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हाथरस: मृतक युवती के परिवार का अस्थियाँ विसर्जित करने से इनकार-प्रेस रिव्यू
हाथरस मामले में मृतक युवती के परिजनों ने उनकी अस्थियाँ विसर्जित करने से इनकार कर दिया है.
परिवार का कहना है कि वो अस्थियाँ विसर्जित नहीं करेंगे. अस्थियों को विसर्जित करने से इनकार करते हुए परिवार के लोगों ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि जो शव जलाया गया वो उन्हीं की बेटी का था या किसी और का.
परिवार ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने बिना चेहरा दिखाए ही शव को जला दिया, ऐसे में वो अस्थियाँ विसर्जित नहीं जा सकते.
नवभारत टाइम्स ने इस ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.
दिल्ली से करीब 160 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के हाथरस के चंदपा थानाक्षेत्र के गांव में 14 सितंबर को एक दलित युवती के साथ कथित तौर पर ठाकुर जाति के चार लोगों ने बलात्कार किया था.
बाद में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में युवती ने दम तोड़ दिया और पुलिस आधी रात को ही आनन-फानन में उसका अंतिम-संस्कार किया, जिस पर जमकर विवाद हो रहा है.
परिवार का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस ने उनकी सहमति के बिना मृतक लड़की का अंतिम संस्कार कर दिया. उन्हें उनकी बेटी की मेडिकल रिपोर्ट भी नहीं दी गई है.
परिवार का आरोप है कि लड़की के साथ गैंगरेप किया गया, जबकि उत्तर प्रदेश के एडीजी ने बताया कि पीड़िता के शरीर से सीमन (वीर्य) के सबूत नहीं मिले हैं इसलिए रेप की पुष्टि नहीं हो सकी है.
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब मामले की सीबीआई जाँच कराने की घोषणा की है.
दो करोड़ तक के कर्ज़ पर मिली बड़ी छूट
केंद्र सरकार ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि कोविड-19 महामारी के दौरान घोषित किये गए किस्त स्थगन के तहत दो करोड़ रुपये तक के कर्ज़ के लिए ब्याज़ पर छह महीने के लिए कोई ब्याज़ नहीं लिया जाएगा.
द हिंदू ने इस ख़बर को प्रकाशित किया है.
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि किस्त स्थगन की अवधि के दौरान ब्याज़ पर ब्याज़ के संबंध में ख़ास श्रेणियों में सभी कर्ज़दारों को राहत मिलेगी, चाहे उन्होंने किस्त स्थगन का लाभ उठाया हो या नहीं.
सरकारी हलफ़नामे के मुताबिक़, छह महीने के लोन मोरेटोरियम समय में दो करोड़ रुपये तक के लोन के ब्याज़ पर ब्याज़ की छूट देगी.
केंद्र ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी की स्थिति में, ब्याज़ की छूट का भार वहन सरकार करे यही केवल समाधान है. इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कहा है कि उपयुक्त अनुदान के लिए संसद से अनुमति माँगी जाएगी.
छह महीने में आ सकती है ऑक्सफ़र्ड की कोविड वैक्सीन
ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी की ओर से विकसित की जा रही कोविड-19 की वैक्सीन अगले छह महीने में इस्तेमाल के लिए तैयार होगी.
ब्रिटेन की मीडिया के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स ने यह ख़बर प्रकाशित की है.
कोरोना संक्रमण का मुकाबला करने के लिए तैयार की गई इस वैक्सीन को साल के अंत तक स्वास्थ्य नियामकों से हरी झंडी मिल सकती है और इसके बाद छह महीने के भीतर टीकाकरण भी शुरू किया जा सकता है.
दवा कंपनी एस्ट्राज़ेनेका के साथ मिलकर ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी की ओर से विकसित की जा रही यह वैक्सीन लोगों पर ट्रायल के लिहाज़ से सबसे आगे है.
वैक्सीन के निर्माण और वितरण में शामिल ब्रिटेन सरकार के सूत्रों के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि वैक्सीन को मंज़ूरी मिलने के बाद छह महीने के भीतर ही वयस्कों का टीकाकरण शुरू किया जा सकता है.
इस बात की भी उम्मीद जताई जा रही है कि हो सकता है इसके तैयार होने में छह महीने से भी कम समय लगे.
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