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राजस्थान: राहुल गांधी ने कहा, राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाना चाहिए
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि राजस्थान के राज्यपाल को विधानसभा का सत्र बुलाना चाहिए.
शुक्रवार देर शाम राहुल गांधी ने हिंदी में ट्वीट करते हुए लिखा, "राजस्थान सरकार गिराने का भाजपाई षड्यंत्र साफ़ है. ये राजस्थान के आठ करोड़ लोगों का अपमान है. राज्यपाल महोदय को विधान सभा सत्र बुलाना चाहिए ताकि सच्चाई देश के सामने आए."
राजस्थान में सियासी संकट हर रोज़ एक नया रूप लेता हुआ दिख रहा है. कांग्रेस की आपसी गुटबाज़ी और पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट की बग़ावत से शुरू हुआ सियासी संकट एक तरफ़ जहां सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया वहीं शुक्रवार को ये सीधे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्यपाल कलराज मिश्र के बीच तनातनी के रूप में बदल गया.
राजस्थान में विधान सभा सत्र को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस और राजभवन के बीच तल्ख़ी की दीवार ऊँची होती जा रही है.
सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने जहाँ शुक्रवार को राजभवन जाकर धरना दिया वहीं राज्यपाल कलराज मिश्र ने इस पर कड़ा ऐतराज़ जताया है.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजभवन जाने से पहले कहा था कि अगर राजभवन ने सविंधान के विरुद्ध काम किया तो जनता राजभवन का घेराव करेगी.
इस पर राज्यपाल कलराज मिश्र ने नाराज़गी ज़ाहिर की है.
गहलोत के नेतृत्व में राजभवन पहुंचे विधायकों ने वहां नारे लगाए और सत्र बुलाने की माँग की, ताकि कांग्रेस अपना बहुमत साबित कर सके.
क़रीब चार घंटे तक राजभवन के परिसर में धरना देने और नारेबाज़ी के बाद विधायक वापस लौट गए.
राज्यपाल की सुरक्षा का क्या?
मगर इस घटना के बाद राज्यपाल मिश्र ने मुख्यमंत्री को चिठ्ठी लिख कर पूरे घटना क्रम पर क्रोध व्यक्त किया.
मिश्र ने इस पत्र में मामले को राजनैतिक रूप देने का आरोप लगाया है.
गहलोत ने 23 जुलाई को राज्यपाल को चिठ्ठी लिख कर सत्र बुलाने की माँग की थी.
इस पर मिश्र ने गहलोत को लिखी चिठ्ठी में कहा है कि वे इस पर क़ानून विदों से बात कर ही रहे थे कि इतने में ही मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने जो कुछ कहा वो ठीक नहीं था.
राज्य पाल ने कहा, "मुख्य मंत्री का कथन ठीक नहीं था कि जनता अगर राज भवन का घेराव करे तो वे इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं होंगे".
राज्यपालर ने पूछा है कि अगर मुख्यमंत्री और राज्य का गृहमंत्रालय राज्यपाल की सुरक्षा की गारंटी नहीं ले सकता है तो फिर राज्य में क़ानून-व्यवस्था का क्या होगा?
इसके आलावा राज्यपाल ने विधान सभा सत्र को लेकर भी सरकार से कुछ जानकारियां माँगी है.
यह भी कहा है कि कोरोना के चलते कैसे व्यवस्था होगी, इसका सरकार ने कोई उल्लेख नहीं किया है.
राज्यपाल ने सत्र आहूत करने की माँग पर कई सवाल पूछे हैं और सरकार से जवाब माँगा है.
राज्यपाल ने यह भी कहा कि ऐसे शार्ट नोटिस पर सत्र बुलाये जाने का सरकार कारण स्पष्ट करे.
बहुमत में हैं तो विश्वास मत की क्या ज़रूरत?
उन्होंने पूछा कि जब आप (अशोक गहलोत) बहुमत में हैं तो फिर विश्वास मत के लिए सत्र की ज़रूरत क्या है.
राजभवन ने सभी विधायकों की सुरक्षा और स्वतंत्र आवागमन पुख्ता करने को भी कहा है.
राज भवन में विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस विधायक तो अपने होटल लौट गए.
उधर कांग्रेस में सचिन पायलट अपने समर्थक 18 विधायकों के साथ राज्य से बाहर हैं.
गहलोत सरकार ने इन सवालों का जवाब देने के लिए कैबिनेट की बैठक बुलाई.
मुख्यमंत्री गहलोत की अध्यक्षता में हुई ये बैठक ख़त्म हो गई है लेकिन बैठक में क्या फ़ैसला हुआ इसकी जानकारी अभी नहीं मिल सकी है.
इसके पहले गहलोत ने मीडिया से कहा था कि वे राज्यपाल से मिल कर सत्र बुलाने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन वे सम्भवत: दिल्ली के दबाव में हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल को सविंधान के अनुरूप काम करना चाहिए.
गहलोत ने दावा किया कि उनके पास बहुमत है, लेकिन जानबूझकर यह माहौल बनाया गया है पर हम ऐसे किसी भी क़दम का विरोध करेंगे.
राज्य के सूचना मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि अगर कोरोना का भय बताकर सत्र से इनकार किया जा रहा है तो वो सभी विधायकों का टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं.
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा है कि शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्त्ता राज्य भर में बीजेपी के सरकार गिराए जाने के हथकंडों के विरोध में प्रदर्शन करेंगे.
डोटासरा ने कहा, "केंद्र सरकार राज्य सरकार को अस्थिर करने का षडयंत्र रच रही है, हम इसे सफल नहीं होने नहीं देंगे."
उधर राज्य में प्रतिपक्ष के नेता बीजेपी के गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि मुख्यमंत्री जिस तरह कह रहे हैं कि जनता राज भवन का घेराव करेगी तो उनकी ज़िम्मेदारी नहीं होगी, उसे देखते हुए केंद्रीय बल तैनात किये जाने चाहिए.
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