मेवालाल चौधरी: नीतीश ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद क्यों बनाया था मंत्री?

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- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
"मैंने नीतीश कुमार को कहा है कि जब तक मैं ख़ुद को पाक-साफ़ साबित नहीं कर देता, तब तक मैं आपकी छवि पर कोई आंच नहीं आने दूंगा."
ये शब्द मेवालाल चौधरी के हैं. उन्होंने गुरुवार की सुबह बिहार की नई एनडीए सरकार में बतौर शिक्षा मंत्री का पदभार ग्रहण किया और दोपहर होते-होते पद से इस्तीफ़ा भी दे दिया.
मेवालाल चौधरी पर भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय का कुलपति रहते हुए सहायक प्रोफ़ेसर और जूनियर इंजीनियर के पदों पर नियुक्ति में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे थे. इन्हीं आरोपों के आधार पर साल 2017 में मेवालाल चौधरी को जेडीयू से निलंबित भी किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया.
दिलचस्प है कि उस वक़्त भारतीय जनता पार्टी और ख़ासकर पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने विपक्ष में रहते हुए चौधरी को गिरफ़्तार करने की माँग की थी. तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने चौधरी के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दायर करने की मंज़ूरी दी थी. मेवालाल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर तो दर्ज हो गई थी लेकिन जाँच आगे नहीं बढ़ सकी और मेवालाल के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल नहीं हुई.

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क्यों बनाया गया मंत्री?
अब उन्हें शपथ लेने के कुछ दिनों के भीतर ही अपना पद छोड़ना पड़ा है.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि सब कुछ जानते हुए भी नीतीश कुमार ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल क्यों किया?
कुलपति रहते हुए भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप झेल रहे मेवालाल चौधरी पर सवाल उसी दिन से उठने शुरू हो गए थे, जब उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली थी.
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बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मेवालाल को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर कहा था 'क्या मरणासन्न शिक्षा व्यवस्था का गला घोंटने और नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली करने के लिए लोकलाज को किनारे कर उन्हें मंत्री बनाया गया है?'
जदयू के प्रवक्ता अजय आलोक इसके जवाब में कहते हैं, "मेवालाल चौधरी पर अभी तक चार्जशीट भी नहीं हुई है. हाई कोर्ट ने उन्हें अग्रिम ज़मानत भी इसी आधार पर दी थी क्योंकि उनके ऊपर लगे आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई नहीं दिखती."
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अजय आलोक आगे कहते हैं, "क्या किसी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हो जाने भर से वह दोषी हो जाता है? ऐसे में तो तेजस्वी यादव को और राहुल गांधी को सबसे पहले राजनीति छोड़ देनी चाहिए क्योंकि उनके ख़िलाफ़ लगे आरोपों पर चार्जशीट भी दायर हो चुकी है."
बिहार की राजनीति को जाति के आधार पर समझने वाले लोगों का मानना है कि मेवालाल चौधरी को मंत्री बनाने की बड़ी वजह उनकी जाति रही है. चौधरी कुशवाहा जाति से ताल्लुक़ रखते हैं. नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में मेवालाल को जगह देने की एक वजह ये भी मानी गई कि सरकार राज्य के 4.5 फ़ीसद कोयरी यानी कुशवाहा जाति के वोटरों को साधना चाहती है.

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मेवालाल चौधरी पर सबसे पहले सवाल उठाने वाली पार्टी, भारतीय जनता पार्टी है जो मौजूदा समय में तो सरकार में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में शामिल है, मगर साल 2017 में जब मेवालाल के ऊपर आरोप लगे थे और भ्रष्टाचार के मामलों में उनके ठिकानों पर छापेमारी चल रही थी, तब सुशील मोदी ने आधा दर्जन से अधिक प्रेस कॉन्फ्रेंस मेवालाल की गिरफ़्तारी के लिए की थी.
क्या बीजेपी की वजह से मेवालाल को मंत्री पद इस्तीफ़ा देना पड़ा?
क्या नीतीश कुमार पर विपक्ष के हमले से ज़्यादा दबाव बीजेपी का था? और एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या मेवालाल चौधरी को मंत्री पद की ज़िम्मेदारी देने से पहले जदयू-भाजपा की इस मसले पर बात नहीं हुई थी?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरुप्रकाश इन सवालों के जवाब में कहते हैं, "मेवालाल चौधरी का इस्तीफ़ा उनका और उनकी पार्टी का फ़ैसला था. इसमें भाजपा का किसी तरह का दबाव नहीं था. यह बात ख़ुद मेवालाल भी कह चुके हैं कि उन्होंने इस्तीफ़ा क्यों दिया, तो फिर इससे ज़्यादा बोलने की कोई ज़रूरत ही नहीं रह जाती."

