कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET): ये क्या है, कैसे होगा और इससे क्या बदलेगा?

    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

केंद्र सरकार ने बीते बुधवार सरकारी क्षेत्र की तमाम नौकरियों में प्रवेश के लिए एक राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी गठित करने का फ़ैसला किया है.

सरकार का दावा है कि ये एजेंसी केंद्र सरकार की नौकरियों में प्रवेश प्रक्रिया में परिवर्तनकारी सुधार लेकर आएगी और पारदर्शिता को भी बढ़ावा देगी.

इस एजेंसी के तहत एक कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी समान योग्यता परीक्षा आयोजित की जाएगी जो कि रेलवे, बैंकिंग और केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए ली जाने वाली प्राथमिक परीक्षा की जगह लेगी.

वर्तमान में युवाओं को अलग अलग पदों के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में भाग लेने के लिए भारी आर्थिक दबाव और अन्य तरह की मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करके कैबिनेट के इस फ़ैसले की प्रशंसा की है.

प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा है, "राष्‍ट्रीय भर्ती एजेंसी करोड़ों युवाओं के लिए एक वरदान साबित होगी. सामान्‍य योग्‍यता परीक्षा (कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट) के ज़रिये इससे अनेक परीक्षाएं ख़त्म हो जाएंगी और कीमती समय के साथ-साथ संसाधनों की भी बचत होगी. इससे पारदर्शिता को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा."

कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट क्या है?

भारत में हर साल दो से तीन करोड़ युवा केंद्र सरकार और बैंकिग क्षेत्र की नौकरियों को हासिल करने के लिए अलग अलग तरह की परीक्षाओं में हिस्सा लेते हैं.

उदाहरण के लिए बैंकिंग क्षेत्र में नौकरियों के लिए ही युवाओं को साल में कई बार आवेदन पत्र भरना पड़ता है. और प्रत्येक बार युवाओं को तीन-चार सौ रुपये से लेकर आठ-नौ सौ रुपये तक की फीस भरनी पड़ती है.

लेकिन नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी अब ऐसी ही तमाम परिक्षाओं के लिए एक कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट का आयोजन करेगी.

इस टेस्ट की मदद से एसएससी, आरआरबी और आईबीपीएस के लिए पहले स्तर पर उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और परीक्षा ली जाएगी.

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक़, कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट एक ऑनलाइन परीक्षा होगी जिसके तहत ग्रेजुएट, 12वीं पास, और दसवीं पास युवा इम्तिहान दे सकेंगे.

ख़ास बात ये है कि ये परीक्षा शुरू होने के बाद परीक्षार्थियों को अलग अलग परीक्षाओं और उनके अलग-अलग ढंगों के लिए तैयारी नहीं करनी पड़ेगी.

क्योंकि एसएससी, बैंकिंग और रेलवे की परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सवालों में एकरूपता नहीं होती है. ऐसे में युवाओं को हर परीक्षा के लिए अलग तैयारी करनी पड़ती है.

कैसे होगी ये परीक्षा?

इन परीक्षाओं को देने के युवाओं को कम उम्र में ही घर से दूर बनाए गए परीक्षा केंद्रों तक बस और रेल यात्रा करके जाना पड़ता था.

सरकार की ओर से ये दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रीय भर्ती परीक्षा युवाओं की इन मुश्किलों को हल कर देगी क्योंकि इस परीक्षा के लिए हर ज़िले में दो सेंटर बनाए जाएंगे.

इसके अलावा इस परीक्षा में हासिल स्कोर तीन सालों तक वैद्य होगा. और इस परीक्षा में अपर एज लिमिट नहीं होगी.

इस परीक्षा से क्या बदलेगा?

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ये एक ऐसा सुधारवादी कदम है जिसकी काफ़ी समय से प्रतीक्षा की जा रही थी.

करियर काउंसलर अनिल सेठी मानते हैं कि सरकार के इस कदम अच्छा है और इसका असर भी दीर्घकालिक होगा लेकिन ये बात नहीं भूलनी चाहिए कि ये सुधार की दिशा में पहला कदम है.

वे कहते हैं, "अगर आपको अलग अलग बहुत सारे दरवाजों पर जाना है, बहुत सारी जगह फॉर्म भरने हैं और अलग अलग जगह स्क्रूटनी होनी है तो ये एक लंबी प्रक्रिया है. इसमें लोगों को बहुत दिक्कतें होती हैं. ये मेरी व्यक्तिगत राय है कि ये बहुत साल पहले हो जाना चाहिए था.

एसएससी, बैंक और रेलवे ये तीन रास्ते हैं जहां से सरकारी नौकरियों में प्रवेश होता है. ऐसे में व्यक्ति जब ये इम्तिहान देगा तो इसका स्कोर तीन साल तक वैध रहेगा. इसके बाद युवा एसएससी, बैंक और रेलवे में से किसी भी परीक्षा में बैठ सकेगा. मेरे ख्याल से ये एक बेहतर कदम है."

अब सवाल उठता है कि ये कदम परीक्षार्थियों पर कैसा असर डालेगा.

बीबीसी से बात करते हुए ऐसे ही एक परीक्षार्थी पूर्वेश शर्मा बताते हैं कि ये कदम उन जैसे तमाम स्टूडेंट्स के लिए कुछ दुश्वारियों को कम कर देगा.

वे कहते हैं, "अब तक जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक़ ये अच्छा होगा. क्योंकि अब तक आप एक पेपर दिया करते थे. लेकिन अगर आपकी तबियत ख़राब होने या किसी अन्य वजह से आप वह पेपर नहीं दे पाते थे तो आपका पूरा साल ख़राब हो जाता था. अब सरकार ने जो बताया है, उसके मुताबिक़ ये पेपर साल में दो बार होगा."

"एक बड़ी बात ये भी है कि पहले आपको हर पेपर के लिए अलग अलग फॉर्म भरने होते थे. एसएससी में क्लर्क और सीजीएल दोनों का पेपर देना होता था तो दोनों के लिए फॉर्म अलग से भरने पड़ते थे. ऐसे में ग़रीब छात्रों के लिए बड़ी दिक्कत हो जाती है क्योंकि आईबीपीएस का एक फॉर्म ही जनरल कैटेगरी के लिए आठ सौ रुपये का होता है. और अब बच्चों को ऐसे कई फॉर्म भरने होते हैं, ऐसे में बच्चों पर काफ़ी बोझ पड़ जाता है. अब कम से कम प्री की परीक्षा एक ही हो जाएगी जिसके बाद आप अपनी इच्छा से जिस भी सेक्टर में जाना चाहें, उसके मेंस परीक्षा की तैयारी करवा सकते हैं."

तैयारी कर रहे बच्चों की प्रतिक्रिया साझा करते हुए पूर्वेश बताते हैं, "मैं खुद तैयारी कर रहा हूँ और कुछ बच्चों को पढ़ा भी रहा हूँ. जब से ये ख़बर आई है तब से कुछ बच्चों के फोन आ रहे हैं कि अब क्या होगा. मैं मानता हूँ कि ये एक अच्छा कदम है लेकिन अब तक हमें सारी जानकारी नहीं है कि ये इम्तिहान 2021 से होगा तो इसमें साल 2020 की परीक्षा ही होगी या 2021 की होगी क्योंकि अगर 2021 वाली परीक्षा सीईटी के तहत आयोजित की जाएगी तो 2023 तक ये परीक्षा नहीं हो पाएगी. ऐसे में लब्बोलुआब ये है कि सीईटी को लेकर ज़्यादा जानकारी सामने आनी चाहिए."

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