सुशांत सिंह राजपूत पर बिहार बीजेपी से जुड़े स्टिकर्स पर उठ रहे हैं सवाल

सुशांत सिंह राजपूत

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    • Author, नीरज प्रियदर्शी
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए

दिवंगत फ़िल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को लेकर भारतीय जनता पार्टी, बिहार के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ की ओर से एक स्टिकर जारी किया गया है जिसे लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

स्टिकर में मुस्कुराते सुशांत की तस्वीर लगी है, हैशटैग जस्टिस फ़ॉर सुशांत के साथ एक स्लोगन लिखा है, "ना भूले हैं! ना भूलने देंगे."

बिहार बीजेपी के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ ने ऐसे 30 हज़ार स्टिकर्स के अलावा सुशांत के चेहरे की तस्वीर वाले 30 हज़ार फ़ेस मास्क भी पूरे राज्य भर में बांटे हैं.

सुशांत सिंह राजपूत का स्टिकर

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लेकिन, आगामी बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए सोशल मीडिया पर इस स्टिकर को लेकर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं बीजेपी ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत को चुनावी मुद्दा बना दिया है.

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सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने लिखा है, "काश! ये शब्द आर्थिक तंगी और बेरोज़गारी से मरने वालों के लिए भी लिखे होते, ना भूले हैं ना भूलने देंगे."

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14 जून को मुंबई के बांद्रा स्थित अपने फ्लैट में सुशांत सिंह राजपूत मृत पाए गए थे. इस मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है. केस के कुछ अभियुक्तों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है.

चुनाव प्रचार करने का आरोप

बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राजद ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में स्टिकर्स और फ़ेस मास्क के ज़रिए बीजेपी पर पार्टी का चुनावी प्रचार करने का आरोप लगाया है.

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवल किशोर यादव कहते हैं, "सुशांत की मौत तो दुखद है ही लेकिन उससे भी दुखद है उनकी मौत का तमाशा बनाना. बीजेपी चुनाव प्रचार के लिए अब यही कर रही है. जहां तक सुशांत के मौत की जांच का सवाल है तो राजद ही सबसे पहली पार्टी है जिसके नेता तेजस्वी यादव अभिनेता के परिजनों से मिलने गए, संवेदना जताई और उसी समय सीबीआई जांच की मांग भी की थी. अब मामले की जांच सीबीआई कर रही है, धीरे-धीरे सच भी सामने आ रहे हैं. इसलिए अब इस मामले को ज़्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए."

नवल किशोर यादव के मुताबिक़ राष्ट्रीय जनता दल के पास चुनाव लड़ने के लिए इससे ज़रूरी और भी मुद्दे हैं. राज्य में भ्रष्टाचार और अपराध चरम पर है, लॉकडाउन में आए लाखों प्रवासियों के पास काम नहीं है, वे फिर से पलायन के लिए मजबूर हैं.

वरुण कुमार सिंह

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इमेज कैप्शन, वरुण कुमार सिंह

सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर राजनीति करने के आरोप पर कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ, बिहार, बीजेपी के प्रदेश संयोजक वरुण कुमार सिंह कहते हैं, "इसे राजनीति और चुनाव से जोड़ना ग़लत होगा. हमारे संगठन से सारे कलाकार ही जुड़े हैं और यह बतौर कलाकार सुशांत के प्रति हमारी भावनाओं को व्यक्त करने का तरीक़ा है."

स्टिकर्स रिलीज़ करने और फ़ेस मास्क बांटने की टाइमिंग को लेकर वरुण का कहना है, "हमने सुशांत की मौत के दूसरे दिन से ही सीबीआई जांच के लिए आवाज़ उठाई थी. एक अभियान चलाकर पार्टी के शीर्ष नेताओं को इससे जोड़ा, प्रधानमंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखे, और इसी क्रम में कुछ कलाकारों ने सोचा कि वे अलग तरीके से (स्टिकर्स और मास्क के जरिए) अपनी भावनाएं व्यक्त करें. यह सब हमलोग बहुत पहले से कर रहे हैं और हमारा अभियान अभी तक काफ़ी सफल भी रहा है. हमारी गाड़ी पर ऐसे स्टिकर पहले से हैं, लेकिन इत्तेफ़ाकन लोगों की नज़र अब जा रही है."

बीजेपी और जदयू की सफाई

सुशांत के लिए अभियान

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पार्टी के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ के इन स्टिकर्स से बीजेपी कितना इत्तेफ़ाक रखती है?

इसके जवाब में बिहार बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद कहते हैं, "मैंने ख़ुद इसे ट्विटर पर शेयर किया है. हम इसको राजनीति से नहीं जोड़ना चाहते हैं. यह बिहार के कलाकारों का यहां के उभरते सितारे को सम्मान देने का मसला है."

निखिल आगे कहते हैं, "जहां तक बात पार्टी के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ की है तो उसका पार्टी से जुड़ाव ज़रूर है मगर वह एक इंडिपेंडेंट प्लेटफॉर्म है. कलाकारों का संगठन है. कलाकारों की अभिव्यक्ति को राजनीति से प्रेरित बताना उचित नहीं है."

दूसरी ओर सरकार में बीजेपी की सहयोगी दल जदयू का मत है कि सुशांत को न्याय दिलाने के लिए आवाज़ उठा रहे लोगों को राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं है.

जदयू प्रवक्ता और सरकार में आईपीआरडी मंत्री नीरज कुमार कहते हैं, "अगर ढूंढेंगे तो राजनीति हर जगह है. लेकिन सरकार सुशांत को लेकर जो कह रही और कर रही है उसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं है. एक बिहारी दूसरे बिहारी के लिए और एक कलाकार दूसरे कलाकर के लिए आवाज़ उठा रहा है."

ये चुनावी मुद्दा बन पाएगा?

सुशांत का परिवार

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इमेज कैप्शन, सुशांत सिंह के पिता के साथ भोजपुरी फ़िल्म अभिनेता पवन सिंह और वरुण कुमार सिंह

हालांकि, बिहार चुनाव के तारीखों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है. लेकिन चुनाव आयोग की गतिविधियों और तैयारियों को देखकर लगता है कि चुनाव अक्टूबर-नवंबर में तय समय पर ही करा लिए जाएंगे.

वैसे चुनाव की कैंपेनिंग लगभग सभी पार्टियों ने शुरू कर दी है. सभी के अपने-अपने मुद्दे हैं. पर बीजेपी और जदयू की तरफ़ से सुशांत सिंह के मौत के मुद्दे को ज़्यादा तवज्जो दी जा रही है.

ऐसा क्यों? वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं, "सबको लगता है कि बिहार चुनाव में सुशांत की मौत को मुद्दा बनाकर फ़ायदा उठाया जा सकता है. लेकिन ऐसा कत्तई नहीं है. बीजेपी हो या नीतीश कुमार की जदयू, अगर वे यह सोचते हैं कि सुशांत की मौत को मुद्दा बनाकर बिहार चुनाव जीत जाएंगे तो यह दिवास्वप्न की तरह है. यहां के चुनावी मुद्दे इससे बहुत अलग हैं जो ज़्यादातर जातीय और मज़हबी हैं."

मणिकांत ठाकुर कहते हैं, "सुशांत की मौत को सियासी चश्मे से देखने की ज़रूरत ही नहीं है. यह बिहार और बिहारियों के लिए इमोशन का मामला है. सबको सच जानने की उत्सुकता है कि आखिर एक उभरते सितारे की संदेहास्पद मौत हुई कैसे? लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसका चुनाव में कोई रोल रहना वाला है."

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