पर ट्रैक्टर परेड में हिस्सा लेने आए थे. लेकिन, कई लोग आ भी रहे हैं."
यह वाकई में एक चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या किसान वापस लौट रहे हैं? दोनों ही बॉर्डरों पर शुरुआत में कम भीड़ दिखाई देती है. लेकिन, लोगों से बात करने पर हक़ीक़त का पता चल जाता है.
मोहाली के बलजीत सिंह बताते हैं, "कुछ ख़ाली जगहों से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि लोग वापस चले गए हैं. लोग पहले जितने ही हैं. केवल ट्रैक्टर परेड के लिए आए लोग लौट गए हैं. इसी वजह से कुछ जगह खाली दिखाई दे रही है."
एक प्रदर्शनकारी मेजर सिंह कहते हैं, "फ़ेक मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि किसान वापस लौट गए हैं जबकि ये सच नहीं है. किसानों को देखने और हालात का जायज़ा लेने आने वालों की तादाद शायद अब घट गई है क्योंकि मीडिया टिकरी और सिंघु बॉर्डर दोनों ही जगहों पर तनाव के हालात दिखा रही है."
'किसान संगठनों के आह्वान पर भीड़ लौट आएगी'
26 नवंबर से ही विरोध-प्रदर्शन में शामिल हरजिंदर सिंह कहते हैं कि पंजाब में शिक्षण संस्थान खुलने की वजह से कुछ युवा भी वापस लौटे हैं. "कुछ पेरेंट्स अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं. स्कूल खुल रहे हैं और परीक्षाओं में ज़्यादा वक्त नहीं रह गया है."
होशियारपुर के एक गांव से आए हुए जसविंदर सिंह शाह कहते हैं, "केवल वे लोग वापस लौटे हैं जो कि ट्रैक्टर परेड के लिए आए हुए थे. तक़रीबन 33 ट्रैक्टर ट्रॉलीज़ तो मेरे इलाके से ही आई थीं जो कि वापस लौट गई हैं. लेकिन, अगर किसान संगठन एक और बार आह्वान करेंगे तो वे यहां फिर से आने के लिए तैयार हैं."
गुरदासपुर के बटाला से आए जोध बाजवा कहते हैं, "हज़ारों लोग रिपब्लिक डे परेड के लिए आए थे. ट्रैक्टर से आने और वापस जाने में तीन-तीन दिन का वक़्त लगता है. ऐसे में वे अपने परिवारों से मिलने गए हैं और कुछ दिनों में ही वे लोग वापस आ जाएंगे."
गुज़रे क़रीब एक महीने से यहां मौजूद हेमंत तेसावर कहते हैं, "लोग डरे हुए हैं और नज़दीकी से नज़र बनाए हुए हैं."
किसान नेता इस बात से अवगत हैं कि हालिया हिंसा का किसानों पर असर हुआ है. एक किसान नेता ने कहा है, "हम उनका मनोबल बढ़ाने के लिए उनसे संपर्क कर रहे हैं और हमें पक्का भरोसा है कि यह असर अस्थाई है."
एक नेता ने कहा कि किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर ट्रैक्टरों पर तिरंगा लेकर 16 किलोमीटर लंबी रैली निकाली है. उन्होंने कहा कि ऐसा किसानों में धार्मिक आधार पर फूट डालने की कोशिशों को रोकने के लिए किया गया है.
किसान नेताओं ने ये भी बताया है कि उन्होंने पंजाब और हरियाणा में किसान नेताओं से और ज़्यादा किसानों को भेजने के लिए कहा है. एक नेता ने बताया, "जल्द ही आप टिकरी और सिंघु दोनों जगहों पर इसका असर देखेंगे."
किसान नेता जगमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें पता है कि पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस जारी किए हैं और मामले दर्ज किए गए हैं. वे कहते हैं, "लेकिन, हमें इसकी कोई चिंता नहीं है. हमारी रणनीति तैयार है."
वे कहते हैं कि अगर नेता अरेस्ट होते हैं तो उनके पास दूसरी और तीसरी कतार के नेता तैयार हैं जो कि इस आंदोलन का नेतृत्व करेंगे.
उन्होंने कहा, "हमने यहां आने से पहले अपने परिवारों को बता दिया था कि हम तब तक वापस नहीं आएंगे जब तक कि ये क़ानून वापस नहीं ले लिए जाते. हम इस पर अडिग हैं."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)