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'मेरी शिक्षा एक बोझ है. मैं पढ़ाई के बिना ज़िंदा नहीं रह सकती' - टॉपर ऐश्वर्या के आख़िरी शब्द
- Author, बाला सतीश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
वो सिविल सेवा में जाना चाहती थीं, कॉलेज की पढ़ाई पूरी करना चाहती थीं, ऑनलाइन क्लास लेना चाहती थीं... लेकिन, उनके पास कोचिंग के लिए पैसे नहीं थे, एक साल बाद हॉस्टल से निकल जाने की चिंता सता रही थी और ऑनलाइन क्लास के लिए लैपटॉप खरीदने को वो जूझ रही थीं...
ये थी ऐश्वर्या रेड्डी की पढ़ने की चाहत और उस पर बंधी तंगहाली की बेड़ियां. वो बेड़ियां जिसने एक होनहार छात्रा को अपनी जान लेने पर मज़बूर कर दिया. कभी शहर की टॉपर रही ये लड़की आर्थिक मजबूरियों से लड़ते-लड़ते हार गई.
कभी शहर में टॉप करने वालीं ऐश्वर्या ने तंगहाली से लड़ते-लड़ते आख़िर में दो नवंबर को आत्महत्या कर ली. उनके आख़िरी शब्द थे 'मैं अपने घर में कई ख़र्चों की वजह हूं. मैं उन पर बोझ बन गई हूं. मेरी शिक्षा एक बोझ है. मैं पढ़ाई के बिना ज़िंदा नहीं रह सकती.'
ऐश्वर्या की पढ़ाई के लिए जद्दोजहद की कहानी कुछ चंद महीनों की नहीं बल्कि एक लंबे समय का संघर्ष है.
हैदराबाद से 50 किमी. दूर स्थित शादनगर में ऐश्वर्या रेड्डी का घर है. जब हम उनके घर पहुंचे तो एक दो कमरों के घर के बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा था. पत्रकार ऐश्वर्या की मां से बात करना चाहते थे.
परिवार को सांत्वना देने के लिए राजनीतिक दलों के नेताओं का घर पर आना-जाना लगा था.
ऐश्वर्या के पिता गांता श्रीनिवास रेड्डी एक मेकेनिक हैं और उनकी मां सुमति घर पर सिलाई का काम करती हैं.
ऐश्वर्या बचपन से ही मेधावी छात्रा थीं रही. उन्हें बारहवीं पूरी करने के लिए मुफ़्त शिक्षा मिली थी. उन्होंने बारहवीं में 98 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करके पूरे शहर में टॉप किया था.
दिल्ली में रहने और पढ़ने का खर्च
बारहवीं में उनके नंबर देखकर परिवार के एक परिचित ने नई दिल्ली में लेडी श्रीराम कॉलेज में दाखिला लेने का सुझाव दिया.
उन्होंने ऐश्वर्या को दाख़िला लेने में मदद करने का वादा किया. ऐश्वर्या सिविल सेवा में जाना चाहती थीं.
ऐश्वर्या को बीएससी ऑनर्स मैथमैटिक्स कोर्स में लेडी श्री राम कॉलेज में दाख़िला मिल गया. लेकिन, कॉलेज का ये नियम है कि कोर्स के पहले के साल के बाद हॉस्टल की सुविधा वापस ले ली जाती है. ऐश्वर्या को इस बात की जानकारी थी और एक साल के बाद की चिंता उन्हें हमेशा सताती थी.
वह ग्रेजुएशन के बाद सिविल सेवा की तैयारी करना चाहती थीं लेकिन कोचिंग के लिए पैसे इकट्ठा करना भी उनके लिए चुनौती बन गया था.
ऐश्वर्या के माता-पिता उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए दिन-रात कोशिशों में लगे थे. उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए घर का जेवर भी गिरवी रख दिया लेकिन फिर भी कुछ ना हो सका.
