चीन ने युद्ध की तैयारियों के लिए रक्षा नियमों में किया संशोधन- प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, Getty Images
द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन के नेशनल डिफेंस लॉ में बदलाव के आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं.
इसके बाद सेंट्रल मिलिटरी कमिशन (सीएमसी) के पास राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सेना को तैनात करने की अधिक शक्तियां होंगी. राष्ट्रपति जिनपिंग ही सीएमसी के प्रमुख हैं.
अख़बार ने चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से बताया है कि नए बदलाव युद्ध की तैयारी और क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित हैं.
नए बदलाव के तहत 'जब भी संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा या विकास के हित ख़तरे में होंगे तो वह राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर सेना की तैनाती कर सकेगा.
'विकास के हित' संदर्भ को क़ानून में नया जोड़ा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके तहत चीन के आर्थिक हितों और विदेशों में संपत्तियों की सुरक्षा की जा सकेगी. यानी बेल्ट एंड रोड अभियान के तहत आने वाली संपत्तियों की सुरक्षा के लिए भी सेना की तैनाती की जा सकेगी.
रक्षा क़ानून में ये संशोधन चीन की सेना के दायरे को भौगोलिक सीमाओं, समुद्री सीमाओं और वायुक्षेत्र के बाहर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक नेटवर्कों और बाहरी अंतरिक्ष तक बढ़ा देंगे.
विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि इन बदलावों के साथ ही सीएमसी के पास अधिक शक्तियां आ जाएंगी. साथ ही जो निर्णय लेने के अधिकार स्टेट काउंसिल या कैबिनेट के पास थे वो भी सीएमसी के पास होंगे.
क़ानून में इन बदलावों का बड़ा मक़सद चीन की सेना के आधुनिकीकरण की रफ़्तार को और बढ़ाना है.
साल 2016 में भी राष्ट्रपति जिनपिंग ने बड़े सुधार करते हुए पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (चीन की सेना पीएलए) के कई विभागों को सीएमसी के सीधे नियंत्रण में लिया था.
सात सैन्य क्षेत्रों का पुनर्गठन करके उन्हें पाँच थिएटर कमांड में बदल दिया गया था. चीन की सेना की वेस्टर्न थिएटर कमांड भारत के साथ लगी सीमा की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालती हैं. ये चीन की सेना की सबसे बड़ी कमान भी है.

इमेज स्रोत, MUJEEB FARUQUI/HINDUSTAN TIMES VIA GETTY IMAGES
शांति रहेगी तो ही लोकतंत्र रहेगा- शिवराज सिंह चौहान
मध्य प्रदेश की सरकार पत्थरबाज़ों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानून लाने जा रही है जिसके तहत अभियुक्तों की संपत्ति ज़ब्त करने का प्रावधान होगा.
सरकारी संपत्ति के अलावा आम नागरिकों की संपत्ति को हुए नुक़सान की भरपाई करने का प्रावधान भी किया जाएगा.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शांति रहेगी तब ही लोकतंत्र भी बचा रहेगा.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'पत्थरबाज़ समाज के दुश्मन हैं, चाहें वो कोई भी हों. पत्थरबाज़ी कोई सामान्य अपराध नहीं है, इससे लोगों की जान जा सकती है, आतंक का माहौल पैदा हो सकता है.'
उन्होंने कहा कि अब इसे छोटा-मोटा अपराध नहीं माना जाएगा बल्कि इसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी.
मध्य प्रदेश के उज्जैन और इंदौर में राम मंदिर के लिए चंदा मांगने के लिए निकाली गई रैलियों पर मुस्लिम बहुल मुहल्लों में पत्थरबाज़ी की घटनाओं के बाद प्रशासन ने पत्थरबाज़ों के घर भी तोड़े हैं.
चौहान ने कहा, ''अगर कोई शांतिपूर्ण तरीक़े से अपना मुद्दा उठाता है तो लोकतंत्र बचा रहता है. लेकिन किसी के पास सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने का अधिकार नहीं है.'
मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश की तरह ही अध्याधेश लाया जा रहा है. यूपी में निजी और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुक़सान की भरपाई के लिए ऑर्डिनेंस लाया गया है.

इमेज स्रोत, Getty Images
यूपी पुलिस ने कहा-मुसलमानों को धर्म-परिवर्तन के झूठे मुक़दमें में फंसायागया
द हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने कहा है कि तीन मुसलमान युवकों को कथित धर्म-परिवर्तन के झूठे मुक़दमे में फंसाया गया था.
इन युवकों पर एक 24 वर्षीय शादीशुदा युवती को धमकाने का मामला दर्ज किया गया था. अब पुलिस का कहना है कि मामला रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है.
31 दिसंबर को बरेली के फ़रीदपुर थाने में इन युवकों के ख़िलाफ़ युवती को धमकाने और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज किया गया था.
ये मुक़दमा युवती के मामला की शिकायत पर दर्ज हुआ था. अब पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में पता चला है कि धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप ग़लत हैं.
बरेली के एसएसपी ने अख़बार से कहा है कि जांच में पता चला है कि युवक घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे.
उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन के ख़िलाफ़ नया अध्याधेश लाया गया है जिसके बाद शादी के लिए धर्म परिवर्तन के लिए कम से कम दो महीने पहले ज़िलाधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है.
ज़बरदस्ती धर्म-परिवर्तन कराने पर एक साल से दस साल तक की सज़ा का प्रावधान भी किया गया है.

इमेज स्रोत, Getty Images
लोन ऐप घोटाले की जाँच करेगा ईडी
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि उसने तुरंत लोन देने वाली एप के पैसों के स्रोत की जांच के लिए मनी लॉन्डरिंग का केस दर्ज किया है.
ईडी का कहना है कि उसने हैदराबाद और साइबराबाद पुलिस की तरफ़ से दर्ज की गई एफ़आईआर का संज्ञान लिया है. गिरफ्तार किए गए भारतीय और चीनी नागरिकों पर मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत भी मुक़दमा दर्ज हुआ है.
ईडी ने कहा है, ''अवैध लोन ऐप सभी तरह की नियामक एजेंसियों को नज़रअंदाज़ कर रही हैं. हम पैसों को विदेश भेजे जाने की आशंका की जांच कर रहे हैं.' हैदराबाद पुलिस ने अब तक इस मामले में 27 एफ़आईआर दर्ज की हैं. पुलिस को अब तक 21 हज़ार करोड़ रुपए की 1.4 करोड़ ट्रांजेक्शन के बारे में पता चला है. अब तक गुरुग्राम, हैदराबाद और बेंगलुरु में कई ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












