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भारत-चीन तनाव और कोरोना के बीच कैसे फँसा एक चीनी नागरिक
- Author, भार्गव पारिख
- पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी गुजराती के लिए
जब चीन में कोरोना महामारी ने पैर पसारना शुरू किया तो मैं अपनी पत्नी ओर बेटी के पास अहमदाबाद आ गया. अब हम लोग यहाँ फँस गए हैं और हमें नहीं पता कि मैं कब तक चीन वापस जा पाऊँगा. मैं अपने देश जाने का इंतज़ार कर रहा है. - गुजरात के अहमदाबाद की पल्लवी अपने चीनी पति हाईगो मा के शब्द हिंदी में हमें समझाती हैं.
हाईगो मा पेशे से इंजीनियर हैं और चीन के शिज़ुआन प्रांत से हैं. उन्होंने भारतीय मूल की पल्लवी से शादी की है, जो चीनी भाषा की एंटरप्रिटर हैं.
दिसंबर 2016 में दोनों की शादी हुई थी. दोनों की ढाई साल की बेटी है जिसका नाम है आंची.
हाईगो कहते हैं, "जब वुहान में कोरोना वायरस कहर बरपा रहा था तब पूरे चीन में एक तरह का डर फैल गया था. हर कोई लगातार एक अनजाने डर में जी रहा था."
"पल्लवी और उनके पिता को मेरे स्वास्थ्य और सुरक्षा के बारे में चिंता थी. वो चाहते थे कि मैं भारत आकर अपने परिवार के साथ रहूँ."
"उस वक़्त भारत में कोरोना संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया था. मेरे पास भारतीय वीज़ा था और मैंने सोचा कि बेहतर होगा कि मैं अपने परिवार के पास रहूँ. फिर जनवरी के आख़िरी सप्ताह में मैं अहमदाबाद आ गया."
एक तरफ़ कोरोना तो दूसरी तरफ़ सीमा विवाद
भारत आने के बाद हाईगो के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी अहमदाबाद में चीनी खाना तलाशना.
वो कहते हैं, "मुझे लगा कि मैं जल्द ही वेजिटेरियन बन जाऊँगा. यहाँ पारंपरिक नॉन-वेजिटेरियन चीनी खाना नहीं मिलता था. जैसे-जैसे कोरोना महामारी का डर बढ़ता गया यहाँ नॉन-वेजिटेरियन खाने के विकल्प भी कम होते गए. मैं अधिकतर अंडे खाने लगा था."
हाईगो को गुजराती खाने की आदत नहीं थी. वो कहते हैं कि उन्हें रोटी पसंद है लेकिन वो इसे अपनी स्टेपल डाइट के तौर पर स्वाकीर नहीं कर पाते.
पल्लवी कहती हैं, "इससे पहले जब हाईगो अहमदाबाद आते तो अपना खाना अक्सर ख़ुद ही बनाया करते थे. मैं वेजिटेरियन हूं और चीन जाती हूँ तो अक्सर फलों और सब्ज़ियों पर ही निर्भर रहती हूँ."
कोरोना महामारी के साथ-साथ हाल में दिनों में भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के कारण परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं.
हाईगो कहते हैं, "मैं सोच रहा था कि इस बार यहाँ आने के बाद मैं अपनी पत्नी और बेटी के परमानेन्ट वीज़ा के लिए सारी ज़रूरी औपचारिकता पूरी कर लूँगा. मैं अपने परिवार के साथ हमेशा के लिए चीन जाना चाहता था."
पल्लवी कहती हैं, "भारत-चीन के बीच जारी सीमा विवाद के कारण मेरे चीनी वीज़ा का काम रुक गया है. मैंने डिपेन्डेंट वीज़ा के लिए आवेदन किया है. मुझे नहीं पता कि मैं और मेरी बेटी कब चीन जा पाएँगे. "
हाईगो के बारे में पल्लवी बताती हैं, "वो अक्सर रोज़मर्रा की छोटी-मोटी चीज़ों के लिए घर से बाहर चले जाया करते थे. उन्हें केवल चीनी भाषा आती है. वो अंग्रेज़ी या फिर कोई और भाषा नहीं जानते. लेकिन इसके बावजूद वो आसानी से सामान ख़रीद लाया करते थे. लेकिन गलवान घाटी में हुई घटना के बाद से वो घर पर ही हैं."
पल्लवी कहती हैं, "हम जिस सोसायटी में रहते हैं, वहाँ किसी को इस बात से कोई एतराज़ नहीं कि हाईगो चीनी नागरिक हैं. लेकिन मौजूदा हालात देखते हुए वो घर पर ही रहना पसंद कर रहे हैं."
