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कृषि सुधार बिल पारित होने के बाद उप सभापति हरिवंश पर सत्ता विपक्ष आमने सामने
विपक्ष के जोरदार हंगामें के बीच कृषि सुधार से संबंधित दो बिल राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गए. नाराज़ विपक्षी दल बिल के पारित होने के बाद राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव ले आए. उपसभापति पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बिल पर चर्चा के दौरान उनके रवैये ने लोकतांत्रिक परंपराओं और प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचाया है.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने कहा, "राज्यसभा के उप सभापति को लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय, उनके रवैये ने आज लोकतांत्रिक परंपराओं और प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचाया है."
शाम 7.30 बजे केंद्र सरकार की तरफ़ से छह मंत्रियों ने इसे लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रेल एवं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी, केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद्र गहलोत मौजूद थे.
राजनाथ सिंह ने कहा, "राज्यसभा में जो हुआ वो दुखद था, दुर्भाग्यपूर्ण और अत्यधिक शर्मनाक था. डिप्टी चेयरमैन के साथ दुर्वव्यहार हुआ है. हरिवंश जी की मूल्यों के प्रति विश्वास रखने वाली छवि है. सीधे आसन तक जाना रूल बुक को फाड़ना, अन्य कागजात फाड़ना, आसन पर चढ़ना. संसदीय इतिहास में ऐसी घटना न लोकसभा में हुई न राज्यसभा में."
उन्होंने कहा कि उपसभापति से साथ आचरण की जितनी भर्त्सना की जाए कम है, उनकी छवि पर आंच आई है, संसदीय गरिमा को ठेस पहुंची है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने जो नोटिस दिया है उस पर फ़ैसला सभापति ही करेंगे.
इसके बाद उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि भ्रामक तथ्यों के आधार पर कुछ विपक्षी दल दुष्प्रचार करने के कोशिश कर रहे हैं कि एमएसपी को सरकार ख़त्म करने जा रही है.
विपक्ष का आरोप है कि वोटों के डिविजन की बात नहीं मानी गई. इससे जुड़े एक सवाल पर प्रेस कांफ़्रेंस में मौजूद केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा, "जिस समय उपसभापति ने अलग अलग एमेंडमेंट पर डिविज़न के लिए कहा, उस समय वो सारे लोग वेल में थे, वहां हंगामा ही नहीं कर रहे थे, एक तरह से माइक तोड़ डाले थे, माइक हाथ में लेकर एक तरह से वायलेंट अप्रोच था उनका."
उन्होंने कहा, "बार बार उपसभापति ने कहा कि आप अगर डिविज़न चाहते हैं, तो आपको अपनी सीट पर जाना ही चाहिए, लेकिन कोई नहीं गया. वो तो राज्यसभा के स्टाफ़ की मेज़ पर थे, एक दूसरे के कंधों पर चढ़कर नारेबाज़ी कर रहे थे."
इसके बाद कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बिल को किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि यह 73 वर्षों में हमारे लोकतंत्र का सबसे काला दिन है.
वहीं केसी वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्र सरकार राजनीतिक दलों, किसानों और संसद को नहीं सुन रही है.
उन्होंने कहा, "जयराम रमेश ने अनुरोध किया कि मंत्री कल उत्तर दे सकते हैं लेकिन उपसभापति ने नहीं माना. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और राजनाथ सिंह ने उपसभापति के काम की निंदा करने की बजाय उनके कार्यों के सही ठहराया है."
बिल पर चर्चा के दौरान सदन में हंगामा
दोपहर में जब बिल पर चर्चा हो रही थी उस दौरान राज्यसभा में बहुत हंगामा हुआ था और सदन को थोड़ी देर के लिए स्थगित करना पड़ा था.
दरअसल सदन की कार्यवाही 1 बजे तक ही होनी थी जिसे उपसभापति ने विधेयक पारित होने तक के लिए बढ़ा दिया. इसी पर विपक्ष के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया.
