राहुल गांधी को एस जयशंकर ने 'समझाई विदेश नीति'

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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राहुल गांधी के नरेंद्र मोदी सरकार के विदेश नीति को लेकर उठाए गए सवालों के जवाब दिए हैं.
एस जयशंकर ने अपना जवाब देने के लिए एक के बाद एक 10 ट्वीट किए हैं. एस जयशंकर ने अपने जवाब में कहा, "प्रमुख देशों के साथ हमारे रिश्ते बेहतर हुए हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारा क़द बढ़ा है. अमरीका, रूस, यूरोप और जापान के साथ हमारे बैठकें बढ़ी हैं. चीन के साथ राजनीतिक तौर पर हम कहीं ज़्यादा बराबरी के साथ पेश आ रहे हैं."
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एस जयशंकर ने यह भी कहा है कि भारत अब कहीं ज़्यादा मुखर हो कर अपनी बात रखता है चाहे वह सीपीईसी का मामला हो या बीआरआई का, या फिर साउथ चाइना सी का या फिर चरमपंथियों पर अमरीकी पाबंदी का मामला हो.
एस जयशंकर ने यह भी कहा है कि मोदी सरकार सेना को मज़बूत करने की कोशिश कर रही है. 2008-14 की तुलना में 2014-2020 के बीच सेना के लिए बजट 280 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है. 32 प्रतिशत ज़्यादा सड़कें और 99 प्रतिशत ज़्यादा पुल बनाए गए हैं.
पड़ोसी देशों के साथ भारत के रिश्तों को लेकर भी राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा है कि पाकिस्तान को छोड़कर भारत के सभी पड़ोसी देशों से सहज रिश्ते थे, लेकिन अभी ऐसा नहीं है.
इसके जवाब में एस जयशंकर ने एक एक पड़ोसी देश के साथ भारत के मौजूदा रिश्ते के बारे में बताया है और यूपीए सरकार को भी घेरा है.
पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते को बेहतर बताया

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श्रीलंका ने हम्बनटोटा पोर्ट का ठेका भारत को ना देकर चीन को दिया है, इस बारे में एस जयशंकर ने लिखा है, "इस पोर्ट को बनाने का ठेका चीन को 2008 में मिल गया था, लिहाजा सवाल उन लोगों से पुछने चाहिए जो इस डील से जुडे थे."
एस जयशंकर ने के मुताबिक़ मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत के बांग्लादेश, मालदीवत नेपाल, भूटान, अफ़गानिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर हुए हैं.
पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते को लेकर राहुल गांधी ने अपने वीडियो में भले कुछ ना कहा हो लेकिन एस जयशंकर ने अपने जवाब में पाकिस्तान को भी शामिल किया है. उन्होंने लिखा है, आप पाकिस्तान का जिक्र करना भूल गए लेकिन आपको निश्चित तौर पर बालाकोट- उरी और शर्म अल शेख, हवाना और 26 इलेवन के बीच अंतर दिखा होगा.
एस जयशंकर ने के मुताबिक़ मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत के बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, भूटान, अफ़गानिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर हुए हैं.
भारत और नेपाल के बीच हाल के दिनों में तनातनी देखने को मिली है. नेपाल ने लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपने नक्शे में दिखाया है, जबकि भारत इन इलाकों को अपना बताता रहा है. इस बात को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है लेकिन भारत के विदेश मंत्री ने लिखा है, ''17 साल बाद नेपाल को प्रधानमंत्री का दौरा मिला है. इसके अलावा बिजली, ईंधन, आवास, अस्पताल, सड़क इत्यादि विकास परियोजनाएं भी नेपाल को मिली हैं.''
बांग्लादेश को लेकर एस जयशंकर ने लिखा है, ''2015 में भूमि सीमा तय करने के बाद विकास और आवाजाही का रास्ता खुला है और आतंकवादियों को वहां सुरक्षित पनाह नहीं मिलती है.''
दरअसल कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपना एक वीडियो जारी किया बताया है कि बीते छह सालों में ऐसा क्या हुआ जो चीन ने भारत के ख़िलाफ़ आक्रामक होने के लिए यही वक्त चुना.
वीडियो में वो समझाते हैं "एक देश को एक साथ कई चीज़ों की वजह से सुरक्षा मिलती है. इसमें पड़ोसियों और दूसरे मुल्कों के साथ उसके संबंध, अपनी ख़ुद की अर्थव्यवस्था और देश के नागरिकों की भावना और सोच शामिल हैं."
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वो कहते हैं, "दूसरे देशों के साथ हमारे संबंध बीते छह सालों में बिगड़े हैं. कई देशों के साथ हमारे रणनीतिक तौर पर अहम रिश्ते थे लेकिन अब तो रिश्ते लेन-देन तक सीमित हो गए हैं. पड़ोसी मुल्कों के साथ-साथ विदेशी मुल्कों के साथ हमारे रिश्ते बिगड़ गए हैं. "
"आज हमारे देश की अर्थव्यवस्था की हालत सही नहीं है, न ही दूसरों के साथ हमारे संबंध पहले जैसे रह गए हैं. ऐसे में चीन से सोचा कि यही सही वक्त है जब भारत के ख़िलाफ लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल को लेकर आक्रामक हुआ जा सकता है."
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