किसान आंदोलन ने बीजेपी की चिंता बढ़ाई, ध्यान उत्तर प्रदेश की ओर- प्रेस रिव्यू

द टेलीग्राफ में छपी ख़बर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को जो बयान दिया, उससे संकेत मिलता है कि सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा से किसानों की साख पर उठे सवाल कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं और किसान आंदोलन दोबारा मज़बूत होता नज़र आ रहा है.

ख़बर में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 150 से अधिक किसानों की धरने के दौरान हुई मौत के बावजूद प्रदर्शनकारी किसानों की तरफ़ हाथ नहीं बढ़ाया, लेकिन अब उनका रुख़ बदला हुआ लग रहा है.

कुछ समय पहले तक मोदी सरकार को लग रहा था कि किसान आंदोलन पंजाब केंद्रित है जिसे कुछ समर्थन हरियाणा से भी मिल रहा है. लेकिन अब सरकार के कान खड़े हो रहे हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होना है.

बीजेपी के भीतर कई लोगों को ऐसा लग रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश अब किसान आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन सकता है जो योगी आदित्यनाथ की सरकार के लिए अच्छी ख़बर नहीं होगी.

क्रिटिकल आइटम्स के लिए भारत अब भी चीन पर निर्भर

द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक, भारत चीन पर निर्भरता कम करने के लिए लंबी रणनीति पर काम कर रहा है, लेकिन अभी भी 'क्रिटिकल आइटम्स के लिए चीन सबसे बड़ा स्रोत' बना हुआ है.

ख़बर में कहा गया है कि मोबाइल फ़ोन कंपोनेंट्स से लेकर दवाओं के लिए ज़रूरी घटकों की आपूर्ति के लिए भारत की चीन पर निर्भरता बनी हुई है जो असंतुलित व्यापार से कहीं अधिक बड़ी चिंता है.

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव संजय चड्ढा ने ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ़ चाइना स्टडीज़ में कहा है कि "व्यापार घाटा डॉलर्स में नहीं बल्कि ज़रूरत से ज़्यादा निर्भर होने में है."

उनका कहना है, "किसी भी मोबाइल में इस्तेमाल होने वाला 85 प्रतिशत सामान एक ही देश से आ रहा है. यदि चीन ने पेनिसिलीन के लिए ज़रूरी घटक देना बंद कर दिया तो हम अपने देश में पेनिसिलीन भी नहीं बना पाएंगे."

उन्होंने कहा कि भारत इससे निजात पाने के लिए कई उपाय कर रहा है जिनमें प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स से लेकर घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना भी शामिल है.

ख़बर में कहा गया है कि भारत अभी भी सबसे अधिक आयात चीन से कर रहा है, हालाँकि पिछले साल इसमें 10.8 प्रतिशत की गिरावट आई है जो साल 2016 के बाद सबसे कम रहा.

इसराइली दूतावास धमाके में शक़ की सुई 182 लोगों पर

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर में कहा गया है कि शुक्रवार शाम इसराइली दूतावास के बाहर हुए धमाके में शक़ की सुई उन 182 लोगों की ओर घूम रही है जो धमाके से ठीक दो घंटे पहले रास्ते से गुजरे थे.

ख़बर में कहा गया है कि शुक्रवार को दोपहर 3.10 बजे से शाम 5.10 बजे तक कुल 61 लोग सड़क के एक तरफ़ से पैदल गुजरे, जबकि दूसरी तरफ़ से इसी अवधि के दौरान 121 लोगों का आना-जाना हुआ.

पुलिस को संदेह है कि सड़क के दोनों ओर धमाके से दो घंटे पहले गुजरे इन 121 लोगों में से ही किसी का धमाके में हाथ हो सकता है.

जाँच अधिकारियों का मानना है कि पैदल गुजरे इन्हीं में से किसी व्यक्ति ने पेड़ के नीचे विस्फोटक उपकरण रखा होगा, क्योंकि इस दौरान कोई संदिग्ध वाहन उस जगह पर नहीं रूका था.

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, धमाके की जगह के नज़दीक 7000 से अधिक सेल फ़ोन एक्टिव थे और अब उनमें से ऐसे नंबरों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनकी सिम हाल ही में ख़रीदी गई हो या जिनका संबंध भारत से बाहर किसी देश से हो सकता है.

सिर्फ़ एक फ़ोन कॉल पर सरकार बातचीत के लिए तैयार: मोदी

दैनिक जागरण में छपी ख़बर में कहा गया है कि गणतंत्र दिवस के दिन लाल क़िले पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुड़दंग और हिंसा को किनारे रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि सुधार क़ानूनों पर सरकार की तरफ़ से खुली बातचीत की पेशकश की है.

शनिवार को सर्वदलीय बैठक के दौरान पीएम मोदी ने साफ़ कहा कि कृषि क़ानून विरोधी किसानों को दिए गए प्रस्ताव पर विकल्प अभी भी खुला है और सरकार बातचीत के लिए केवल एक फ़ोन कॉल की दूरी पर है.

ख़बर में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने आंदोलनरत किसानों को फिर से बातचीत की मेज पर लौटने का विकल्प देकर दोबारा स्पष्ट किया है कि सरकार स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है.

प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव पर किसान संगठनों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि सरकार बातचीत के लिए बुलाती है तो हम ज़रूर जाएंगे.

लेकिन उन्होंने दोहराया है कि तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करना और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की गारंटी उनकी प्रमुख मांग है. ख़बर के मुताबिक, ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैट ने कहा है कि सरकार धरना-स्थल पर आकर वार्ता के लिए न्यौता दे.

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