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चिन्मयानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली छात्रा बयान से पलटी - प्रेस रिव्यू
अख़बार अमर उजाला में छपी ख़बर के मुताबिक़ पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के ख़िलाफ़ यौन शोषण का आरोप लगाने वाली क़ानून की छात्रा अपने बयान से पलट गई है.
सरकारी वकील के अनुसार बीते नौ अक्तूबर को कोर्ट में इस मामले की गवाही में छात्रा ने जान-बूझकर अपना बयान बदल दिया है. वकील का कहना है कि छात्रा ने अभियुक्त के साथ समझौता कर लिया है.
सरकारी वकील ने शिकायतकर्ता छात्रा को होस्टाइल क़रार देते हुए उनके ख़िलाफ़ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत कार्रवाई करने की अपील की है.
विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने अभियोजन पक्ष की इस अर्ज़ी को दर्ज करने के साथ ही इसकी प्रति शिकायतकर्ता व अभियुक्त को देने के आदेश दिए हैं. इसमें कहा गया है कि वह अभियोजन पक्ष की अर्ज़ी पर अपना जवाब दाख़िल करें.
मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी.
क्या है पूरा मामला
27 अगस्त 2019 को छात्रा के पिता ने थाना कोतवाली, शाहजहांपुर में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पुत्री एसएस कॉलेज से लॉ कर रही है और कॉलेज के हॉस्टल में रहती थी. मगर 23 अगस्त से उसका मोबाइल बंद है.
उन्होंने बताया कि उन्होंने बेटी का फेसबुक वीडियो देखा जिसमें स्वामी चिन्मयानंद समेत कुछ अन्य लोग उसका और अन्य लड़कियों का शारीरिक शोषण और दुष्कर्म करने के बाद जान से मारने की धमकी दे रहे थे.
पिता का कहना था कि उनकी लड़की को ग़ायब कर दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एक विशेष जाँच टीम (एसआईटी) इस मामले की जाँच कर रही थी और पिछले साल सितंबर में चिन्मयानंद को गिरफ़्तार किया था. लेकिन फ़रवरी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिन्मयानंद को ज़मानत दे दी थी.
एसआईटी ने लड़की के ख़िलाफ़ जबरन उगाही का मामला दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था. दिसंबर में लड़की को ज़मानत मिल गई थी. अब लड़की ने अपने बयान को वापस ले लिया है.
अर्णब गोस्वामी को मुंबई पुलिस का नोटिस
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के मालिक और एडिटर इन चीफ़ अर्णब गोस्वामी को एक कारण बताओ नोटिस भेजकर पूछा है कि उनके ख़िलाफ़ सीआरपीसी की धारा 108 के तहत क्यों ना कार्रवाई की जाए.
वर्ली क्षेत्र के एसीपी सुधीर जम्बावेडकर ने अर्णब को 16 अक्टूबर को पुलिस के सामने हाज़िर होने के लिए नोटिस भेजा है.
अख़बार के अनुसार पुलिस ने नोटिस में कहा है कि रिपब्लिक टीवी ने पालघर में साधुओं की हत्या और लॉकडाउन के दौरान बांद्रा में प्रवासी मज़दूरों के जमावड़े की ख़बर को अपने चैनल पर आपत्तिजनक तरीक़े से दिखाया था.
पुलिस ने कहा है कि रिपब्लिक टीवी ने इस मामले को सांप्रदायिक रंग देकर हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश की थी.
मुंबई में अर्णब के ख़िलाफ़ दो एफ़आईआर दर्ज हैं और दोनों मामलों में उन पर अपने टीवी कवरेज के ज़रिए दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने के आरोप हैं.
16 अक्टूबर को अर्णब को पुलिस के सामने पेश होकर अपना जवाब देना होगा और अगर पुलिस अधिकारी उनके जवाब से संतुष्ट नहीं होगा तो पुलिस अफ़सर को इस बात का अधिकार है कि वो अर्णब के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे.
इसके तहत अर्णब को एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने होंगे जिनमें लिखा होगा कि एक साल तक उनका आचरण अच्छा रहेगा.
