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IIT और NEET परीक्षा की तारीख़ फिर आगे बढ़ेगी क्या?
- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
आईआईटी और नीट की परीक्षा सितंबर में होने वाली है. लेकिन अब इसकी तारीख़ आगे बढ़ाने को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों के 11 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
उनकी माँग है कि दोनों परीक्षाओं की तारीख़ आगे बढ़ाई जाए. अपनी माँग के पीछे उन्होंने दलील दी है कि कोरोना के समय में इन परीक्षाओं के लिए जारी दिशानिर्देश का पालन सख़्ती से नहीं हो पाएगा.
इस साल कोरोना की वजह से आईआईटी और नीट दोनों ही परीक्षाओं की तारीख़ पहले एक बार बदली जा चुकी है. अब आईआईटी की परीक्षा 1 से 6 सितंबर के बीच प्रस्तावित है. नीट की परीक्षा की तारीख़ 13 सितंबर को होनी है.
देशभर में आईआईटी के लिए 11 लाख छात्रों ने फ़ॉर्म भरे हैं. जबकि नीट की परीक्षा के लिए 16 लाख छात्रों ने आवेदन दिया है.
कौन हैं याचिकाकर्ता
पश्चिम बंगाल के रहने वाले सायंतन विश्वास इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता हैं. वो इस साल आईआईटी और नीट दोनों की परीक्षा दे रहे हैं, यही वजह है कि उन्हें मुख्य याचिकाकर्ता बनाया गया है.
कोलकाता के न्यू अलीपुर के रहने वाले सायंतन ने बीबीसी से कहा कि उनकी स्थिति देश के दूसरे इलाक़े में रहने वालों से थोड़ी अलग है. उनका इलाक़ा कोरोना के कंटेनमेंट ज़ोन में आता है. वहाँ से बाहर निकलना मुश्किल है और जोख़िम भरा भी है.
सायंतन केवल अपने लिए ही चिंतित नहीं है, बल्कि दूसरे परीक्षार्थियों के लिए भी चिंतित है. उनका कहना है कि कंटेन्मेंट ज़ोन में रहने वालों को समाज में दूसरी ही नज़र से देखा जा रहा है.
उनके माता-पिता अपने ऑफिस में इस फ़र्क को महसूस करते हैं. दूसरी समस्या ये है कि सायंतन के पिता शुगर और बीपी के मरीज़ है. उन्हें लगता है कि ऐसी स्थिति में घर से 100 किलोमीटर दूर एग्ज़ाम सेंटर में जाना-आना उन्हें और उनके परिवार दोनों को ख़तरे में डाल सकता है.
राज्य स्तर की परीक्षा में आई दिक़्क़तें
कर्नाटक के बेंगलुरू में रहने वाले मनोज एस उन 11 यचिकाकर्ताओं में से एक हैं, जिन्होंने परीक्षा की तारीख़ आगे बढ़ाने की माँग उठाई है. मनोज इस साल आईआईटी की परीक्षा देने वाले थे. इंजीनियरिंग की पढ़ाई ही उनके जीवन का आगे का लक्ष्य है.
बीबीसी से फ़ोन पर बात करते हुए उन्होंने इस याचिका दाख़िल करने के पीछे के कारण गिनाए. मनोज के मुताबिक़ कोरोना के दौरान होने वाली इन परीक्षाओं के लिए राज्य सरकार की तरफ़ से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिड्यूर तय किए गए थे.
नियमों के उलट हर सेंटर पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं थी, ना ही सोशल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था थी और ना ही सेंटर कर पहुँचने के लिए यातायात की व्यवस्था थी. उसके बाद कई छात्रों को कोरोना जैसे लक्षण देखने को मिले. मनोज का कहना है कि उस परीक्षा के बाद उनके अंदर एक डर सा बैठ गया है.
कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की परीक्षा राज्य सत्र की परीक्षा थी, जिसमें किसी भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के मुक़ाबले कम छात्र शामिल हुए थे. ये परीक्षा 30 और 31 जुलाई को हुई थी.
ऐसे में राष्ट्रीय स्तर की किसी परीक्षा के लिए दिए गए सेंटर में कितनी भीड़ होगी, इसका कोई भी अनुमान लगा सकता है. याचिका के माध्यम से मनोज का कहना है कि जब तक कोरोना का ग्राफ़ फ़्लैट नहीं हो जाता और स्थितियाँ पहले जैसे नहीं हो जाती, तब तक आईआईटी जेईई की परीक्षा की तारीख़ आगे बढ़ा दी जाए.
बिहार में कोरोना और बाढ़ दोनों का कहर
बिहार के छपरा के रहने वाले मानस ने भी इस याचिका पर दस्तख़त किए है. वो इस बार मेडिकल में दाखिले के लिए नीट की परीक्षा देने वाले थे.
मानस ने 2016 में 12वीं की परीक्षा पास की है और तब से नीट की तैयारी में जुट गए हैं. छपरा से फ़ोन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि तीन मुख्य वजहों से वो इस एग्ज़ाम की डेट आगे बढ़ाना चाहते हैं.
पहला कारण उन्होंने कोरोना बताया. उनके मुताबिक़ बिहार सरकार की कोरोना से लड़ने की तैयारी किसी से छिपी नहीं है. ऐसे में ख़ुद को एक्सपोज़ करने का रिस्क कोई कैसे उठाएगा.