गिरवी रखा जेवर
ऐश्वर्या की मां सुमति रुंधी आवाज़ में कहती हैं, ''मैंने उसके दिल्ली जाने के लिए घर का जेवर बेचकर 80 हज़ार रुपयों का इंतज़ाम किया था. ऐश्वर्या को आगे होने वाले खर्चों की चिंता रहती थी. मैंने उसे कहा था कि अगर ज़रूरत हुई तो हम सोना बेच देंगे और उसके लिए लैपटॉप खरीदने की भी कोशिश करेंगे.'
''हमने उसे यहां तक कहा था कि ज़रूरत पड़ने पर उसकी पढ़ाई के लिए हम अपना घर भी बेच सकते हैं. हमने उसे अपने सिविल सेवा के लक्ष्य पर ध्यान देने के लिए कहा था. मेरी बेटी पढ़ने में बहुत तेज़ थी. वो सिविल सेवा में नहीं भी जा पाती तो ऊंची रैंक की नौकरी ज़रूर पा लेती.'
''लेकिन, ऐश्वर्या हमसे घर और सोना बेचने के लिए हमेशा मना करती थी. मैं उसे कहती थी कि जब वो अधिकारी बन जाएगी तो हम ऐसे 10 घर खरीद सकते हैं.
''वह ऑनलाइन क्लासेज़ शुरू होने के बाद से लैपटॉप मांग रही थी और उसने बताया था कि 70 हज़ार का लैपटॉप ठीक रहेगा. मैंने उसे भरोसा दिलाया था कि हम उसे लैपटॉप दिला देंगे.''
हालांकि, परिवार की स्थिति ऐसी थी कि उन्हें अपनी दूसरी बेटी को निजी स्कूल से निकालकर सरकारी स्कूल में डालने का फैसला लेना पड़ा. पर वो ऐसा भी नहीं कर पाए. उन्हें स्कूल से ट्रांसफ़र सर्टिफिकेट लेने के लिए 7000 रुपयों की ज़रूरती थी. इतने पैसे ना होने के कारण उन्हें बेटी का स्कूल ही छुड़ाना पड़ गया.
क्यों की आत्महत्या
अपनी ग्रैजुएशन की पढ़ाई के अलावा ऐश्वर्या फ्रेंच भाषा भी सीख रही थीं. वो लॉकडाउन के कारण अपने घर लौट आई थीं.
घर पर वो फ्रेंच सीखने के दौरान रात में फ्रेंच फ़िल्में देखा करतीं और सुबह देर तक उठती थीं. ऐश्वर्या का परिवार उन्हें घर के कामों से दूर रखता था और सिर्फ़ पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहता था.
वो रोज़ाना फोन पर ऑनलाइन क्लास, फ्रेंच क्लास लेतीं और दोस्तों से बात करतीं. वो ज़्यादातर अपने कमरे में ही रहती थीं और वहीं खाना खाती थीं. ऐश्वर्या को फोन पर ऑनलाइन क्लास लेने में दिक्कत होती थी इसलिए वो एक लैपटॉप खरीदना चाहती थीं.
इसी बीच ऐश्वर्या की वारंगल में एक दोस्त से मुलाक़ात हुई और उन्हें एजुकेशन लोन (शिक्षा ऋण) के बारे में पता चला. वह एक नवंबर को दोस्त से मिलने गई थीं.
दोस्त से मिलकर वापस आने पर ऐश्वर्या ने अपनी मां को एजुकेशन लोन के बारे में बताया.
सुमति बताती हैं, ''वो वापस लौटने के बाद बहुत खुश लग रही थी. उसने घर आकर डांस भी किया. उसने मुझे बताया कि उसकी दोस्त की मां ने उसे एजुकेशन लोन के बारे में बताया है और उसकी मदद करने की बात भी कही है.''
ऐश्वर्या अपने परिवार का दो लाख का कर्ज़ भी चुकाना चाहती थीं जो उनकी पढ़ाई के लिए लिया गया था. बाकी पैसों से वो अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती थीं.
वो आख़िरी लड़ाई
हालांकि, उस दौरान ऐश्वर्या और उनकी मां के बीच कॉलेज एडमिशन के लिए दिल्ली जाने, वहां रहने और एडमिशन फीस में हुए खर्च को लेकर बहस हो गई. दोनों के बीच बहुत ज़्यादा बहस छिड़ गई.
