You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
मध्य प्रदेश के पन्ना में मज़दूरों को मिला 50 लाख का हीरा
- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए
मध्यप्रदेश का पन्ना हीरे के लिये दुनियाभर में जाना जाता है. इस बार इसी शहर के नौ मज़दूरों की क़िस्मत ने करवट ली और उन्हें 10.69 कैरेट का हीरा मिला है.
हालांकि आधिकारिक तौर पर इस हीरे की क़ीमत का पता नहीं चल पाया है. लेकिन हीरे के जानकारों का कहना है कि हीरे की क़ीमत पाँच लाख रुपये प्रति कैरेट तक होती है इसलिये इसकी अनुमानित क़ीमत 50 लाख के लगभग हो सकती है.
इस हीरे को पन्ना के हीरा विभाग में जमा करा दिया गया है.
अब इन लोगों को इंतज़ार है इसकी नीलामी की ताकि इन्हें इसकी सही क़ीमत मिल पाये. हीरा मिला है आनंदीलाल कुशवाहा और उनके आठ सार्थियों को जिनमें एक राजेश यादव हैं जिनकी ये ज़मीन थी.
हीरा अधिकारी आर.के. पाण्डेय ने बताया, "यह हीरा रानीपुर में आनंदीलाल को मिला है. यह 10.67 कैरेट का हीरा है. इसकी क्वालिटी बहुत अच्छी है. इसके पहले इन्हें 70 सेंट का हीरा मिल चुका है. दोनों ही हीरों की क्वालिटी अच्छी है."
हालांकि आर.के. पाण्डेय ने यह नहीं बताया कि इनकी अनुमानित क़ीमत कितनी हो सकती है.
उनका कहना था, "यह बताना मुश्किल है कि इसकी क़ीमत कितनी हो सकती है. वह बाद में ही नीलामी के दौरान तय होती है. लेकिन हीरा बहुत अच्छे क़िस्म का है."
हीरा विभाग का कहना है कि लॉकडाउन के बाद यह अभी सबसे बड़ा हीरा मिला है.
पन्ना ज़िले के रानीपुर गांव की एक निजी ज़मीन पर आनंदी कुशवाहा और उनके सार्थियों ने हीरा कार्यालय से हीरा खनन के लिए पट्टा बनवाया था.
आनंदीलाल ने बताया कि उन्होंने किस तरह से ज़मीन के लिये पट्टा लिया और किस तरह से उन लोगों की क़िस्मत खुली.
मीटर रीडिंग का काम करते हैं आनंदीलाल
आनंदीलाल स्वंय मध्यप्रदेश विद्युत मंडल में मीटर रीडिंग का काम करते हैं.
वहीं उनके दूसरे साथी भी छोटा मोटा काम करते है. कई खेतों में मज़दूरी करते हैं तो कई बार वो सब्ज़ी बेचने का काम भी कर लेते है. इसके साथ ही ये लोग ग़ुज़र बसर के लिये दूसरे छोटे-मोटे काम भी करते रहते हैं.
42 साल के आनंदीलाल दिन में 2 से 3 घंटे मीटर रीडिंग का काम करते है जिसमें उन्हें लगभग 2500 हज़ार रुपये मिल जाते हैं. उनके परिवार में दो बच्चों के साथ ही माता-पिता और सास भी हैं.
आनंदीलाल ने बताया, "यह राजेश यादव की निजी ज़मीन है. जो इनके एक हिस्सेदार हैं. ज़मीन लगभग 25 फ़िट लंबी और 25 फ़िट चौड़ी होगी. इसके लिये जून के आख़िर में आवेदन दिया था जो हमें जुलाई में मिल गई."
आनंदीलाल के मुताबिक़ वो और उनके साथी अपनी सहूलियत के हिसाब से ज़मीन पर जाकर खुदाई करते थे. खुदाई का यह काम गैती फावड़े से किया जाता था. ज़मीन के नीचे से मिलने वाले कंकरों को यह लोग इकठ्ठा करते थे और फिर उसे धोकर उनमें हीरों की तलाश की जाती है.
आनंदीलाल ने बताया, "मीटर रीडिंग के काम के बाद मैं भी ज़मीन पर पहुँच जाता था और खुदाई में जुट जाता था."
आनंदीलाल ने इसके पहले भी सरकारी विभाग से पट्टा लेकर हीरे की खोज की थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी.
इस बार क़िस्मत ने उनका साथ दिया और हीरा निकल आया.
निजी ज़मीन पर हीरे की तलाश
आनंदीलाल ने बताया कि पन्ना हीरे के लिये मशहूर है इसलिये इस तरह से निजी ज़मीन पट्टे में ली जा सकती है और उसमें खुदाई की जा सकती है.
उनका कहना है, "सरकारी ज़मीन पट्टे में मिलना अब लगभग बंद हो चुकी है. इसकी वजह कहीं वन भूमि है या फिर कहीं दूसरी दिक्क़त है. इसलिये अब निजी भूमि ही लेनी पड़ती है."
उनका कहना है कि अगर इसमें हम दूसरों को लगाकर खुदाई करवाते तो लगभग 2 लाख रुपये की लागत आती. आमतौर पर ज़मीन मालिक की खुदाई में मिलने वाले हीरे में 25 प्रतिशत की भागीदारी रहती है.
लेकिन इस ज़मीन पर ज़मीन मालिक एक हिस्सेदार बन गए इसलिये हिस्से में आने वाला पैसे ही उन्हें मिलेंगे.
राजेश यादव खुदाई नहीं करते थे लेकिन दूसरे आठ भागीदार बराबरी से खुदाई करते थे.
आनंदीलाल का कहना है कि पन्ना हीरे के लिये जाना जाता है इसलिये यहां की ज़मीन को इसी तरह से लोग लेते हैं और हीरे की तलाश में खुदाई करते है. हालांकि क़िस्मत पर निर्भर करता है कि हीरा मिलेगा या नही.
इन लोगों को हीरे की सही क़ीमत नीलामी में पता लगेंगी. नीलामी हर तीन से छह महीने में होती है लेकिन लॉकडाउन की वजह से इस बार यह नीलामी में देरी हो गई है.
आनंदीलाल कहते हैं, "हमें नहीं पता कि हमारे किस साथी की क़िस्मत से हमें यह हीरा मिला है. लेकिन हां हम सब ही ख़ुश हैं कि हमारी मेहनत का फल हमें मिल गया है."
इसके पहले 2018 में पन्ना के ही मोतीलाल प्रजापति की क़िस्मत ने करवट ली जब लगभग 1.50 करोड़ का हीरा उनके हाथ लगा था. मोतीलाल ने भी ज़मीन का पट्टा चार अन्य सार्थियों के साथ लिया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)