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सचिन पायलट अशोक गहलोत से क्या नाराज़ हैं और राजस्थान सरकार पर कोई संकट है?
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
राजस्थान में सत्ताधारी कांग्रेस के दो धड़ों में खींचतान के कारण सरकार पर संकट पैदा होता दिख रहा है.
बीते दो दिनों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मतभेद बढ़ने के बाद डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने अपने नज़दीकी विधायकों के साथ दिल्ली का रुख़ किया है.
मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान किसी से छिपी नहीं है. साल 2018 में हुए चुनावों में कांग्रेस की जीत के साथ ही अशोक गहलोत और सचिन पायलट सीएम पद को लेकर आमने-सामने आ गए थे.
कांग्रेस हाईकमान ने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री की कुर्सी दी थी और सचिन पायलट को डिप्टी सीएम पद से संतोष करना पड़ा था.
सचिन पायलट इस समय कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भी हैं और ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री भी हैं.
सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच आंतरिक प्रतिद्वंदिता चलती रही है.
लेकिन राज्य की पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी की ओर से 'सरकार गिराने की कोशिशों के आरोपों की जांच' में मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री को पूछताछ का नोटिस जारी होने के बाद से ये तनाव चरम पर पहुंच गया है.
दरअसल राज्य में कथित हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त) के प्रयासों की जांच कर रही एसओजी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, पार्टी के चीफ़ व्हिप के अलावा कई मंत्रियों और विधायकों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक ट्वीट में कहा है कि ये नोटिस सामान्य बयान देने के लिए आए हैं और मीडिया में इसकी अलग ढंग से व्याख्या की जा रही है.
क्या है राजस्थान का नंबर गेम
200 विधायकों वाली राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं. इनमें बसपा के छह विधायक भी शामिल हैं जो अपनी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आए हैं. इसके अलावा प्रदेश के 12-13 स्वतंत्र विधायकों का समर्थन भी गहलोत सरकार को हासिल है.
यानी यदि संख्या की बात की जाए तो गहलोत सरकार मज़बूत स्थिति में है. 2018 के चुनावों में बीजेपी ने 73 सीटें जीती थीं. अभी की स्थिति में कांग्रेस गठबंधन के पास बीजेपी के मुक़ाबले 48 विधायक अधिक हैं.
जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ कहते हैं कि यदि ये मान भी लिया जाए कि सचिन पायलट के साथ 25 विधायक हैं तब भी अभी की स्थिति में गहलोत सरकार को ख़तरा नहीं है.
वो कहते हैं, "राजस्थान में स्थिति मध्य प्रदेश जैसी नहीं है जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच अंतर बहुत कम था. यहां अगर सचिन पायलट अपने क़रीबी विधायकों के साथ अलग हो भी जाते हैं तब भी वो सरकार गिराने की स्थिति में नहीं हैं."
सचिन पायलट के बीजेपी के संपर्क में होने की अटकलों पर नारायाण बारेठ कहते हैं, "ये हो सकता है कि सचिन पायलट बीजेपी के संपर्क में हों, लेकिन सवाल ये है कि वो बीजेपी को ऑफ़र क्या करेंगे और बदले में क्या चाहेंगे. ये सर्वविदित है कि वो प्रदेश के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं. लेकिन अभी की स्थिति में संख्याबल उनके साथ नहीं है."
ऐसे में राजस्थान में चल रहा मौजूदा सियासी संकट कांग्रेस का अंदरूनी मामला ज़्यादा लगता है. विश्लेषक इसे सचिन पायलट को उनकी सही जगह दिखाने की कोशिश भी मान रहे हैं.
क्या है सरकार गिराने की कोशिश का मामला?
राजस्थान पुलिस की एसओजी सरकार गिराने की साज़िश के आरोपों की जांच कर रही है. इस जांच के सिलसिले में सीएम, डीप्टी सीएम और कई विधायकों को नोटिस जारी किए गए हैं.
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दो स्थानीय नेताओं को भी गिरफ़्तार किया गया है. एसओजी प्रमुख अशोक राठौड़ ने बीबीसी से बात करते हुए दोनों की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है.
उन्होंने बताया, "अशोक सिंह और भरत मलाणई को गिरफ़्तार किया है. जांच चल रही है, और भी लोगों से पूछताछ की जाएगी."
हालांकि बीजेपी ने हिरासत में लिए गए लोगों का पार्टी से संबंध होने से इनकार किया है. बीबीसी से बात करते हुए बीजेपी नेता गुलाब चंद कटारिया ने इन दोनों के ही पार्टी से जुड़े होने से इनकार करते हुए कहा है कि कभी पहले वो पार्टी में रहे होंगे, अभी नहीं हैं.
कांग्रेस का आरोप है कि जिस तरह मध्य प्रदेश में पार्टी की सरकार गिराई गई, उसी तरह ही राजस्थान में भी सरकार गिराने की कोशिशें की गई हैं.
मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के धड़े के 22 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया था जिसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास बहुमत नहीं रह गया था और उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा.
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