वहीद-उर-रहमान पर्रा: एनआईए ने पीडीपी के किस नेता को गिरफ़्तार किया

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए
जम्मू-कश्मीर पीडीपी के युवा शाखा के अध्यक्ष 32 वर्षीय वहीद-उर-रहमान पर्रा को बुधवार को दिल्ली में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चरमपंथ से संबंधित एक मामले में गिरफ़्तार कर लिया.
पर्रा की गिरफ़्तारी से पहले उन्हें एनआईए के दिल्ली स्थित मुख्यालय में बुलाया गया था और उनसे दो दिनों तक पूछताछ की गई थी.
पार्टी के अनुसार, पर्रा ने ज़िला विकास काउंसिल (डीडीसी) के लिए नामांकन पत्र दाख़िल किया था और उनके अपने गृह ज़िले पुलवामा से डीडीसी चुनाव लड़ने की संभावना थी.
एनआईए ने कहा है कि पर्रा को कश्मीर में चरमपंथ से संबंधित एक मामले में हिरासत में लिया गया है.
पर्रा राजनीति में कब शामिल हुए
2013 के आख़िर में पर्रा आधिकारिक रूप से पीडीपी में शामिल हुए थे और उन्हें पार्टी की युवा शाखा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था.
2015 में मुफ़्ती मोहम्मद सईद के मुख्यमंत्री बनने के बाद पर्रा को उनका राजनीतिक विश्लेषक नियुक्त किया गया था.
पर्रा के एक क़रीबी रिश्तेदार अपना नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि पर्रा के दादा अब्दुल रहमान पुलवामा ज़िले के प्रसिद्ध स्थानीय कांग्रेसी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता थे और मुफ़्ती मोहम्मद सईद के क़रीबी थे.

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वो बताते हैं, "दादा की मौत के बाद पर्रा राजनीतिक गतिविधियों में रुचि लेने लगे."
पर्रा की शिक्षा
पुलवामा के गुड शेफ़र्ड मिशन स्कूल में पर्रा की स्कूली शिक्षा हुई. इसके बाद उन्होंने अवंतीपोरा की इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से उच्च शिक्षा हासिल की और पीस एंड कॉन्फ़्लिक्ट स्टडीज़ में मास्टर्स किया.
उन्होंने अमेरिका की प्रसिद्ध बोस्टन यूनिवर्सिटी से खोजी पत्रकारिता की भी पढ़ाई की.
अमेरिका के वेर्मोन्ट के स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेनिंग ने पर्रा को पीस स्कॉलरशिप भी दी थी.
पर्रा की पारिवारिक पृष्ठभूमि
एक रिश्तेदार के अनुसार, पर्रा की मां का देहांत तब हो गया था जब पर्रा की आयु सिर्फ़ 10 साल थी.
पर्रा के पिता एक किसान हैं जो पुलवामा में अपने सेब के बाग़ की देखभाल करते हैं.

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पर्रा 1988 में पुलवामा ज़िले के नैरा गांव में पैदा हुए थे. वह अभी अविवाहित हैं.
पार्टी के लोगों का कहना है कि पर्रा ने 2014 के संसदीय और विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी जिसके बाद पार्टी ने जीत दर्ज की थी.
पीडीपी के एक नेता ने कहा, "वो सिर्फ़ अपने गृह ज़िले पुलवामा तक सीमित नहीं थे बल्कि उस समय कश्मीर में पार्टी की जीत के लिए बहुत मेहनत से काम किया."
महबूबा मुफ़्ती के क़रीबी
उनको पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती का क़रीबी बताया जाता है. पीडीपी के एक नेता कहते हैं, "उन्होंने गुपकर घोषणापत्र के लिए भी काम किया और इन राजनीतिक पार्टियों का गठबंधन बनाने में भी उनकी ख़ास दिलचस्पी थी. महबूबा पार्टी के फ़ैसलों के लिए भी वहीद से विचार-विमर्श करती थीं."
पिछले महीने बीजेपी और जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों ने आधिकारिक तौर पर गुपकर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे.
पीपल्स अलायंस फ़ॉर गुपकर डिक्लेरेशन (पीएजीडी) अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करने के लिए इन राजनीतिक दलों की एक मुहिम है.
पिछले साल जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद सैकड़ों राजनेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया था जिसमें पर्रा भी शामिल थे.
छह महीने बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था लेकिन उन्हें घर पर नज़रबंद कर दिया गया था.
पर्रा और क्या-क्या करते रहे हैं
पर्रा कश्मीर के अख़बारों में लेख लिखते रहे हैं, उनके लेख शांति और राजनीति के इर्द-गिर्द रहते हैं.
जम्मू-कश्मीर की बहुत सी युवाओं से जुड़ी गतिविधियों में वो शामिल रहे हैं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बारे में बोलते हैं.
कश्मीर के स्थानीय मीडिया ने बताया था कि कुछ साल पहले वो सार्क देशों के उभरते नेताओं के कार्यक्रम में नेपाल में शामिल हुए थे.
2016 में उन्हें जम्मू-कश्मीर स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल का सचिव नियुक्त किया गया था.
पीडीपी से जुड़े एक शख़्स बताते हैं कि 2010 में जब कश्मीर में तीन महीने तक हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे और उनमें सौ से अधिक युवा मारे गए थे, उस दौरान पर्रा ने हिंसक प्रदर्शनों को शांत करने में सरकार की मदद की थी.
पीडीपी ने गिरफ़्तारी को राजनीति से प्रेरित बताया
बुधवार को पर्रा की गिरफ़्तारी के बाद पीडीपी ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है, "पीडीपी के वहीद पर्रा पुलवामा में अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र से आगामी डीडीसी चुनाव लड़ने वाले थे. चुनावों के लिए नामांकन दाख़िल करने के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया जिससे साफ़ दिखता है कि यह केंद्रीय एजेंसी की चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप की कोशिश है ताकि नई दिल्ली के साथियों के लिए इसे प्रभावित किया जा सके."
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बयान में आगे है, "सिर्फ़ कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे देश में बीजेपी के कार्यकाल के दौरान असहमतियों को आपराधिक रूप दिया जा रहा है. मुख्यधारा की राजनीति को ख़त्म करने के बाद अब कश्मीरियों को जेल और घरों में क़ैद किया जा रहा है. इसके ज़रिए बीजेपी सरकार मुख्यधारा के राजनेताओं को धमकियां देकर और ख़तरों को दिखाकर अपनी बात मनवाना चाहती है."
पर्रा की गिरफ़्तारी के बाद महबूबा मुफ़्ती ने मीडिया से कहा कि यह कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि सरकार गुपकर गठबंधन और डीडीसी चुनाव लड़ने के फ़ैसले से डरी हुई है.
उन्होंने कहा, "उन्होंने जो आरोप लगाए हैं उसमें अगर ज़रा से भी सच है तो उसे उन्हें साबित करने दीजिए."
कई मीडिया हाउस ने पर्रा के हवाले से कहा है कि एनआईए ने उनसे उनके राजनीतिक करियर के बारे में और पीडीपी की सॉफ़्ट पॉलिटिक्स के बारे में सवाल किए हैं.
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