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अर्नब गोस्वामी और दो अन्य को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया
रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ़ अर्नब गोस्वामी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
अर्नब के अलावा दो अन्य को 2018 में ख़ुदकुशी के लिए उकसाने के एक मामले में देर रात मुंबई की एक अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा.
अर्नब गोस्वामी के वकील अबाद पोंडा ने कहा कि उन्होंने ज़मानत की अर्जी लगाई है, जिस पर गुरुवार को सुनवाई हो सकती है.
2018 में इंटिरियर डिज़ाइनर अन्वय नाइक और उनकी माँ कुमुद नाइक की मौत के मामले में बुधवार सुबह अर्नब गोस्वामी को मुंबई स्थित उनके आवास से गिरफ़्तार किया गया था.
53 साल के इंटिरियर डिज़ाइनर ने अपने ख़ुदकुशी नोट में आरोप लगाया था कि वो और उनकी माँ ने इसलिए जीवन ख़त्म करने का फ़ैसला लिया क्योंकि अर्नब के साथ फ़िरोज़ शेख और नीतेश सारदा ने 5.40 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया था. फ़िरोज़ और नीतेश अलग-अलग फ़र्म के मालिक थे.
डिज़ाइनर और उनकी माँ मई 2018 में अलीबाग़ तालुका के कवीर गाँव में अपने फार्महाउस पर मृत मिले थे.
2019 में रायगढ़ पुलिस ने इस मामले को बंद कर दिया था. बाद में नाइक की बेटी अदन्या की शिकायत पर महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने फिर से इस केस की जाँच का आदेश दिया था.
गोस्वामी को मुंबई के पास रायगढ़ ज़िले के अलीबाग लाया गया और बाद में उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया.
गोस्वामी ने अदालत में कहा कि पुलिसकर्मियों ने उनसे मारपीट की है. इसके बाद गोस्वामी को पुलिस स्टेशन लाया गया जहां एक सिविल सर्जन ने उनसे मारपीट को साबित करने के लिए कहा. बाद में अदालत ने गोस्वामी के मारपीट के आरोप को खारिज कर दिया.
बुधवार को पुलिस ने उस अधिकारी को भी गिरफ़्तार कर लिया जिसने ख़ुदकुशी के लिए उकसाने के मामले की जाँच की थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उस अधिकारी को भी जाँच का सामना करना पड़ेगा. अर्नब गोस्वामी के साथ उनकी पत्नी और दो अन्य के ख़िलाफ़ मुंबई पुलिस ने गिरफ़्तारी में अड़चन डालने के मामले में एफ़आईआर दर्ज की है.
अर्नब की गिरफ़्तारी को लेकर विपक्ष ने महाराष्ट्र की सरकार पर हमला बोला है जबकि इंटिरियर डिज़ाइनर के परिवार ने गिरफ़्तारी के फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा है कि वो साल 2018 को कभी नहीं भूल सकते.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अर्नब गोस्वामी की गिरफ़्तारी की निंदा की है और इस मामले में कांग्रेस और उसके सहयोगियों को घेरा है.
अमित शाह ने अपने ट्वीट में कहा है, "कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर लोकतंत्र को शर्मसार किया है. रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ राज्य की सत्ता का खुला दुरुपयोग व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है. ये हमें आपातकाल की याद दिलाता है. स्वतंत्र प्रेस पर इस हमले का विरोध होना ही चाहिए और इसका विरोध होगा."
वहीं केंद्रीय क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भी अर्नब की गिरफ्तारी की आलोचना की है और इसे चिंताजनक बताया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस के सहयोग से बनी सरकार "खुले तौर पर अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले कर रही है" और पार्टी के नेता खामोश हैं.
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा है कि अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई का महाराष्ट्र सरकार से कोई संबंध नहीं है.
उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र की सरकार कभी भी बदले की भावना से कार्रवाई नहीं करती. महाराष्ट्र में क़ानून का राज है. यहां किसी तरह की अराजकता नहीं है. पुलिस प्रोफेशनल है. उनके पास अगर कोई जांच का मामला है और अगर उनके हाथ कोई सबूत लगा होगा तो पुलिस किसी पर भी कार्रवाई कर सकती है."
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