हाल में भारत-चीन सीमा विवाद गहराने के बाद भारत सरकार ने 59 चीनी मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी थी. इसके बाद हाईगो और पल्लवी को चीन में रह रहे हाईगो के परिवार के साथ संपर्क कर पाने में मुश्किलें पेश आ रही हैं.
पल्लवी कहती हैं, "हम वीचैट के ज़रिए चीन में रह रहे हाईगो के माता-पिता से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. बैन लगने से पहले हम चैट पर और वीडियो कॉल के ज़रिए दिन में कम से कम चार बार तो उनसे बात कर ही लेते थे. लेकिन अब ऐसा करना भी मुश्किल हो गया है."
कैसे और कहाँ मिले पल्लवी और हाईगो
पल्लवी बताती हैं कि उनके परिवार में लोग बौद्ध धर्म में आस्था रखते हैं.
वो कहती हैं, "मैं हमेशा से चीनी परंपरा, संस्कृति और लोगों के बारे में जानना चाहती थी. मैंने चीनी भाषा सीखने का फ़ैसला किया. बिहार के बोधगया से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने चीनी भाषा सीखी और एंटरप्रिटर के तौर पर काम करने लगी. मैं भारत दौरे पर आने वाले चीनी बिज़नेसमैन की मदद करने लगी क्योंकि न तो वो हिंदी जानते थे और न ही अंग्रेज़ी."
पल्लवी कहती हैं, "साल 2016 में मैं आंध्र प्रदेश के नेल्लूर में एक तकनीकी कंपनी में एंटरप्रिटर के तौर पर काम करने लगी. हाईगो ने वहाँ क्वालिटी इंजीनियर के तौर पर ज्वाइन किया था. दफ्तर में मेरी उनके साथ अलग-अलग मुद्दों पर बात होती थी."
"हाईगो के दोस्त नहीं थे. ऐसे में हम लोग साथ में खाने खाते और बातें करते. हम लोग अपनी पसंद-नापसंद और अपने शौक़ के बारे में बातें करते. फिर एक दिन हाईगो ने मुझसे पूछा कि मुझे कैसा जीवनसाथी चाहिए."
पल्लवी कहती हैं, "मैंने हाईगो को कहा मैं उससे शादी करना चाहूँगी जो मुझे समझता हो."
इसके बाद हाईगो ने पल्लवी को बताया कि उन्हें भारतीय संस्कृति पसंद है और वो बौद्ध धर्म को मानने वाली किसी भारतीय लड़की से शादी करना चाहते हैं.
पल्लवी बताती हैं कि कई महीनों तक हम एक दूसरे से मुलाक़ातें करते रहे. हाईगो ने अपने परिवार के वीचैट ग्रुप पर पल्लवी को जोड़ा, जहाँ वो उनके परिवार के साथ घुलमिल गईं.
इसके बाद पल्लवी में अहमदाबाद में अपने परिवार की मुलाक़ात हाईगो से करवाई. हाईगो को भी परिवार में सभी ने पसंद किया जिसके बाद दोनों मे शादी करने का फ़ैसला किया.
पल्लवी कहती हैं, "अपने-अपने परिवार में हमने शादी के बारे में बात की तो किसी ने कोई विरोध नहीं किया. 2016 में हमने शादी कर ली."
हाईगो बताते हैं, "पल्लवी चाहती थी कि उसकी शादी भारतीय रीति रिवाज़ों से हो. इसलिए हमने अहमदाबाद में शादी की और मेरा परिवार इसके लिए चीन से यहाँ आया. इसके बाद हमने शिज़ुआन में रिसेप्शन की पार्टी दी."
हाईगो कहते हैं कि उन्हें काम के सिलसिले में चीन लौटना था. अलग-अलग देशों में जाकर कुछ वक्त वहाँ रह कर काम करना, उनके काम का हिस्सा है. ऐसे में दोनों ने फ़ैसला किया कि पल्लवी अहमदाबाद में ही रहेंगे जबकि हाईगो बीच-बीच में यहाँ आते रहेंगे.
हाईगो बताते हैं, "मैं भारत आता रहता था. 2017 में हमारी बेटी हुई. हमने उसका नाम आंची रखा. चीनी भाषा में आंची का मतलब होता है शांति."
हाईगो के परिवार के साथ चीनी नववर्ष मनाने के लिए साल 2018 में पल्लवी और आंची चीन गए थे. वे कहते हैं, "कभी मैं भारत आ जाता तो कभी पल्लवी और आंची चीन आ जाते. हमारी ज़िंदगी अच्छी था लेकिन फिर 2019 में कोरोना वायरस के कारण चीज़ें बदल गईं."
हाईगो कहते हैं, "लेकिन इसमें एक अच्छी बात ये है कि मैंने अपनी बेटी आंची के साथ लंबा वक्त बिताया है. लेकिन मुझे ये बात परेशान कर रही है कि मैं कब चीन में अपने घर जा पाऊँगा."
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