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किसानों ने कहा समय बर्बाद कर रही है सरकार, प्रस्ताव पर आज चर्चा - प्रेस रिव्यू
सरकार के किसान संगठनों को एक बार फिर बातचीत के लिए आमंत्रित करने के एक दिन बाद किसान संगठनों ने कहा है कि सरकार उनका समय बर्बाद कर रही है.
किसान संगठनों का कहना है कि मंगलवार को वो सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे और इस बात पर फ़ैसला लेंगे कि उन्हें सरकार को क्या जवाब देना है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार कृषि मंत्रालय की चिट्ठी लेने वाले क्रांतिकारी किसान यूनियन के डॉक्टर दर्शन पाल ने कहा कि "सरकार काम में गंभीर नहीं है."
उन्होंने एक बार फिर हाल में पारित कि गए तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने की मांग की और कहा कि, "हमने पहले ही सरकार को कह दिया है हम कृषि क़ानूनों में किसी तरह से संशोधन की बात स्वीकार नहीं करेंगे."
अख़बार के अनुसार जम्हूरी किसान सभा के महासचिव कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि किसानों का अगला कदम क्या होगा इस पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को किसान संगठनों की बैठकर होगी.
उन्होंने कहा, "सरकार ने हमें पांच पन्नों की एक चिट्ठी दी है जिसमें कहा गया है कि पहले हुई बैठकों में क्या हुआ है. ये वक्त बर्बाद करने का तरीका है."
अख़बार लिखता है कि वहीं राष्ट्रीय किसान मज़दूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ने कहा है कि "सरकार बैठक करना ही नहीं चाहती, वो केवल औपचारिकता पूरी कर रह है. अगले दौर की बातचीत को लेकर सरकार गंभीर होती तो वो समय और वक्त बता देती."
क्रिसमस पर कुछ किसानों से बात करेंगे पीएम
कृषि मंत्रालय ने कहा है कि 25 दिसंबर को क्रिसमस डे के मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीएम किसान डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजना के तहत किसानों के लिए अगली किस्त रिलीज़ करेंगे, और साथ ही खेती से मुद्दों पर कुछ किसानों से बात करेंगे.
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार इस योजना के तहत 8 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18,000 करोड़ रुपये पहुंचाए जाएंगे.
किसानों के खातों में कैश ट्रांसफर करने की योजना के तहत साल 2019 में पहली किस्त रिलीज़ की गई थी. लेकिन इस बार सरकार किसानों को कैश ऐसे वक्त देने जा रही है जब राजधानी दिल्ली में हज़ारों की संख्या में किसान कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं.
मंगलवार को किसानों के विरोध प्रदर्शन का 27वां दिन है. किसानों का कहना है कि कृषि क़ानूनों का बुरा असर उनकी आजीविका पर पड़ेगा. हालांकि सरकार का कहना है कृषि सुधारों से किसानों के लिए नए बाज़ार खुलेंगे और कृषि के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा.
अख़बार में एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि मोदी नए कृषि क़ानूों के फायदों के बारे में किसानों से बात कर सकते हैं.
पीएम किसान योजना के तहत सरकार किसानों को चार महीनों में एक बार दो-दो हज़ार रुपये की राहत राशि, यानी साल में 6000 रुपये देती है. ये योजना फरवरी 2019 में लांच की गई थी और उस वक्त इसकी पहली किस्त किसानों को दी गई थी.
अधिकारी के हवाले से अख़बार लिखता है कि मोदी किसानों से ये पूछ सकते हैं कि सरकार की इस योजना से उन्हें कैसे और कितना लाभ मिला. साथ ही वो आने वाले बजट के मद्देनज़र भी किसानों से पूछ सकते हैं कि उनकी बजट से क्या अपेक्षा है.
अधिकारी के अनुसार देश के अलग-अलग कोने से किसान पंचायत में मौजूद इंटरनेट की सुविधा के ज़रिए मोदी से वर्चुअल मुलाक़ात करेंगे.
कोरोना के नए वेरिएंट के कारण रद्द की गई उड़ानें
कोरोना वायरस के नए वेरिएंट के सामने आने के बाद दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है और इसे फैलने से रोकने के लिए एक के बाद एक देश ब्रिटेन से आ रही उड़ानों को रद्द कर रहे हैं.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पहले पन्ने पर छपी एक ख़बर के अनुसार भारत ने दिसंबर 23 से लेकर दिसंबर 31 तक ब्रिटेन से आने जाने वाली सभी उड़ानों को रद्द कर दिया है.
उड़ानों पर रोक मंगलवार आधी रात से लागू हो जाएगी. तब तक ब्रिटेन से आने वाले सभी यात्रियों के लिए आरटी-पसीआ टेस्ट कराना बाध्य होगा.के पहले पन्ने पर छपी एक ख़बर के अनुसार भारत ने दिसंबर 23 से लेकर दिसंबर 31 तक ब्रिटेन से आने जाने वाली सभी उड़ानों को रद्द कर दिया है.
वहीं मुंबई ने ब्रिटेन से आ रहे लोगों के लिए सात दिन के क्वारंटीन की बात की है और कहा है जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण होंगे उन्हें होटलों में रखा जाएगा जबकि वो लोग जिनमें संक्रमण के लक्षण होंगे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा.
महाराष्ट्र सरकार ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए जनवरी की पांच तारीख तक रात 11 बजे से लेकर सवेरे 6 बजे तक के रात का कर्फ्यू लगाने का ऐलान किया है.
द इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार वायरस के नए वेरिएंट के कारण ब्रिटेन में हुई आंशिक तालाबंदी का असर भारत के शेय़र बाज़ार पर पड़ा है.
इसके कारण पैदा हुए डर के माहौल के कारण भारत की बीएसई सेन्सेक्स में जहां 3.00 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई वहीं निफ्टी 3.14 फिसदी नीचे लुढका और 13,328.40 पर आकर बंद हुआ.
अख़बार कहता है कि इस साल की मई 4 के बाद से पहली बार है जब सेंसेक्स नीचे आया है.
केवल भारतीय बाज़ार ही नहीं यूरोपीय स्टॉक बाज़ार और अमेरिकी स्टॉक बाज़ार भी नीचे लुढ़कते दिखाई दिए.
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