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हज के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानिए इस बार क्या हैं नए नियम- प्रेस रिव्यू
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 2021 की हज यत्रा कोविड-19 महामारी के मद्देनज़र सऊदी अरब सरकार के दिशा निर्देश से ही होगी.
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार इन नए दिशानिर्देशों के तहत हाजियों की उम्र को लेकर पाबंदी लगाई जा सकती है.
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने बताया है कि अगले साल होने वाली हज यात्रा के लिए शनिवार से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हुए है. रजिस्ट्रेशन इस 10 दिसंबर तक करवाए जा सकते हैं.
अख़बार लिखता है कि कोरोना महामारी के कारण इस साल हज यात्रा आयोजित नहीं की गई थी.
अख़बार के अनुसार मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा, "जो लोग हज जाने की इच्छा रखते हैं वो इसके लिए ऑनलाइन आवेदन दे सकते हैं. कोरोना महामारी के कारण सभी आवेदकों के लिए कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट (आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट) जमा करना बाध्यकारी कर दिया गया है. कोरोना टेस्ट की तारीख़ सऊदी अरब के लिए फ्लाइट लेने से 72 घंटे पहले की होनी चाहिए."
साल 2020 के नियमों की तरह महिलाएं बिना किसी पुरुष परिजन के साथ हज के लिए जा सकती हैं.
अख़बार के अनुसार मंत्रालय ने कहा है कि हज के लिए इस बार 21 की बजाय 10 जगहों से उड़ानें चलाई जाएंगी. ये जगहें हैं - अहमदाबाद, बेंगलुरु, कोचीन, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और श्रीनगर.
अल्पसंख्यक मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, नागरिक विमानन मंत्रालय और भारत की हज कमिटी ने सऊदी अरब में मौजूद भारतीय दूतावास और जेद्दा में मौजूद भारतीय काउंसल जनरल से चर्चा करने के बाद ये नए दिशानिर्देश बनाए हैं.
भारत के बिना शुरू किए चाबहार प्रोजेक्ट पर ईरान को चाहिए मदद
भारत अब ईरान के चाबहार-ज़ाहेदान का हिस्सा नहीं है, लेकिन ईरान चाहता है कि चाबहार बंदरगाह से अफ़ग़ानिस्तान की सीमा तक रेल लाइन चलाने में भारत उसकी मदद करे. ईरान ने हाल में 628 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का दूसरा चरण शुरू किया है.
दि हिंदू में वरिष्ठ पत्रकर सुहासिनी हैदर को दिए ईरानी राजनयिक मसूद रेज़वानियन का एक साक्षात्कार प्रकाशित किया गया है. मसूद रेज़वानियन ईराक के डिप्टी चीफ़ ऑफ़ मिशन हैं.
इसके अनुसार ईरान के पोर्ट एंड मेरीटाइम ऑर्गेनाइज़ेशन ने भारत से गुज़ारिश की है कि वो उन्हें क्रेन, ट्रैक, स्विच और सिग्नलिंग के सामान के साथ-साथ रेल के डिब्बे दें. ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसे ये सब खरीदने में मुश्किल पेश आ रही है.
रिपोर्ट में लिखा है कि ईरान ने कहा है कि साल 2018 में ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी के भारत दौरे के दौरान भारत ने जिस 15 करोड़ डॉलर के क्रेडिट लाइन की पेशकश की थी भारत उसे एक्टिवेट करे.
मसूद रेज़वानियन का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि "भारत की पेशकश भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग के रास्ते खोलेगी."
अख़बार लिखता है कि हाल में ईरान ने तीन चरण वाली इस परियोजना के दूसरे चरण को हरी झंडी दी है. जब जुलाई में इसके पहले चरण को हरी झंडी दी गई थी, तब भारत का नाम इस परियोजना से हटा दिया गया था.
ईरान इस रेल लाइन को साल 2021 के मध्य तक पूरा करना चाहता है. ये रेल लाइन चाबहार बंदरगाह को तुर्कमेनिस्तान और केंद्रीय एशिया से होते हुए अफ़ग़ान सीमा से जोड़ेगी.
गुपकर गठबंधन का फ़ैसला, मिल कर लड़ेंगे जिला स्तरीय चुनाव
गुपकर घोषणापत्र के हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा है कि आने वाले डिस्ट्रिक्ट डेवेलपमेंट काउंसिल चुनावों में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी (पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे.
अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद पहली बार यहां डीडीसी के चुनाव करवाए जा रहे हैं. ये चुनाव 28 नवंबर से होंगे और आठ चरणों में संपन्न कराए जाएंगे.
हर डीडीसी में 14 टेरिटोरियल निर्वाचन क्षेत्र से चुने हुए प्रतिनिधि होंगे. इन क्षेत्रों के सीमांकन का काम फिलहाल जारी है.
अख़बार लिखता है कि उम्मीद की जा रही है कि मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के डीडीसी चुनाव लड़ने के फ़ैसले से 15 महीनों बाद प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक हलचल शुरू होगी.
गठबंधन के प्रवक्ता सज्जाद गनी लोन के हवाले से अख़बार लिखता है कि समय की कमी के बावजूद, आम सहमति से गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ने का फ़ैसला लिया है. उनका कहना है कि गणतंत्र में जनता का प्रतिनिधि चुनने के लिए कराए जाने वाले चुनाव का स्थान बेहद पवित्र होता है जिसे ख़त्म होने नहीं दिया जा सकता.
इसी साल जम्मू कश्मीर के मुख्यधारा के सात दल जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद एक साथ आए थे और 'गुपकर घोषणापत्र' पर हस्ताक्षर कर कहा था कि वो जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को बरक़रार रखने के लिए लड़ेंगे.
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