कोरोना वैक्सीन: बेंगलुरू में टीके को लेकर कई लोगों में शंकाएं

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

"मुझे वैक्सीन लेने से डर लग रहा है. हां, मैंने पहले अपना नाम रजिस्टर करवाया था क्योंकि पिछला एक साल काफी मुश्किलों भरा रहा है. मैं अपने परिवार के साथ भी नहीं रह पाया."

बेंगलुरू के एक सरकारी अस्पताल में काम करने वाले थियागराग बी ने बीबीसी से ये बातें कहीं.

सर सीवी रमन जनरल अस्पताल में कोविड पॉज़ीटिव मरीज़ों को खाना पहुंचाने वाले थियागराग कहते हैं कि उनका अनुभव भयानक था.

वो कहते हैं, "हर दिन घर जाकर नहाना पड़ता है, लेकिन सबसे ज़्यादा डर मुझे अपनी पत्नी और बच्चे के लिए लगता था कि कहीं उन्हें इंफेक्शन ना हो जाए."

वैक्सीन के परिणाम को लेकर डर

थियागराज कहते हैं, "मैं वैक्सीन लेने जब कमरे में जा रहा था तो डरा हुआ था. क्या इससे मुझे फ़ायदा होगा या फिर इससे दूसरी जटिलताएं होने लगेंगी, ऐसे सवाल मन में उठ रहे थे. लेकिन मेरे साथ काम करने वाले लोगों को देख मैं प्रोत्साहित हुआ. अस्पताल के सुपरिटेंडेंट ने मुझसे पूछा कि मुझे बीपी या शुगर की बीमारी तो नहीं, मैंने कहा नहीं, तो उन्होंने पीठ थपथपाई"

नर्सिंग सुपरीटेंडेंट एस वैद्याम्बल ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हम वैक्सीन को लेकर बहुत खुश हैं. ये सब लोग दहशत में रह चुके हैं. वो मरीज़ों की हर ज़रूरत का ख्याल रखते रहे हैं. हम मरीजों की मदद के लिए मनोवैज्ञानिकों को भी बुलाते थे. हमें रोल मॉडल बनना होगा. तभी लोगों का विश्वास बढ़ेगा.''

लेकिन हर किसी में इतना विश्वास नहीं है. अस्पताल में काम करने वालीं 50 साल की एक सफ़ाईकर्मी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उन्होंने अभी तक अपना नाम दर्ज नहीं करवाया है.

ये पूछने कि क्या उन्हें वैक्सीन के रिएक्शन से डर लगता है, वो कहती हैं, "हां मैं इतने महीनों से डरी हुई हूं, लेकिन मेरा डर अभी गया नहीं है. मुझे नहीं पता कि वैक्सीन लेने के बाद क्या होगा ?

ये डर प्राइवेट सेक्टर के डॉक्टरों में भी दिखा, हालांकि कोई भी बात करने के लिए तैयार नहीं था.

कोवैक्सीन को लेकर शंकाएं

इसके अलावा चामराजनगर ज़िले के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में भारत में बनी कोवैक्सीन को लेकर भी लोग परेशान दिखे.

चामराजनगर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइसेंस के डीन और डायरेक्टक डॉ. जीएम संजीव ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हाँ, हमारे अपने डॉक्टरों को बहुत शंकाएं हैं. बहुत सारी स्टडीज़ अभी भी चल रही हैं. आज सुबह हमारी बैठक थी जिसकी अध्यक्षता मैंने की थी. अब तक लगभग 40 लोग वैक्सीन ले चुके हैं शाम तक ये आंकड़ा 100 तक पहुंच जाएगा. हमारे यहां लगभग 160 कर्मचारी हैं."

कर्नाटक में 234 सेंटर्स पर 22,256 को वैक्सीन दिया जाना है. कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग के बयान के मुताबिक "आज दिनभर में 4804 टीके दिए गए."

निजी अस्पताल के एक डॉक्टर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उन्हें कोविशील्ड लेने से कोई दिक्कत नहीं है , लेकिन वो कोवैक्सीन लेकर एक 'ट्रायल का हिस्सा' नहीं बनना चाहते.

कुल 21,658 स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण होना था लेकिन इनमें से सिर्फ़ 13,408 स्वास्थ्यकर्मियों ने ही टीका लगवाया.

सभी को नहीं है डर

लेकिन सीवी रमन जनरल अस्पताल की लैब टेक्नीशियन नर्गिस बानो को किसी तरह का डर नहीं है.

वो कहती हैं, "पिछले नौ महीनों में हमनें बहुत झेला है. मेरे परिवार को कोविड हो गया था. इसके कारण मैंने अपने पिता को खोया है. अब वैक्सीन आ गई है, तो मरीज़ों का इलाज हम आश्वस्त होकर करेंगे. इससे हमें ताकत मिलेगी. मुझे वैक्सीन से होने वाले किसी रिएक्शन का डर नहीं है.''

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