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मध्य प्रदेश: दलित दंपती की पिटाई और ज़हर खाने के मामले में पुलिसकर्मी निलंबित
- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए
मध्यप्रदेश के गुना में एक दलित किसान दंपती की पुलिस ने बेरहमी से पिटाई की ताकि उन्हें सरकारी ज़मीन के एक टुकड़े से हटाया जा सके जहां पर उनकी फसल खड़ी थी. इसके बाद दंपती ने कीटनाशक पीकर अपना जीवन समाप्त करने की कोशिश की है.
पति और पत्नि फिलहाल अस्पताल में है जहां पर पत्नी की हालत गंभीर बताई जा रही है.
मंगलवार को हुई इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद ये मामला सामने आया है. वहीं वीडियो में देखा गया है कि इस दंपती के सात बच्चे भी घटना के दौरान रोते और चिल्लाते रहे लेकिन प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को ज़रा भी तरस नहीं आया. बच्चों की चीख पुकार के बावजूद दंपती पर पुलिस का ज़ुल्म जारी रहा.
वीडियो वायरल होने के बाद बुधवार देर रात मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पद से हटा दिया है. इसके अलावा छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.
ज़िलाधिकारी एस विश्वनाथन और एसपी तरुण नायक को पद से हटाने के बाद मुख्यमंत्री ने जांच की घोषणा कर दी है.
यह मामला शहर के कैंट थाना क्षेत्र का है. शहर के सब डिविज़नल मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में एक टीम अतिक्रमण हटाने के लिये यहां पहुंची थी. जिस ज़मीन को लेकर विवाद हुआ उस पर राजकुमार अहिरवार ने फसल लगाई थी. पुलिस दस्ते ने जेसीबी मशीन के ज़रिये इसे हटाना शुरु कर दिया.
प्रदेश सरकार की हुई आलोचना
इस घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने ट्वीट में कहा, "ये शिवराज सरकार प्रदेश को कहां ले जा रही है? ये कैसा जंगलराज है? गुना में कैंट थाना क्षेत्र में एक दलित किसान दंपती पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों द्वारा इस तरह बर्बरता पूर्ण लाठीचार्ज."
उन्होंने कहा, "यदि पीड़ित युवक का ज़मीन संबंधी कोई शासकीय विवाद है तो भी उसे क़ानूनन हल किया जा सकता है लेकिन इस तरह क़ानून हाथ में लेकर उसकी,उसकी पत्नी की, परिजनों की व मासूम बच्चों तक की इतनी बेरहमी से पिटाई, यह कहाँ का न्याय है? क्या यह सब इसलिये कि वो एक दलित परिवार से है, ग़रीब किसान है?"
कमलनाथ ने कहा कि, "ऐसी घटना बर्दाश्त नहीं की जा सकती है. इसके दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्यवाही हो, अन्यथा कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी."
कांग्रेस ने एक कमिटी का गठन किया है जो कल गुना जाएगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घटना का वीडियो ट्वीट कर लिखा, "हमारी लड़ाई इसी सोच और अन्याय के ख़िलाफ़ है."
वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया पर लिखा, "एक तरफ बीजेपी और इनकी सरकार दलितों को बसाने का ढिंढोरा पीटती है जबकि दूसरी तरफ उनको उजाड़ने की घटनाएं उसी तरह से आम हैं जिस प्रकार से पहले कांग्रेस पार्टी के शासन में हुआ करती थी, तो फिर दोनों सरकारों में क्या अन्तर है? खासकर दलितों को इस बारे में भी जरूर सोचना चाहिए."
क्या है पूरा मामला?
अधिकारियों के अनुसार यह ज़मीन पहली ही आदर्श महाविद्यालय के लिए आवंटित की जा चुकी है. वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार इस ज़मीन पर एक पूर्व पार्षद का क़ब्ज़ा रहा है और उन्होंने यह ज़मीन राजकुमार अहिरवार को पैसे लेकर खेती करने के लिए दी थी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ज़मीन पर फसल लगाने के लिये राजकुमार ने लगभग 2 लाख रुपये का उधार लिया था. परिवार को जीवनयापन के लिए इस ज़मीन पर होने वाली फ़सल का ही सहारा था.
पति-पत्नी के कीटनाशक पी लेने के बाद भी पुलिस-प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली थी बल्कि उनके बच्चे ही उन्हें उठाने की कोशिश कर रहे थे. जब राजकुमार का भाई मौके पर पहुंचा तो पुलिस दल ने उसके साथ भी मारपीट की.
पुलिस ने राजकुमार और उनकी पत्नी सावित्री के ख़िलाफ़ मुक़दमा भी दर्ज कर लिया है. पुलिस ने घटना के वक़्त मौके पर मौजूद कई और लोगों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया है.
वहीं घटनास्थल पर गए तहसीलदार निर्मल राठौर ने आरोप लगाया है कि पहले परिवार के लोगों ने ही महिला पुलिस के साथ बदतमीज़ी की और उसके बाद उनके साथ थोड़ी सख्ती की गई.
ये वीडियो दिनभर ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी शेयर किया जाता रहा. लोग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफ़े तक की मांग कर रहे हैं.
ये पहली बार नहीं है जब पुलिस ने किसी किसान पर इस तरह की बर्बर कार्रवाई की है. इस तरह के वीडियो सामने आते रहे हैं लेकिन अभी तक किसी मामले में पुलिस पर कठोर कार्रवाई का उदाहरण पेश नहीं किया गया है.
कुछ देर की चर्चा के बाद आमतौर पर ऐसे मामले रफ़ा-दफ़ा कर दिए जाते हैं. हालांकि लोगों को उम्मीद है कि वीडियो के वायरल होने के बाद इस मामले में कुछ कार्रवाई हो सकती है.
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