दूसरी वजह वो बिहार में आई बाढ़ को बताते हैं. उनके घर के बाहर पूरा पानी भरा हुआ है. घर से निकल कर बाहर एग्ज़ाम सेंटर तक जाने के लिए ना तो संसाधन है और ना ही पानी भर जाने की वजह से ऐसी स्थिति ही है.
उनका दावा है कि पूरे बिहार में नीट की परीक्षा के लिए दो ही सेंटर हैं- एक गया और दूसरा पटना. दोनों ही सेंटर पर जाने के लिए उन्हें बाढ़ और कोरोना के दौर में काफ़ी परेशानी होगी और एक दिन पहले ही निकलना होगा.
तीसरी वजह गिनाते हुए वो कहते हैं कि एक साथ लाखों छात्रों का एक साथ एक जगह पर निकलना सबको परेशानी में डाल सकता है. मानस की दलील है कि अकेले बिहार में लगभग 60 हज़ार छात्र परीक्षा दे रहे हैं. उनके साथ एक अभिभावक भी एक्ज़ाम सेंटर आएँगे तो तकरीबन सवा लाख लोग एक ही दिन सड़कों पर बाहर होंगे.
कोरोना के समय में मानस को ये बेहद ख़तरनाक स्थिति लगती है.
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का पक्ष
इन तीनों छात्रों की आशंकाओं को हमने देश के नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के महानिदेशक विनीत जोशी के सामने रखी. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बारे में उन्हें अभी तक कोई जानकारी नहीं है.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि कोरोना के दौर में परीक्षा कराने के लिए सरकार के सभी नियमों का पालन किया जाएगा. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ही वो संस्था है, जो देश में आईआईटी और नीट की परीक्षाएँ कराती है.
सरकार के दिशा निर्देश पर
सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक़ इस बार आईआईटी के लिए 600 सेंटर बनाए गए हैं, जो पहले 450 हुआ करते थे. उसी तरह से नीट की परीक्षा के लिए तकरीबन 4000 सेंटर इस बार हैं, जो पहले 2500 हुआ करते थे.
इसके अलावा इस साल महामारी की वजह से एग्ज़ाम सेंटर में एक ही समय पर सभी छात्र ना पहुँचे, इसकी बात कही गई है. एडमिट कार्ड में इसका ज़िक्र होगा. हफ़्ते भर में छात्रों को एडमिट कार्ड के साथ ही सारे नियमों की जानकारी दे दी जाएगी.
विनीत जोशी आगे कहते हैं कि छात्रों को एग्ज़ाम सेंटर पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था मिलेगी और सैनिटाइजर की भी व्यवस्था होगी. कंटेनमेंट ज़ोन में एग्ज़ाम का एडमिट कार्ड गेट पास का काम करेगी. स्थानीय प्रशासन को इसके बारे में पहले से सूचित किया जाएगा.
बिहार के बाढ़ पर उनका कहना था कि अभी भी परीक्षा में तकरीबन महीने भर का वक़्त बचा है. उम्मीद की जा रही है कि तब तक परिस्थितियाँ सुधर जाएँगी. जहाँ तक बिहार में दो सेंटर की बात है, विनीत जोशी का कहना है कि बिहार के दो शहरों में सेंटर हैं, लेकिन इन दो शहरों में सेंटर की संख्या काफ़ी ज़्यादा है.
उनका कहना है कि सरकार ने अपनी तरफ़ से पूरी तैयारी की है. इतना ही नहीं एनटीए ने जुलाई के महीने में छात्रों को सेंटर चेंज़ करने का विकल्प भी दिया था. 15 दिन के लिए विंडो भी खोली गई थी, जब छात्र फ़ॉर्म में बदलाव कर सकते थे.
कैसे साथ आए 11 छात्र
परीक्षा की तारीख़ आगे बढ़ती है या नहीं, इस पर फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है. लेकिन अलग-अलग प्रदेशों में रहने वाले ये सारे छात्र एक साथ आए कैसे?
ये सवाल सबके मन में ज़रूर है. इस पर मनोज ने एक दिलचस्प बात शेयर की है. देश के अलग-अलग शहरों में रहने वाले छात्रों ने ट्विटर और टेलीग्राम पर इस बारे में बात करना शुरू किया.
एक हैशटैग SaveJEE_NEETstudentsPM से बात शुरू हुई. जुड़ते-जुड़ते इस पर पिछले एक सप्ताह में तकरीबन 6 लाख से ज़्यादा ट्वीट देश के अलग-अलग राज्यों से छात्रों ने किया.
इस बारे में छात्रों का दावा है कि उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और शिक्षा मंत्री को ख़त भी लिखा, लेकिन छात्रों को कोई जवाब नहीं मिला.
इसके बाद छात्रों को एक वकील के सपोर्ट की ज़रूरत थी. जिसके लिए इंडिया वाइड पेरेंट एसोसिएशन की अनुभा श्रीवास्तव सहाय सामने आई. फ़िलहाल ये मामला सुप्रीम कोर्ट में है. याचिका पर सुनवाई की तारीख़ का इंतज़ार है.
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