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गुरुप्रकाश ने हालांकि इस सवाल का जवाब टाल दिया जब हमने उनसे पूछा कि उनको मंत्री पद देने का फ़ैसला क्या भाजपा से पूछकर लिया गया था?
वो कहते हैं, "हमारी पार्टी से इस सवाल का जवाब तो वही दे सकते हैं जो फ़ैसले का हिस्सा थे. हालांकि, पार्टी की तरफ़ से मैं इतना ज़रूर कह सकता हूं कि सरकार के हर फ़ैसले में हमारी भागीदारी है. क्योंकि हम बड़ी पार्टी हैं."
नीतीश का क़दम
यह बात सच है कि मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर विपक्ष ने सरकार को अच्छी तरह घेरा. लेकिन इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी मेवालाल चौधरी के इंटरव्यू काफ़ी वायरल रहे जो उन्होंने मंत्री बनने के बाद मीडिया को दिए.
वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं, "ऐसा नहीं था कि मेवालाल के बारे में पहली बार सबको पता चला है. वे दाग़ी हैं और उन पर सवाल उठेंगे ये बात सरकार को भी मालूम थी, लेकिन फिर भी उन्होंने इसकी परवाह न करते हुए उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया. दरअसल सरकार को लगता था कि जो थोड़े-बहुत सवाल उठेंगे उनको मैनेज कर लिया जाएगा. लेकिन ऐसा हुआ कि यह सवाल जनता का हो गया. और इसी कारण मेवालाल को इस्तीफ़ा देना पड़ा."
मणिकांत ठाकुर यह तो मानते हैं कि मेवालाल के इस्तीफ़े में बीजेपी की भूमिका अहम है, मगर साथ ही यह भी कहते हैं, "मेवालाल के कारण सबसे अधिक नुक़सान नीतीश कुमार की छवि का हो रहा था. उन्होंने इस बार नया मंत्रालय बनाने की कोशिश की मगर पहली ही कोशिश सवालों के घेरे में आ गई. देखा जाए तो यह नीतीश कुमार की परंपरा रही है, चाहे वह इसके पहले जीतनराम मांझी का इस्तीफ़ा हो या पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा का इस्तीफ़ा."

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आख़िर में सवाल ये उठता है कि मेवालाल चौधरी के ख़िलाफ़ अभी तक चार्जशीट क्यों नहीं हुई, जबकि उनके ख़िलाफ़ मामला इतना बड़ा बनाया गया था कि मुक़दमा दायर करने के लिए राज्यपाल से मंज़ूरी लेनी पड़ी थी.
जदयू के प्रवक्ता अजय आलोक कहते हैं, "यह सवाल अदालत का है. वहीं इसका जवाब दिया जाएगा. लेकिन जिस मामले में हाई कोर्ट को प्रथम दृष्टया कोई सबूत ही नहीं मिला था उस मामले में चार्जशीट की बात करना भी बेमानी है."
मेवालाल चौधरी पर सवाल उनकी पत्नी की मौत के मामले में भी उठते रहे हैं. शिक्षा मंत्री बनने के साथ ही ये सवाल फिर से चर्चा में है. बिहार के पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी पोस्ट की है जिसमें लिखा है, "मुझे सूचना है कि मेवालाल चौधरी की पत्नी की मौत के पीछे एक गहरा राजनीतिक षड्यंत्र है. संभवतः मौत के तार नियुक्ति घोटाले से भी जुड़े हैं."
मेवालाल चौधरी की पत्नी नीता चौधरी की मौत 27 मई 2019 को अपने घर पर जलकर हो गई थी. इसके बाद मेवालाल चौधरी ने पूर्व आईपीएस अमिताभ दास की टिप्पणी पर कहा था, "उनको हम लीगल नोटिस भेज रहे हैं. अगर उनकी पत्नी को लेकर कोई ऐसी भावनात्मक टिप्पणी करता तो उन्हें कैसा महसूस होता?"
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