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कोरोना वैक्सीनः भारत में कैसे और कहाँ मिलेगी, सरकार ने जारी की गाइडलाइन
कोरोना वैक्सीन का टीका भारत में लोगों को किस प्रक्रिया के तहत और कैसे लगाया जाएगा इसे लेकर केंद्र सरकार ने दिशानिर्देश सोमवार को जारी कर दिए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, केंद्र सरकार के विभिन्न निर्देशों में से एक निर्देश यह है कि प्रत्येक दिन हर सत्र में 100-200 लोगों को टीका दिया जाएगा जिसके बाद आधे घंटे तक उन लोगों पर नज़र रखी जाएगी कि किसी पर इसके प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं हैं.
इसके अलावा एक वक़्त पर सिर्फ़ एक व्यक्ति को टीके के लिए सेंटर के अंदर जाने की अनुमति होगी.
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल
राज्यों को जारी किए गए दिशानिर्देशों में कहा गया है कि टीका लेने वाले लोगों और कोरोना वायरस की वैक्सीन को ट्रैक करने के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म 'कोविड वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (को-विन) सिस्टम' का इस्तेमाल किया जाएगा.
टीकाकरण वाली जगह पर सिर्फ़ पहले से पंजीकृत लोगों को ही टीका दिया जाएगा ताकि प्राथमिकता तय की जा सके. उसी समय पंजीकरण का कोई प्रावधान फ़िलहाल नहीं किया गया है.
इसके साथ ही राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वो सबसे पहले यह चिन्हित कर लें कि किस राज्य के ज़िले में कौन-सा वैक्सीन निर्माता वैक्सीन पहुंचाएगा ताकि अलग-अलग वैक्सीन आपस में मिल ना जाएं.
'कोविड वैक्सीन ऑपरेशनल गाइडलाइंस' के अनुसार, वैक्सीन ले जाने वाला कोई कैरियर, शीशी या आइस पैक सीधे सूरज की रोशन के संपर्क में न आए, इसके लिए सभी उपाय किए जाने चाहिए.
वैक्सीन और अन्य द्रव्यों को कैरियर से तब तक नहीं निकाला जाएगा जब तक कि कोई शख़्स टीका लगवाने के लिए वैक्सीनेशन सेंटर पर मौजूद नहीं होगा.
चुनौतियों का भी किया ज़िक्र
दिशानिर्देशों में कहा गया है, "कोविड-19 वैक्सीन के लेबल पर शायद वैक्सीन वायल मॉनिटर्स (वीवीएम) और एक्स्पायरी की तारीख़ न हो लेकिन इससे वैक्सीन लगाने वालों को इसे इस्तेमाल करने में हतोत्साहित नहीं होना चाहिए. सत्र के आख़िर में सभी आइस पैक्स और वैक्सीन की शीशी के साथ वैक्सीन कैरियर को वितरण वाले कोल्ड चैन केंद्र पर भेजा जाना चाहिए."
राज्यों से कहा गया है कि वो 360 डिग्री का एक एकीकृत व्यापक समर्थन वाली संचार प्रणाली बनाएं और टीका लगाने की प्रगति और चुनौतियों से निपटने के लिए एक सामाजिक लामबंदी की रणनीति बनाएं.
केंद्र सरकार का कहना है कि देश कोविड-19 वैक्सीन प्रबंधन के सिरे पर खड़ा है और यहां तक कि कुछ चुनौतियों से समय पर निपटने की जरूरत है.
सरकार ने इन निर्देशों में चुनौतियां का ज़िक्र भी किया है. केंद्र सरकार का कहना है कि 1.3 अरब की आबादी वाले देश में लोगों को टीकाकरण की प्रगति और उसके लाभ के बारे में सही समय पर सही जानकारी देना चुनौती है.
इसके अलावा वैक्सीन किसको पहले दी जाएगी सरकार के इस फ़ैसले को लेकर जनता की चिंताएं और सवाल भी एक चुनौती होगी. वैक्सीन को बिना लंबे ट्रायल के बाद देने को लेकर भी लोगों को सुरक्षा की चिंता होगी. साथ ही सोशल मीडिया पर अफ़वाहों, नकारात्मक ख़बरों और टीके के असर को लेकर भी कई ग़लत धारणाएं बनाई जा सकती हैं.
कैसे होगा टीकाकरण
समाचार एजेंसी पीटीआई ने केंद्र सरकार के दस्तावेज़ के हवाले से बताया है कि टीकाकरण वाली टीम में पांच लोग शामिल होंगे.
दिशानिर्देशों में कहा गया है कि हर सत्र में सिर्फ़ 100 लोगों को वैक्सीन दी जाएगी लेकिन अगर उस सेंटर पर कोई वेटिंग रूम, निगरानी केंद्र, अधिक भीड़ को संभाल पाने और सामान रखने की व्यवस्था होगी तो वहां पर एक और वैक्सीनेटर ऑफ़िसर को तैनात किया जाएगा. इसके बाद वहां पर 200 लोगों को वैक्सीन दी जा सकेगी.
कोविड वैक्सीन सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों, फ़्रंटलाइन वर्कर्स और 50 साल से अधिक आयु के लोगों को दी जाएगी. इसके बाद 50 साल से कम आयु के उन लोगों को दी जाएगी जिनको अन्य बीमारियां हैं. इसके बाद देश के बाक़ी लोगों को इसकी उपलब्धता के हिसाब से वैक्सीन दी जाएगी.
वैक्सीन की उपलब्धता के आधार पर 50 साल से अधिक आयु के लोगों के समूह में भी विभाजन किया जा सकता है. इसमें 60 साल से अधिक आयु के लोगों का समूह और 50-60 साल आयु के लोगों का समूह बनाया जा सकता है.
टीकाकरण के पहले चरण में 30 करोड़ लोगों को टीका देने की योजना है.
टीकाकरण के लिए को-विन वेबसाइट पर ख़ुद से रजिस्ट्रेशन करने के लिए 12 फ़ोटो पहचान पत्र मान्य होंगे. इनमें वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और पेंशन दस्तावेज़ शामिल हैं.
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