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दूसरी तिमाही की जीडीपी में 7.5 फ़ीसद की गिरावट
मौजूदा वित्तीय वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 7.5 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई है और तकनीकी रूप से यह मंदी की पुष्टि करता है.
जीडीपी के आंकड़े आने से पहले तमाम एजेंसियों ने पाँच से दस फ़ीसद की गिरावट का अनुमान लगाया था. पिछली तिमाही में जीडीपी में लगभग 24 फ़ीसद की भारी गिरावट दर्ज की गई थी. पूरी तरह से लॉकडाउन के बाद जीडीपी का यह आंकड़ा आया था.
मौजूदा तिमाही में उद्योग क्षेत्र में 2.1, खनन क्षेत्र में 9.1 और विनिर्माण के क्षेत्र में 8.6 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि कृषि क्षेत्र और मैन्युफ़ैक्चरिंग के क्षेत्र में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है. कृषि क्षेत्र में जहाँ 3.4 फ़ीसद की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है तो वहीं मैन्युफ़ैक्चरिंग क्षेत्र में 0.6 फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ है.
रिज़र्ब बैंक के गर्वनर ने 26 नवंबर को एक आयोजन के दौरान कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर तरीक़े से वापस पटरी पर आ रही है लेकिन यह देखे जाने की ज़रूरत है कि यह रिकवरी टिकी रहे.
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने जीडीपी में हुई गिरावट को लेकर कहा है कि मौजूदा आर्थिक हालात कोविड-19 के असर की वजह से है.
जीडीपी के आंकड़ों पर कांग्रेस ने अपने ट्वीटर हैंडल से कहा है कि अब भारत 'आधिकारिक' तौर पर मंदी में है. क्या मोदी सरकार यह बताने की कृपा करेंगे कि उनके पास इस मंदी से उबरने की क्या योजना है.
क्या है जीडीपी?
जीडीपी किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं.
इससे पता चलता है कि सालभर या फिर किसी तिमाही में अर्थव्यवस्था ने कितना अच्छा या ख़राब प्रदर्शन किया है. अगर जीडीपी डेटा सुस्ती को दिखाता है, तो इसका मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था सुस्त हो रही है और देश ने इससे पिछले साल के मुक़ाबले पर्याप्त सामान का उत्पादन नहीं किया और सेवा क्षेत्र में भी गिरावट रही.
भारत में सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफ़िस (सीएसओ) साल में चार दफ़ा जीडीपी का आकलन करता है. यानी हर तिमाही में जीडीपी का आकलन किया जाता है. हर साल यह सालाना जीडीपी ग्रोथ के आँकड़े जारी करता है.
माना जाता है कि भारत जैसे कम और मध्यम आमदनी वाले देश के लिए साल दर साल अधिक जीडीपी ग्रोथ हासिल करना ज़रूरी है ताकि देश की बढ़ती आबादी की ज़रूरतों को पूरा किया जा सके.
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