हाथरस मामले में अदालत ने पूछा, अगर वो लड़की आपके परिवार की होती तो...- प्रेस रिव्यू

हाथरस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को जमकर फटकार लगाई है.

अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने पर छपी ख़बर के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाथरस मामले में कथित गैंगरेप की शिकार युवती के जबरन रात में किए गए अंतिम संस्कार पर उत्तर प्रदेश सरकार की निंदा की.

सोमवार को जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस राजन रॉय की बेंच ने मृतक लड़की के पाँच घरवालों और यूपी के वरिष्ठ अधिकारियों के बयान दर्ज किए.

पीड़ित परिवार की वकील सीमा कुशवाहा के अनुसार सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों से पूछा, "अगर लड़की आपके परिवार की होती तो भी क्या आप इसी तरह करते?"

हाथरस के ज़िलाधिकारी प्रवीण कुमार ने अदालत को बताया कि रात के ढाई बजे अंतिम संस्कार करने का फ़ैसला उनका था और क़ानून-व्यवस्था के बिगड़ने की आशंका के तहत उन्होंने ऐसा किया था. ज़िलाधिकारी ने यह भी कहा कि ऐसा करने के लिए उन पर राज्य सरकार का कोई दबाव नहीं था.

सुनवाई के दौरान मीडिया को आने की इजाज़त नहीं थी इसलिए स्वतंत्र रूप से इस बात की पुष्टि करना मुश्किल है कि अदालत ने सचमुच में क्या कहा था. वकील सीमा कुशवाहा के अनुसार, परिवार ने माँग की है कि इस मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश के बाहर की जाए. अदालत ने दो नवंबर को अगली सुनवाई की तारीख़ दी है.

हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और मृतक लड़की के परिजनों को अदालत में पेश होने को कहा था.

एलटीसी नक़द वाउचर और फ़ेस्टिवल एडवांस

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार, बदहाल अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार माँग और खपत बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को सरकार के ज़रिए उठाए गए क़दमों की जानकारी दी.

उनके अनुसार एलटीसी यानी लीव ट्रैवल कन्सेशन के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को नक़द वाउचर दिए जाएंगे और त्योहार के पहले नक़द एडवांस दिया जाएगा. एलटीसी नक़द वाउचर स्कीम के तहत केंद्रीय कर्मचारी छुट्टियों के बदले उस अवधि के पैसे ले सकेंगे. इसके अलावा वे टिकट के मूल्य की तीन गुणी रक़म का कोई सामान ख़रीद सकेंगे, जिस पर कम से कम 12 प्रतिशत का जीएसटी लगता हो.

सरकार का तर्क है कि कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा दिया गया था और उस दौरान यात्रा करना संभव नहीं था, इसीलिए सरकार ने ये पैसे कर्मचारियों को देने का फ़ैसला किया है. यह स्कीम 31 मार्च 2021 तक रहेगी.

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि त्योहार के मौक़े पर कर्मचारियों को विशेष एडवांस दिया जा सकता है. पहले इस तरह का एडवांस दिया जाता था, लेकिन सातवें वेतन आयोग में इसे बंद कर दिया गया था.

इस स्कीम के तहत सरकार हर केंद्रीय कर्मचारी को बग़ैर ब्याज़ 10 हज़ार रुपए तक का एडवांस दे सकती है. इसे 10 आसान क़िस्तों में चुकाना होगा.

सरकार को उम्मीद है कि इन फ़ैसलों से मार्च के आख़िर तक एक लाख करोड़ ख़र्च हो सकेगा.

63 दिनों में कोरोना के सबसे कम मामले

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार भारत में पिछले दो महीनों में सोमवार को सबसे कम कोरोना के मामले सामने आए हैं.

अख़बार के अनुसार, भारत में सोमवार को कोरोना के 53082 नए मामले सामने आए जो कि पिछले 63 दिनों में सबसे थे. इससे पहले 10 अगस्त को 51296 नए मामले सामने आए थे. एक दिन में कोरोना से मरने वालों की संख्या में भी कमी आई है.

अख़बार के अनुसार, सोमवार को कोरोना से 696 लोगों की मौत हुई जोकि 27 जुलाई के बाद से एक दिन में मरने वालों की सबसे कम तादाद है. इससे पहले 27 जुलाई को कोरोना से 638 लोगों की मौत हुई थी.

ज़्यादातर राज्यों में कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी देखी जा रही है लेकिन कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल में हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं.

कर्नाटक में सोमवार को 7606 नए मामले सामने आए जोकि महाराष्ट्र से भी ज़्यादा हैं जहां एक दिन में 7089 लोग संक्रमित हुए. ऐसा महीनों बाद हुआ है जब किसी राज्य में एक दिन में महाराष्ट्र से ज़्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हुए.

भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 71 लाख पार कर गई है जबकि कोरोना से अब तक एक लाख 10 हज़ार से ज़्यादा लोग मर चुके हैं.

टीआरपी 'घोटाला': प्रमुख अभियुक्त उत्तर प्रदेश से गिरफ़्तार

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार, मुंबई क्राइम ब्रांच ने टीआरपी 'घोटाले' के मामले में उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर से एक 'प्रमुख अभियुक्त' विनय त्रिपाठी को गिरफ़्तार किया है.

पुलिस के अनुसार त्रिपाठी हंसा कंपनी के पूर्व अधिकारी हैं और पुलिस का दावा है कि उन्होंने कथित टीआरपी घोटाले में अहम भूमिका निभाई है.

हंसा कंपनी ही BARC के लिए टेलीविज़न चैनलों की टीआरपी का आकलन करती है.

इसी टीआरपी के आधार पर चैनलों पर विज्ञापन के रेट तय होते हैं.

मुंबई पुलिस के अनुसार त्रिपाठी ने ही विशाल भंडारी को पैसे दिए थे. इस मामले में पुलिस ने सबसे पहले विशाल भंडारी को गिरफ़्तार किया था.

मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कुछ दिनों पहले प्रेस वार्ता कर इस बात का दावा किया था कि मुंबई में कुछ समाचार चैनल अपनी टीआरपी को बढ़ाने के लिए लोगों को पैसे देते हैं.

कमिश्नर ने रिपब्लिक टीवी और दो मराठी चैनलों का नाम लेकर कहा था कि इस कथित घोटाले में वो लोग शामिल हैं. पुलिस ने चार लोगों को गिरफ़्तार भी किया था. मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के सीएफ़ओ से पूछताछ भी की है.

हालांकि रिपब्लिक टीवी ने मुंबई पुलिस के इन आरोपों को ख़ारिज किया है.

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