टीएमसी नेता डेरिक ओ ब्रायन ने उपसभापति के सामने जाकर रूल बुक दिखाने की कोशिश की थी.
नेता प्रतिपक्ष ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "नियमों के मुताबिक सदन का समय आम राय पर ही बढ़ाया जा सकता है न कि सत्ता पक्ष की संख्या के आधार पर."
विधेयकों के पारित होने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, "कांग्रेस ने कभी किसानों को न्याय दिलाने का काम नहीं किया. आज जब राज्यसभा में इस पर चर्चा हो रही थी और कांग्रेस को ये लगा कि यह बहुमत से पारित हो जाएगा तो वो गुंडागर्दी पर उतर आए. कांग्रेस ने सिद्ध कर दिया है कि उन्हें प्रजातंत्र में भरोसा नहीं है. डिप्टी चेयरमैन पर जिस प्रकार से अटैक करने की कोशिश की उसकी जितनी भी निन्दा की जाए वो कम है."
पीएम मोदी ने बिल पारित होने पर क्या कहा?
इसी हंगामे के बीच कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 और कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) क़ीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर क़रार विधेयक, 2020 पारित किए गए.
इन विधेयकों के पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया और यह बताया कि एमएसपी व्यवस्था जारी रहेगी.
उन्होंने लिखा, "हमारे कृषि क्षेत्र को आधुनिकतम तकनीक की तत्काल ज़रूरत है, क्योंकि इससे मेहनतकश किसानों को मदद मिलेगी. अब इन बिलों के पास होने से हमारे किसानों की पहुंच भविष्य की टेक्नोलॉजी तक आसान होगी. इससे न केवल उपज बढ़ेगी, बल्कि बेहतर परिणाम सामने आएंगे. यह एक स्वागत योग्य कदम है."
विपक्ष का जोरदार विरोध- एमएसपी की गांरटी कौन देगा?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दोनों विधेयकों का विरोध करते हुए ट्वीट किया, "मोदी जी किसानों को पूंजीपतियों का ग़ुलाम बना रहे हैं जिसे देश कभी सफल नहीं होने देगा."
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला कहा कि ये विधेयक देश के सबसे अंधकारमय क़ानून माने जाएंगे.
उन्होंने कहा, "मोदी सरकार ने देश के किसान और उनकी रोजी-रोटी पर आक्रमण किया है. ये देश के सबसे अंधकारमय क़ानून माने जाएंगे. किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलेगा कैसे? साढ़े 15 करोड़ किसानों को एमएसपी देगा कौन? अगर बड़ी कंपनियों ने एमएसपी पर फ़सल नहीं ख़रीदी तो उसकी गारंटी कौन देगा? आपने एमएसपी की अनिवार्यता को क़ानून के अंदर क्यों नहीं लिख दिया?"
वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी ट्विटर के जरिए इसका विरोध करते हुए लिखा, "कृषि मंत्री कहते हैं कि सरकार सुनिश्चित करेगी की किसानों को एमएसपी दी जाएगी. बाज़ार के साथ व्यापार अभी भी हो रहा है. किसानों को मिलने वाला पैसा एमएसपी से बहुत कम होता है. अगर कृषि मंत्री कोई जादू कर एमएसपी सुनिश्चित करवा सकते हैं, तो अभी तक उन्होंने ये किया क्यों नहीं?"
उन्होंने लिखा, "मंत्री जी को ये कैसे पता चलेगा कि किसान ने किस व्यापारी को उपज बेची है. हर दिन देशभर में होने वाले लाख़ों ट्रांसैक्शन के बारे में उन्हें कैसे पता चलेगा? अगर उनके पास डेटा नहीं है तो वो कैसे सुनिश्चित करेंगे कि एमएसपी हर ट्रांजैक्शन में मिला है. क्या मंत्रीजी और सरकार ये सोचती है कि किसान बेवकूफ़ हैं और उनके बेबुनियाद वादों पर भरोसा करेंगें?"
