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कोरोना: इस तरह भारत में एक करोड़ के पार पहुंचा संक्रमण
भारत में कोरोना संक्रमण के मामले में एक करोड़ के आंकड़े को पार कर गए हैं. पिछले 24 घंटे में देश में 25,153 मामले सामने आए और इसी के साथ संक्रमण के कुल मामले एक करोड़ से ज़्यादा हो गए.
कोरोना से मरने वालों की संख्या भी करीब डेढ़ लाख के करीब पहुँच चुकी है.
कोरोना संक्रमण के मामलों में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है. भारत से ज्यादा संक्रमण के मामले सिर्फ़ अमेरिका में है जहाँ संक्रमण के कुल मामले करीब एक करोड़ 70 लाख है.
भारत में संक्रमण का सबसे शुरुआती मामला इस साल के जनवरी महीने में आया था लेकिन इसमें तेज़ी मार्च के महीने में आने शुरू हुए थे. मार्च के महीने के आखिर तक लगभग 1400 लोग संक्रमित हो चुके थे और 35 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी थी.
शुरुआती दौर में मार्च के महीने में दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे. लेकिन इन राज्यों में भी कुछ खास जगहों पर कोरोना का प्रकोप ज्यादा देखा गया था.
इन्हें हॉटस्पॉट के तौर पर पहचाना गया था. ये हॉटस्पॉट थे - निज़ामुद्दीन, दिलशाद गार्डन, नोएडा, मेरठ, भीलवाड़ा, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, कासरगोड और पथानामथिट्टा.
लॉकडाउन और कोरोना का बढ़ता ग्राफ़
22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाया गया था और 25 मार्च (24 मार्च की मध्य रात्रि) से पहले लॉकडाउन की घोषणा की गई थी. पहला लॉकडाउन 21 दिनों के लिए लगाया गया था. सरकार ने चेन ऑफ ट्रांसमिशन को तोड़ने के मकसद से ये लॉकडाउन लगाया था.
लेकिन 21 दिनों के पहले लॉकडाउन के ख़त्म होने के दिन तक मतलब 14 अप्रैल तक कोरोना संक्रमण के कुल मामले देश में 10 हज़ार के आंकड़े को पार कर गए थे. उस वक्त तक संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या 353 हो चुकी थी.
इसके बाद तेज़ी से मामलों में इजाफा देखने को मिला और करीब एक महीने के बाद इसमें लगभग दस गुणा तक की बढ़ोत्तरी हुई. 19 मई को संक्रमण के मामले एक लाख के आंकड़े को पार कर गया था.
इस दिन तक संक्रमण के कुल मामले 101139 थे और मरने वालों की संख्या 3163 हो चुकी थी.
इस दौरान लॉकडाउन चौथे चरण में पहुँच चुका था और चौथे चरण का लॉकडाउन 31 मई तक लगाया गया था. कुल मिलाकर पांच चरणों में लॉकडाउन लगाया गया.
लॉकडाउन के दौरान यातायात के साधनों के बंद होने से सामानों की आपूर्ति की समस्या खड़ी हुई तो वहीं काम-धंधे बंद होने से प्रवासी मज़दूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हुआ. वो पैदल अपने घरों को लौटने पर मज़बूर हुए जिसने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा.
पांचवें चरण का लॉकडाउन 1 जून से 30 जून तक लगाया गया हालांकि केंद्र सरकार ने इसे अनलॉक-1 कहा. इसमें गृह मंत्रालय ने कई तरह की छूट की घोषणा की. पूरी तरह से लॉकडाउन करीब 68 दिनों तक रहा.
लॉकडाउन के अलावा सरकार ने कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग और टेस्टिंग जैसी रणनीतियों को भी अपनाया.
संक्रमण में तेज़ी
पहले अनलॉक की घोषणा के दिन तक कोरोना संक्रमण के एक लाख 90 हज़ार 535 मामले सामने आ चुके थे और पांच हज़ार से ज्यादा लोग कोरोना की वजह से मौत के शिकार हो चुके थे.
तीन जून को संक्रमण के मामले दो लाख के आंकड़े को पार कर गए थे. इस वक्त तक प्रति दिन संक्रमण के मामलों में औसतन 10 हज़ार का इजाफा हो रहा था.
लेकिन एक जून से अनलॉक-1 शुरू होने के साथ ही संक्रमण के मामलों में और तेज़ी देखी गई और जून के महीने के आख़िरी तक प्रति दिन औसतन 20 हज़ार संक्रमण के मामले सामने आने लगे.
इस वक्त तक संक्रमण के कुल मामलों में सिर्फ़ हफ़्ते भर के अंदर एक लाख का इजाफा होना शुरू हो गया और तेज़ी से संक्रमण का ग्राफ ऊपर उठा.
एक वक्त तो ऐसा आया कि प्रति दिन करीब 90 हज़ार से ज्यादा लोग संक्रमित होने लगे. सितंबर महीने में औसतन 93000 मामले प्रतिदिन आ रहे थे.
अहम पड़ाव
जुलाई के मध्य में संक्रमण के मामले ने दस लाख के आंकड़े को पार कर लिया और इसके करीब 20 दिन के बाद ही संक्रमण के कुल मामलों ने 20 लाख के आंकड़े को छू लिया था. इस दौरान प्रति दिन करीब पचास हज़ार संक्रमण के मामले सामने आ रहे थे.
सितंबर मध्य में (16 सितंबर को) संक्रमण के मामलों ने पचास लाख के आंकड़े को पार किया. इस वक्त तक करीब 80 हज़ार लोगों की मौत कोरोन संक्रमण से हो चुकी थी.
अब इसके करीब तीन महीने के बाद इसमें दोगुने की वृद्धि हुई है और यह आंकड़ा एक करोड़ को पार कर चुका है. मतलब करीब 90 दिनों में लगभग 50 लाख नए कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए हैं.
हालांकि इस दौरान रोजाना आ रहे मामलों में कमी देखने को मिली. फिलहाल प्रति दिन औसतन 22 हज़ार संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं.
इस दौरान लॉकडाउन की तरह ही अनलॉक भी पांच चरणों में लागू किया गया. आखिरी चरण का अनलॉक 15 अक्टूबर से लागू किया गया.
इसमें मल्टीप्लेक्स, थिएटर और सिनेमा हॉल को सोशल डिस्टेंसिंग के जरूरी दिशा-निर्देशों के साथ खोला गया.
भारत में सबसे ज्यादा कोरोना का प्रकोप महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में देखने को मिला. दिल्ली में तो कोरोना संक्रमण के तीन लहर देखने को मिले.
मार्च से लेकर दिसंबर तक में धीरे-धीरे कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या में भी इजाफा देखने को मिला. भारत में कोरोना से होने वाली मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम रही. भारत में दुनिया की आबादी का 17 फ़ीसद हिस्सा रहता है लेकिन कोरोना से हुई कुल मौतों का सिर्फ़ 10 फ़ीसद आंकड़ा भारत से देखने को मिला है.
हालांकि भारत में इस दौरान कम टेस्टिंग का भी मुद्दा उठाया जाता रहा लेकिन सरकार बराबर टेस्टिंग को बढ़ाने की बात करती रही. अगस्त के महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 लाख टेस्ट प्रतिदिन करने का टारगेट रखा था. उस वक्त एक हफ्ते के औसत के हिसाब से भारत में क़रीब 5 लाख टेस्ट रोज़ाना हो रहे थे.
अब तक भारत में लगभग 15 करोड़ टेस्टिंग करने की बात सरकार की तरफ़ से कही जा रही है.
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