अगर अर्णब इस बॉण्ड का उल्लंघन करते हैं तो उनपर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकेगा.
अर्णब को एक ऐसे आदमी को पेश करना होगा जो उनकी गारंटी लेगा कि बॉण्ड की मियाद तक अर्णब उसका उल्लंघन नहीं करेंगे.
20 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच चलेंगी 392 त्योहार स्पेशल ट्रेन
हिंदी अख़बार जनसत्ता के अनुसार रेलवे ने मंगलवार को घोषणा की है कि आने वाले त्योहारों को देखते हुए 20 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच 392 स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी. इन ट्रेनों पर विशेष ट्रेनों वाला किराया लागू होगा. इसका मतलब है कि इन स्पेशल ट्रेनों का किराया मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में 10 से 30 प्रतिशत ज़्यादा होगा.
रेलवे ने कहा है कि दुर्गापूजा, दशहरा, दीपावली और छठ पूजा के समय मुसाफ़िरों की माँग को पूरा करने के लिए कोलकाता, वाराणसी, पटना, लखनऊ समेत अन्य जगहों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी.
मंगलवार को रेलवे बोर्ड की तरफ़ से जारी आदेश में कहा गया है कि ये त्योहार स्पेशल ट्रेनें 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलेंगी. कोरोना महामारी के कारण भारतीय रेलवे ने अपनी नियमित सेवा को स्थगित कर दिया है और माँग और ज़रूरत के हिसाब से ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है.
एमजे अकबर मानहानि केस: अदालत ने कहा मेरे अधिकार क्षेत्र के बाहर
अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर और प्रिया रमानी मामले में अदालत ने दो साल के बाद कहा है कि वो इस मामले में सुनवाई नहीं कर सकती है क्योंकि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है.
पत्रकार प्रिया रमानी ने एमजे अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था जिसके बाद अकबर ने रमानी के ख़िलाफ़ मानहानि का केस कर दिया था. दोनों पक्षों ने अपनी अंतिम बहस पूरी कर ली है और यह केस अब आख़िरी स्टेज में है.
19 सितंबर को पिछली सुनवाई के दौरान अकबर की वकील गीता लूथरा ने रमानी के वकील के अंतिम बहस का जवाब देने के लिए अदालत की इजाज़त माँगी. अदालत ने उन्हें दो दिनों का समय दे दिया था.
मंगलवार को जब लुथरा ने अपनी बात शुरू की तो अतिरिक्त चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विशाल पाहूजा ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट से निर्देश हैं. इस केस को अगले निर्देश के लिए ज़िला और सत्र जज के पास पेश करना होगा. यह अदालत सांसद या एमएलए के ख़िलाफ़ किए गए केस की सुनवाई करेगी."
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ज़िला और सत्र न्यायाधीश के सामने 14 अक्टूबर को यह केस रखा जाएगा.
इस पर प्रिया रमानी की वकील रेबेका जॉन ने कहा कि अगर यह केस नए कोर्ट में ट्रांसफ़र होता है तो हमें अंतिम बहस को फिर से शुरू करना होगा.
अकबर की वकील गीता लूथरा ने कहा, "हमें इसे ख़त्म करना होगा और बचाव पक्ष का जवाब देना होगा. हमें ज़िला जज के फ़ैसले का इंतज़ार करना होगा."
दिल्ली की राउज़ एवेन्यू डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एक विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई हो रही थी. हाईकोर्ट ने फ़रवरी 2018 में एमपी या एमएलए के ख़िलाफ़ मामलों के लिए विशेष कोर्ट के गठन का आदेश दिया था.
हाईकोर्ट ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले के बाद दिया था जिसमें सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि एमपी और एमएलए के ख़िलाफ़ मुक़दमे की सुनवाई के लिए हर राज्य में स्पेशल कोर्ट का गठन किया जाए.
लेकिन अब अदालत ने दो साल तक चली सुनवाई के बाद कहा है कि यह मामला एमपी या एमएलए के ख़िलाफ़ नहीं है, बल्कि केस करने वाले ख़ुद एमपी हैं.
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