टीएमसी नेता डेरिक ओ ब्रायन ने आरोप लगाया है कि सदन के नियमों का उल्लंघन किया गया है. ट्वीटर पर एक वीडियो पोस्ट कर उन्होंने कहा, "सदस्यों ने वोट की डिमांड की लेकिन इजाज़त नहीं दी गई, ये पहले कभी नहीं हुआ."
"विपक्ष बिल पर वोट चाहता था, लेकिन बीजेपी वोट नहीं चाहती थी."
उन्होंने राज्यसभा टीवी को भी सेंसर करने का आरोप लगाया.
बिचौलियों के चंगुल से किसानों की मुक्तिः बीजेपी अध्यक्ष
वहीं बीजेपी अध्यक्ष ने इन विधेयकों के पारित होने पर कहा, "संसद द्वारा पारित उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण), कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक सही मायनों में किसानों को अपने फ़सल के भंडारण, और बिक्री की आज़ादी देंगे और बिचौलियों के चंगुल से उन्हें मुक्त करेंगे."
उन्होंने कहा, "अब किसान अपनी मर्जी का मालिक होगा. किसानों को उपज बेचने का विकल्प देकर उन्हें सशक्त बनाया गया है. बिक्री लाभदायक मूल्यों पर करने से संबंधित चयन की सुविधा का भी लाभ किसान ले सकेंगे. इससे जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान किसान के घर पर ही उपलब्ध होगा."
इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर किसानों के लिए कभी रिफॉर्म नहीं करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने किसानों के सशक्तिकरण के लिए कभी कोई रिफॉर्म्स नहीं किया. उसके पास न इसके लिए सोच थी, न ही इच्छाशक्ति. किसानों और ग़रीबों को गुमराह कर राजनीति करने की कांग्रेस की पुरानी आदत रही है. कांग्रेस के दोहरे चरित्र से किसान वाकिफ हैं, वे अब उसके बहकावे में आने वाले नहीं हैं."
क्या है इन दो विधेयकों में?
कृषि विधेयकों को लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. किसान इनका विरोध कर रहे हैं, विपक्ष सरकार पर निशाना साध रही है, लेकिन सरकार इन्हें किसानों के हित वाला बता रही है.
क्या है ये कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020.
इस बिल में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रावधान है जहां किसानों और व्यापारियों को मंडी से बाहर फ़सल बेचने की आज़ादी होगी.
प्रावधानों में राज्य के अंदर और दो राज्यों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही गई है. मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टेशन पर ख़र्च कम करने की बात कही गई हैं.
कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) क़ीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर क़रार विधेयक, 2020
इस विधेयक में कृषि क़रारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रावधान किया गया है. ये बिल कृषि उत्पादों की बिक्री, फ़ार्म सेवाओं,कृषि बिज़नेस फ़र्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जुड़ने के लिए सशक्त करता है.
अनुबंधित किसानों को गुणवत्ता वाले बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करना, तकनीकी सहायता और फ़सल स्वास्थ्य की निगरानी, ऋण की सुविधा और फ़सल बीमा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी
क्यों हो रहा है विरोध?
किसान संगठनों का आरोप है कि नए क़ानून के लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूँजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुक़सान किसानों को होगा.
पंजाब में होने वाले गेहूँ और चावल का सबसे बड़ा हिस्सा या तो पैदा ही एफ़सीआई द्वारा किया जाता है, या फिर एफ़सीआई उसे ख़रीदता है. साल 2019-2020 के दौरान रबी के मार्केटिंग सीज़न में, केंद्र द्वारा ख़रीदे गए क़रीब 341 लाख मिट्रिक टन गेहूँ में से 130 लाख मिट्रिक टन गेहूँ की आपूर्ति पंजाब ने की थी.
प्रदर्शनकारियों को यह डर है कि एफ़सीआई अब राज्य की मंडियों से ख़रीद नहीं कर पाएगा, जिससे एजेंटों और आढ़तियों को क़रीब 2.5% के कमीशन का घाटा होगा. साथ ही राज्य भी अपना छह प्रतिशत कमीशन खो देगा, जो वो एजेंसी की ख़रीद पर लगाता आया है.
