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किसान आंदोलन पर हरियाणा के छह विधायक अलग से मिले - प्रेस रिव्यू
कृषि क़ानूनों के विरोध में दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले क़रीब 20 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हज़ारों किसानों के समर्थन में हरियाणा के छह विधायक सामने आए हैं.
अग्रेंज़ी अख़बार द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक़ पाँच निर्दलीय और जननायक जनता पार्टी के एक विधायक ने मंगलवार को पंचकुला में अनौपचारिक बैठक की और कहा कि केंद्र सरकार को इस समस्या का तत्काल समाधान ढूंढना चाहिए.
दादरी के विधायक सोमबीर सांगवान ने कहा कि उन लोगों ने विधायक रणधीर सिंह गोलन के घर पर मुलाक़ात की थी. सांगवान ने इस महीने के शुरू में बीजेपी-जेजेपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया था और हरियाणा लाइवस्टॉक डिवेलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बात का एहसास होना चाहिए कि किसानों का आंदोलन ज़ोर पकड़ रहा है. जेजेपी के विधायक जोगीराम सिहाग ने कहा कि वो हमेशा से किसानों के हिमायती रहे हैं लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं कि किसान 'अनुचित' माँग रखें.
सिहाग को हरियाणा सरकार ने हाउसिंग बोर्ड का चेयरमैन बनाया था लेकिन उन्होंने यह पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.
कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव अप्रैल में संभव
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार कांग्रेस पार्टी अपने अध्यक्ष पद के लिए अप्रैल के महीने में चुनाव करवाने पर विचार विमर्श कर रही है. पार्टी को हालांकि अभी यह तय करना बाक़ी है कि पार्टी की शीर्ष बॉडी कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्लूसी) के सदस्यों के लिए चुनाव करवाया जाए या नहीं.
अगस्त के महीने में सीडब्लूसी का पुनर्गठन किया गया था लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले एक गुट (जिसे जी-23 भी कहा जाता है क्योंकि 23 लोगों ने पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक ख़त लिखकर पार्टी के काम करने के तौर-तरीक़ों पर नाराज़गी जताई थी) ने सीडब्लूसी के चुनाव की पुरज़ोर वकालत की है.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि शीर्ष नेतृत्व पार्टी संगठन के चुनाव कराने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है. लेकिन सबसे अहम बात यह है कि राहुल गांधी ने अभी तक यह साफ़ संकेत नहीं दिए हैं कि वो अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगे या नहीं.
2019 के लोकसभा में पार्टी की शर्मनाक हार के बाद राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, जिसके बाद सोनिया गांधी को एक बार फिर अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था. गांधी परिवार के एक बहुत क़रीबी सूत्र ने बताया कि अगर राहुल गांधी अभी भी अध्यक्ष बनने के लिए तैयार नहीं होते हैं तो प्रियंका गांधी अगली उम्मीदवार हो सकती हैं.
तब्लीग़ी जमात केस: 36 विदेशी नागरिक रिहा, दिल्ली पुलिस को अदालत की फटकार
द इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक़ दिल्ली की एक अदालत ने इस साल मार्च में दिल्ली के निज़ामुद्दीन में तब्लीग़ी जमात के इजतमा (धार्मिक सम्मेलन) में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार 36 विदेशी नागरिकों को रिहा कर दिया है.
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि अभियुक्त तब्लीग़ी जमात के मुख्यालय मरकज़ में मौजूद थे. उन पर कोरोना के गाइडलाइन्स का उल्लंघन कर तब्लीग़ी जमात के इजतमा में शामिल होने का आरोप था. पुलिस का दावा था कि इन लोगों ने कोरोना के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया और इनके कारण बाद में 14 राज्यों में कोरोना फैला.
अदालत में फ़ैसला सुनाते हुए चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने हज़रत निज़ामुद्दीन थाने के एसएचओ और इस केस के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफ़िसर की फटकार लगाई और कहा कि उन्होंने अभियुक्तों की पहचान करने में ग़लती की है.
अभियुक्तों ने अदालत से कहा था कि उस समय (मार्च में जब मरकज़ में इजतमा हुआ था) वो लोग निज़ामुद्दीन मरकज़ में मौजूद नहीं थे और पुलिस ने उन्हें अलग-अलग जगहों से गिरफ़्तार किया था. उनका यह भी आरोप था कि पुलिस ने उन्हें केंद्रीय गृहमंत्रालय के निर्देश पर उन्हें साज़िश के तहत फंसाने के लिए गिरफ़्तार किया था.
अदालत ने उनकी इस दलील को स्वीकार कर लिया.
कोर्ट ने कहा, ''यह मेरी समझ से परे है कि आईओ इंस्पेक्टर सतीश कुमार ने बिना पहचान परेड (टीआईपी) करे कुल 2343 लोगों में से 952 विदेशी नागरिकों को पहचान लिया जिन्होंने एसएचओ के अनुसार कोरोना गाइडलाइन्स का उल्लंघन किया था.''
कोर्ट ने यह भी कहा कि एसएचओ मुकेश वालिया को पता था कि मरकज़ में शुरू से ही कितने लोग जमा हैं फिर भी समय रहते उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं कि जिससे उन्हें वहां से हटाया जा सके.
दिल्ली पुलिस ने 952 विदेशी नागरिकों पर वीज़ा नियमों और कोरोना गाइडलाइन्स के उल्लंघन का आरोप लगाया था. नौ सौ से ज़्यादा लोगों ने अपना जुर्म क़बूल कर लिया क्योंकि वो भारत में रहकर मुक़दमा नहीं लड़ना चाहते थे. लेकिन 44 विदेशी नागरिकों ने भारत में रहकर अपने ऊपर लगे आरोपों का मुक़दमा लड़ने का फ़ैसला किया था. उनमें से आठ को अदालत ने अगस्त में बरी कर दिया था क्योंकि अदालत को उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिले थे. बाक़ी बचे 36 विदेशी नागरिकों को दिल्ली की अदालत ने मंगलवार को बरी कर दिया.
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