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हाथी के ऊपर जलता हुआ टायर फेंकने वाला वीडियो सामने आया
- Author, एम हरिहरन
- पदनाम, बीबीसी तमिल
तमिलनाडु के वन अधिकारियों ने बताया है कि नीलगिरि के मसिनागुड़ी में हाथी को जलाए जाने के मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और एक की तलाश जारी है.
तमिलनाडु की इस घटना में चालीस साल के नर हाथी की दो दिन पहले गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी. कान और पीठ जलने की वजह से वह गंभीर रूप से घायल हो गया था.
वन्यजीव कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ लोगों ने हाथी पर जलता हुआ टायर फेंका था जिसकी वजह से उसकी मौत हुई है.
इस संबंध में एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक जलती हुई चीज़ हाथी के ऊपर फेंकते हुए देखा गया. इससे उसके कान और पीठ में आग लग गई और वह जंगलों की तरफ भाग रहा है.
नीलगिरि के मावानेला से रेमंड ओर प्रशांत नाम के दो शख्स को गिरफ़्तार किया गया है और अधिकारी तीसरे शख्स रेयान की तलाशी कर रहे हैं.
इन तीनों पर वनजीव संरक्षण क़ानून के तहत मामला दर्ज किया गया है.
वन विभाग ने बताया है कि रेमंड और रेयान दोनों भाई हैं और वो अपने पिता के घर में 'होम स्टे' चलाते हैं. होम स्टे में मेहमानों के रुकने की व्यवस्था होती है. प्रशांत इसी होम स्टे के तहत वहाँ रह रहे थे.
वन विभाग ने यह भी बताया कि उनके होम स्टे के नजदीक आ गए हाथी को इन तीनों ने वहाँ से खदेड़ा.
ज़िला प्रशासन ने ग़ैर-क़ानूनी तरीके से चलाए जा रहे उनके लॉज को सील कर दिया है.
कड़ी सज़ा की माँग
शुरू में इस घायल हाथी का इलाज मसिनागुड़ी के नज़दीक मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में हुआ लेकिन हाथी के जख्म ठीक नहीं हुए और उसका एक पूरा कान अलग हो गया. इसकी वजह से उसके ख़ून निकलने शुरू हो गए.
हालाँकि बाद में वन विभाग ने इस हाथी को इलाज के लिए थेप्पाकाडु कैम्प ले जाने की कोशिश की. लेकिन बिगड़ते हालत की वजह से हाथी की मौत हो गई.
बीबीसी तमिल से वन कार्यकर्ता कोवाई शदाशिवम ने कहा कि जिन लोगों ने ये किया है उन्हें कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए.
वे कहते हैं, "मसिनागुड़ी में हाथियों के लिए तीन मुख्य रास्ते हैं. वर्तमान में इन रास्तों का उपयोग ग़ैर आदिवासी लोगों की ओर से व्यावसायिक उद्देश्य से किया जा रहा है. इन रास्तों पर कई व्यावसायिक इमारतें जिसमें होस्टल और चाय-पानी की दुकानें भी हैं, बनी हुई हैं. इन इमारतों ने हाथी के रास्तों पर अपना कब्जा कर लिया है."
कोवाई शदाशिवम कहते हैं, "यह इलाका अब हाथियों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है. अब जंगल ही हाथियों के लिए एकमात्र जगह बची रह गई है. हाथियों को मारना बिल्कुल बर्दाश्त करने लायक नहीं है. इस जुर्म के लिए उम्र कैद की सज़ा होनी चाहिए."
वन्यजीव कार्यकर्ता ओसाई कालीदास कहते हैं कि मसिनागुड़ी में नाइट क्लब पर प्रतिबंध लगना चाहिए. इससे इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा.
वे कहते हैं, "भूल जाइए कि मसिनागुड़ी अब इको-टूरिज्म की जगह रह गई है. अब यह मनोरंजन की जगह बन चुकी है. इसकी वजह से वन्यजीवों का उत्पीड़न हो रहा है."
"सुप्रीम कोर्ट ने मसिनागुड़ी में हाथियों के इलाके से इमारतों को हटाने के लिए एक कमिटी का गठन किया है और तत्काल इसे रोकने का आदेश दिया है. लेकिन इसके बावजूद इस इलाके में अतिक्रमण जारी है जिससे वन्यजीवों को नुकसान हो रहा है. हम सभी वन्यजीव कार्यकर्ता इसके ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई करने को लेकर योजना बना रहे हैं."
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