कृषि मामलों के जानकार देवेंद्र शर्मा ने शुक्रवार को बीबीसी से बात करते हुए कहा था कि किसानों की चिंता जायज़ है. उन्होंने कहा, "किसानों को अगर बाज़ार में अच्छा दाम मिल ही रहा होता तो वो बाहर क्यों जाते."
देवेंद्र के मुताबिक इसका सबसे बड़ा नुक़सान आने वाले समय में ये होगा कि धीरे-धीरे मंडियां ख़त्म होने लगेंगी.
प्रदर्शनकारियों मानते हैं कि अध्यादेश जो किसानों को अपनी उपज खुले बाज़ार में बेचने की अनुमति देता है, वो क़रीब 20 लाख किसानों- ख़ासकर जाटों के लिए तो एक झटका है ही.
साथ ही मुख्य तौर पर शहरी कमीशन एजेंटों जिनकी संख्या तीस हज़ार बताई जाती है, उनके लिए और क़रीब तीन लाख मंडी मज़दूरों के साथ-साथ क़रीब 30 लाख भूमिहीन खेत मज़दूरों के लिए भी यह बड़ा झटका साबित होगा.
हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफ़ा
विधेयक को लेकर गुरुवार को, बिल से लोकसभा में पास होने के बाद हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफ़ा देकर अपनी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के कड़े रुख़ का संकेत दिया था.
केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट किया, "मैंने केंद्रीय मंत्री पद से किसान विरोधी अध्यादेशों और बिल के ख़िलाफ़ इस्तीफ़ा दे दिया है. किसानों की बेटी और बहन के रूप में उनके साथ खड़े होने पर गर्व है."
अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का कहना है कि उनकी पार्टी से इन अध्यादेशों को लेकर संपर्क नहीं किया गया, जबकि हरसिमरत कौर ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि 'पंजाब और हरियाणा के किसान इससे ख़ुश नहीं हैं.'
सरकार का क्या है तर्क?
मोदी ने इसे "आज़ादी के बाद किसानों को किसानी में एक नई आज़ादी" देने वाला विधेयक बताया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सरकार की स्थिति स्पष्ठ करते हुए कहा कि राजनीतिक पार्टियां विधेयक को लेकर दुष्प्रचार कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि किसानों को एमएसपी का फ़ायदा नहीं मिलने की बात ग़लत है.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बिहार की कई परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "जो लोग दशकों तक देश में शासन करते रहें हैं, सत्ता में रहे हैं, देश पर राज किया है, वो लोग किसानों को भ्रमित कर रहे हैं, किसानों से झूठ बोल रह हैं."
मोदी ने कहा कि विधेयक में वही चीज़ें हैं जो देश में दशकों पर राज करने वालों ने अपने घोषणापत्र में लिखी थी. मोदी ने कहा कि यहां "विरोध करने के लिए विरोध" हो रहा है.
उन्होंने कहा बिचौलिए जो किसानों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा खा जाते थे, उनसे बचने के लिए ये विधेयक लाना ज़रूरी था.
इसके पहले ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था, "किसानों के पास मंडी में जाकर लाइसेंसी व्यापारियों को ही अपनी उपज बेचने की विवशता क्यों,अब किसान अपनी मर्जी का मालिक होगा."
" करार अधिनियम से कृषक सशक्त होगा व समान स्तर पर एमएनसी,बड़े व्यापारी आदि से करार कर सकेगा तथा सरकार उसके हितों को संरक्षित करेगी। किसानों को चक्कर नहीं लगाना पड़ेंगे,निश्चित समयावधि में विवाद का निपटारा एवं किसान को भुगतान सुनिश्चित होगा"
उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों के मुताबिक़ किसान अपनी फ़सल किसी भी बाज़ार में अपनी मनचाही क़ीमत पर बेच सकेगा. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के अधिक अवसर मिलेंगे.
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