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भारत-पाकिस्तान सार्क की बैठक में क्यों झगड़ पड़े
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की गुरुवार को हुई 19वीं बैठक में भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर और आतंकवाद के मसले पर बहस छिड़ गई.
दोनों देशों में से किसी ने साफतौर पर एक-दूसरे का नाम नहीं लिया लेकिन फिर भी अप्रत्यक्ष तौर पर अपनी बात कह गए.
सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की ये वार्षिक अनौपचारिक बैठक वर्चुअली हुई थी. इसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अप्रत्यक्ष तौर पर पाकिस्तान पर निशाना साधा.
बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सार्क के सभी सदस्य देशों से कहा, ''वे सामूहिक रूप से आतंकवाद के संकट को और आंतक व टकराव को पोषित करने, सहायता देने और बढ़ावा देने वाली ताकतों को हराने के लिए प्रतिबद्धता जताएं. ये दक्षिण एशिया में सामूहिक सहयोग और समृद्धि के सार्क के उद्देश्य में रुकावट पैदा करता है.''
हालांकि, इस दौरान एस जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया.
वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने सार्क के मंच से लंबे समय से चलते आ रहे विवादों के समाधान पर एक विस्तृत बयान दिया. हालांकि, उन्होंने इसमें साफतौर पर जम्मू-कश्मीर का नाम नहीं लिया लेकिन परोक्ष तौर पर उनका संदर्भ जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने को लेकर था.
शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा, ''हमें विवादित क्षेत्रों में एकपक्षीय/अवैध तरीके से यथास्थिति बदलने की कोशिशों की निंदा और विरोध ज़रूर करना चाहिए, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करती हैं.''
क़ुरैशी ने इस दौरान लंबे समय से चले रहे विवादों के कारण लोगों के मानवाधिकारों के व्यवस्थित उल्लंघन का ज़िक्र भी किया.
नेपाल ने की अध्यक्षता
इस बैठक की अध्यक्षता नेपाल कर रहा था. इसमें सार्क के सभी सदस्य देशों अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के विदेश मंत्री शामिल थे.
हालांकि, सभी सार्क देशों ने इस बैठक में कोरोना वायरस से लड़ने में सहयोग देने को लेकर प्रतिबद्धता जताई. एस. जयशंकर ने कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ उठाए गए भारत के कदमों का भी ज़िक्र किया.
सार्क दक्षिण एशिया के सात देशों का संगठन है. आठ दिसंबर 1985 को बने इस संगठन का उद्देश्य दक्षिण एशिया में आपसी सहयोग से शांति और प्रगति हासिल करना है.
सीआईसीए में भी विवाद
इस तरह का बयान गुरुवार को हुई कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरैक्शन ऐंड कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग मेज़र्स इन एशिया (सीआईसीए) की मंत्रीस्तरीय बैठक में भी जारी किया गया.
27 देशों की इस बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठाया. जिसका भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत जवाब दिया.
भारत ने कहा, ''हम पाकिस्तान को सलाह देते हैं कि वो भारत के ख़िलाफ़ आंतकवाद को अपनी स्पॉन्सरशिप और समर्थन देना बंद करे. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और रहेंगे. पाकिस्तान को भारत के घरेलू मुद्दों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है. पाकिस्तान का बयान भारत के आंतरिक मुद्दों, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता में दखल है जो सीआईसीए के सदस्यों के बीच 1999 में संबंध मार्गदर्शक सिद्धांतों पर की गई सीआईसीए घोषणा का उल्लंघन है.''
जब बैठक छोड़कर कर गए भारत-पाक
भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी अंतरराष्ट्रीय बैठकों में विवाद होता रहा है.
पिछले हफ़्ते भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल शंघाई सहयोग संगठन की वर्चुअल बैठक को तब छोड़कर चले गए थे जब पाकिस्तान ने भारत के दावे वाले इलाक़ों को अपने नक़्शे में दिखाया था.
पिछले साल सार्क की बैठक में एस. जयशंकर और शाह महमूद क़ुरैशी ने दोनों के भाषणों का बहिष्कार किया था.
सार्क की 19वीं बैठक पहले साल 2016 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली थी लेकिन उरी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था. कई और देशों ने भी इसमें भारत का साथ दिया था.
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