बाद में, ऐश्वर्या अपने कमरे में चली गई और दरवाज़ा बंद कर लिया. उसने रोज़ की तरह फ़िल्म देखी और खाना खाने से मना कर दिया.
वो सुबह उठीं लेकिन दूसरे दिन भी खाना खाने से इनकार कर दिया.
ऐश्वर्या के पिता ने बाहर से खाने मंगाने के लिए भी कहा लेकिन उसने मना कर दिया.
हालांकि, ऐश्वर्या ने अपने पिता को उनकी डाइट के बारे में बताया क्योंकि उन्हें पीलिया हुआ था. उन्होंने अपने पिता को खाना भी खिलाया.
बाद में ऐश्वर्या अपने कमरे में चली गईं. उनके कमरे से काफ़ी देर तक कोई आवाज़ नहीं आई. उनकी बहन ने पायदान लेने के लिए जब कमरे में देखा तो ऐश्वर्या ने कमरे के पंखे से खुद को फांसी लगाई हुई थी.
सुमति रोते हुए कहती हैं, ''हमने उसे ज़मीन पर लिटाया और ऑटो लाने के लिए दौड़े. हम उसे जगाने की कोशिश कर रहे थे. हम सोच रहे थे कि काश ये सब झूठ हो.''
ऐश्वर्या का सुसाइड नोट
ऐश्वर्या ने अपने पीछे एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है. उन्होंने लिखा है-
''मेरी मौत के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं है. मेरे कारण परिवार को बहुत खर्च उठाना पड़ रहा है. मैं उन पर बोझ बन गई हूं. मेरी पढ़ाई उन पर बोझ बन गई है. मैं इस बारे में लंबे समय से सोच रही हूं. मुझे लगता है कि मौत ही मेरी इस समस्या का एकमात्र हल है. लोग मेरी मौत के लिए कई कारण बता सकते हैं. हालांकि, मेरा कोई बुरा इरादा नहीं है. कृप्या देखें कि मुझे एक साल के लिए इंस्पायर स्कॉलरशिप मिल जाए. कृप्या मुझे माफ कर दें. मैं अच्छी बेटी नहीं हूं.''
ऐश्वर्या ने इस सुसाइड नोट के आख़िर में अंग्रेज़ी में अपने हस्ताक्षर किए हैं.
ऐसी कई संस्थाएं और लोग हैं जो होनहार और आर्थिक रूप से कमज़ोर स्टूडेंट्स की मदद करते हैं लेकिन ऐश्वर्या का परिवार उन तक नहीं पहुंच सका.
सुमति ने बीबीसी को बताया, ''हम किसी को नहीं जानते. हम नहीं जानते कि किससे मदद मांगनी चाहिए. कुछ लोगों ने हमें सलाह दी कि वो व्हाट्सऐप के ज़रिए मदद ले सकते हैं. लेकिन, हमने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया क्योंकि हमें डर था कि व्हाट्सऐप पर हमारी बेटी की फोटो सब तक पहुंच जाएगी और इससे हमारी बेइज्जती होगी. मैंने उन्हें रोक दिया.''
ऐश्वर्या ने मदद के लिए मुख्यमंत्री केसी रामाराव के बेटे और आईटी मंत्री केटी रामाराव को ट्वीट किया था और एक्टर सोनू सूद से भी लैपटॉप के लिए मदद मांगी थी.
आंसुओं के साथ अपनी बेटी को याद करते हुए सुमति कहती हैं, ''मैंने ही उस पर ज़ोर डाला था कि वो वारंगल से घर आ जाए और स्कॉलरशिप के लिए बैंक अकाउंट खोल ले. काश मैं उसे ना बुलाती और वो ज़िंदा होती.''
''हमने उसे हमेशा भरोसा दिलाया था कि पढ़ाई के लिए डरने की ज़रूरत नहीं है. एक दिन पहले हुए झगड़े से वो बहुत दुखी हो गई थी.''
अब कई ग़ैर-लाभकारी संगठनों, और सामाजिक कल्याण छात्र संघों, आर्थिक रूप से कमजोर उच्च जाति संघों ने परिवार को समर्थन देने का आश्वासन दिया है. वर्तमान में, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) मामले को देख रहा है.
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