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उन्नाव रेप मामला: कौन हैं यूपी के वे चार अधिकारी जिन पर सीबीआई ने की कार्रवाई की अनुशंसा
- Author, अंकित शुक्ला
- पदनाम, कानपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप मामले में सीबीआई ने उन्नाव में तैनात रही तीन महिला अफ़सरों समेत चार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए सिफारिश की है.
यह वही मामला है जिसमें बांगरमाऊ के तत्कालीन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को अदालत ने दोषी क़रार देते हुए उम्र क़ैद की सजा सुनाई थी. इस मामले में सेंगर की गिरफ़्तारी से पहले ही बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था.
इन तीन महिला अफ़सरों में उन्नाव की तत्कालीन ज़िलाधिकारी आईएएस अदिति सिंह, तत्कालीन एसपी आईपीएस नेहा पांडेय और आईपीएस पुष्पांजलि माथुर शामिल हैं.
सीबीआई ने अपनी जांच में इन अधिकारियों की लापरवाही पाई और इनके विरुद्ध सरकार से कार्रवाई की सिफ़ारिश की है.
लखनऊ में गृह विभाग तैनात एक सीनियर आईएएस अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है. उत्तर प्रदेश सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने इन सभी अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई किए जाने की सिफ़ारिश की है.
इस मामले के चर्चा में आने के दौरान ये सभी उन्नाव में तैनात थे. सीबीआई की कार्रवाई की सिफ़ारिश के बाद इनमें दो अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाया और जिन दो अधिकारियों से संपर्क हो पाया उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
कौन हैं ये चारों अधिकारी?
1.आईएएस अदिति सिंह
24 जनवरी, 2017 से 26 अक्टूबर, 2017 तक उन्नाव की डीएम रहीं अदिति सिंह मूल रूप से यूपी के बस्ती ज़िले की रहने वाली हैं.
वो 2009 बैच की आईएएस अधिकारी हैं. पॉलिटिकल साइंस से एमफ़िल अदिति सिंह की पहली तैनाती बतौर जॉइंट मजिस्ट्रेट लखनऊ में हुई थी. जहाँ पर वहां सीडीओ भी रहीं.
इसके बाद साल 2013 में पीलीभीत ज़िले और इसके बाद रायबरेली ज़िले की डीएम बनीं. जून 2014 में लखनऊ में बतौर स्पेशल सेकेट्ररी काम किया.
इसके बाद जुलाई 2014 में उन्होंने सुल्तानपुर ज़िले का डीएम बनाया गया. साल 2015 से 2017 वे लखनऊ में तैनात रहीं इसके बाद उन्होंने 24 जनवरी 2017 को उन्नाव का डीएम बनाया गया.
यहाँ से वे गौतमबुद्घ नगर में बतौर एडिश्नल कमिश्नर कामर्शियल टैक्स डिपार्टमेट में तैनात रहीं. अप्रैल 2018 से अदिति हापुड़ ज़िले की डीएम हैं.
2. आईपीएस नेहा पांडेय
नेहा पांडेय 2 फरवरी, 2016 से 26 अक्टूबर, 2017 तक उन्नाव की एसपी रहीं नेहा मूल रूप से अलीगढ़ की रहने वाली हैं.
2009 बैच की आईपीएस अधिकारी नेहा पांडेय ने एमए इन पॉलिटिक्स के साथ ही अमेरिकन स्टडीज़ में एमफ़िल भी किया है. दिसंबर 2017 से नेहा आईबी में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर तैनात हैं.
3. पुष्पांजलि माथुर
पुष्पांजलि माथुर 27 अक्टूबर, 2017 से 30 अप्रैल, 2018 तक उन्नाव की एसपी रहीं. पुष्पांजलि मूल रूप से वाराणसी की रहने वाली हैं और 2006 बैच की आईपीएस अफसर हैं.
उन्नाव से पहले वहां कानपुर नगर में और कानपुर देहात में बतौर एएसपी तैनात रहीं. उनके पति शलभ माथुर भी आईपीएस अफ़सर हैं. बीते सोमवार को ही उनका गोरखपुर से लखनऊ में बतौर डीआईजी रेलवे ट्रांसफ़र हुआ है.
4. एएसपी अष्टभुजा सिंह
अष्टभुजा सिंह मूलरूप से यूपी के अम्बेडकर नगर ज़िले के रहने वाले हैं. बॉटनी विषय से एमएससी करने वाले अष्टभुजा सिंह की बतौर सर्किल अफसर कई ज़िलों में तैनाती रही. उन्नाव में वहां एडिशनल एसपी के पद पर तैनात रहे .
वर्तमान समय में वहां पीएसी के कमांडेंट के पद पर फतेहपुर में तैनात हैं.
कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रक़ैद
जून 2017 में पीड़िता ने उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके साथियों पर रेप का आरोप लगाया. पीड़िता का आरोप था कि नौकरी के लिए वह विधायक के घर गई थी जहाँ उसका रेप किया गया. आरोप लगाने के कुछ दिन बाद ही किशोरी अचानक ग़ायब हो गई.
रिपोर्ट दर्ज कराने के 9 दिन बाद पीड़िता औरेया के एक गांव में मिली. औरेया से लाने के बाद पुलिस ने पीड़िता को कोर्ट में पेश किया और उसके सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए.
4 अप्रैल, 2018 को उन्नाव पुलिस ने लडक़ी के पिता को अवैध असलहा रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. इसके चार दिन बाद पीड़िता ने लखनऊ में सीएम आवास के सामने आत्मदाह करने का प्रयास किया. अगले ही दिन किशोरी के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई.
पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर चोटें लगने की बात सामने आई. इस मामले में छह को पुलिसकर्मियों को र्सस्पेंड करने के साथ मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए. 11 अप्रैल को यूपी सरकार ने इस केस को सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए.
सीबीआई की जांच चल ही रही थी कि 28 जुलाई 2019 को पीड़िता की कार को ट्रक ने टक्कर मार दी गई जिसमें पीड़िता गंभीर रूप से घायल हो गई. उसकी दो महिला रिश्तेदारों की मौत हो गई. जबकि साथ जा रहे वकील भी घायल हुए.
एक अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने इस केस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई दिल्ली की एक कोर्ट में ट्रांसफ़र करने के आदेश दिए. साथ ही 45 दिनों में सुनवाई पूरी करने को कहा जिसके बाद इस केस की रोज़ाना सुनवाई शुरू हुई.
आख़िरकार 16 दिसंबर 2019 को दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को पीड़िता के अपहरण और रेप का दोषी क़रार दिया. 20 दिसंबर, 2019 को कुलदीप सेंगर को उन्नाव रेप कांड में दिल्ली की तीस हज़ारी अदालत ने उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई.
अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था, जिसमें से 10 लाख रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया था.
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