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पीवी नरसिम्हा राव: मोदी को क्यों याद आए और क्या सोनिया ने भुला दिया?
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कई बड़े अख़बारों में 'तेलंगाना का बेटा… भारत का गर्व' की बात कहता पूरे पन्ने का विज्ञापन छपा, कई अखबारों में तो पहले पन्ने पर. लेकिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की जन्म शताब्दी पर ये विज्ञापन उनके राजनीतिक दल कांग्रेस की तरफ़ से नहीं, बल्कि तेलंगाना में सरकार में चला रही तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की तरफ़ से छपवाये गए.
टीआरएस ने पीवी नरसिम्हा राव की जन्म शताब्दी के मौक़े पर साल भर के कार्यक्रम का ऐलान किया है और राव को भारत रत्न दिए जाने की मांग की है जिसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ़ से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़ 'तेलंगाना विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया जाएगा'.
कांग्रेस पार्टी के दो अहम नेताओं, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने भी राव को श्रृद्धांजलि दी, पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री रह चुके मनमोहन सिंह ने हमेशा की तरह उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा, 'उनके नेतृत्व में हमने आर्थिक और विदेश नीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क़दम उठाए,' जबकि चिदंबरम ने उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर याद किया 'जिसने देश को ख़ुशहाली और आत्मनिर्भरता के पथ पर आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई'.
कांग्रेस पार्टी ने भी रविवार को किए गए ट्वीट में नरसिम्हा राव को 'दूरदर्शी नेता' बताया, और राहुल गांधी ने भी एक पोस्ट में उन्हें याद किया मगर बस सोनिया गांधी की तरफ़ से इस मामले में ख़ामोशी पर कई तरफ़ से कई तरह के सवाल उठे.
हालांकि कांग्रेस पार्टी की तेलंगाना इकाई का भी कहना है कि पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी के निर्देश के मुताबिक़ वो पूर्व प्रधानमंत्री की जन्म-शताब्दी के अवसर पर साल भर के कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही है और इसके लिए जल्द ही समिति का गठन किया जाएगा.
मगर अपने एक बहुत ही अहम नेता की जन्म-शताब्दी को लेकर कांग्रेस के देर से जागने की वजह लोगों से पूरी तरह से छिपी नहीं रही है, और स्थानीय समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर वो घटनाएं याद की जाने लगीं जब सोनिया 'लॉबी' ने 1996 में नरसिम्हा राव को अध्यक्ष पद से हटने पर मजबूर किया और सीताराम केसरी ने उनकी जगह ली.
रशीद क़िदवई की किताब '24, अकबर रोड ' के विमोचन के समय बोलते हुए मशहूर पत्रकार और मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके संजय बारू ने याद किया था कि किस तरह कांग्रेस ने अपने एक सीनियर नेता का दिल्ली में अंतिम संस्कार तक नहीं होने दिया और नरसिम्हा राव के परिवार को मजबूर किया गया कि वो उनके शव को हैदराबाद ले जाएँ. दिल्ली में हुए पुस्तक के उस विमोचन में एक श्रोता के तौर पर ये संवाददाता भी मौजूद था.
अपनी किताब 1991: हाऊ पीवी नरसिम्हा राव मेड हिस्ट्री में संजय बारू ने पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन के बारे में विस्तार से लिखा है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदेश वर्मा कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी हमेशा अपने उन नेताओं की अनदेखी की है जो नेहरू-गांधी परिवार से नहीं रहे हैं - चाहे वो वल्लभ भाई पटेल हों, या लाल बहादुर शास्त्री या अब नरसिम्हा राव, और ख़ास तौर पर उनको तो ज़रूर दरकिनार किया गया है जिन्होंने नेहरू-गांधी परिवार के एकक्छत्र राज को पार्टी में चैलेंज करने की कोशिश की हो.
पार्टी अध्यक्ष रहते हुए राव ने कांग्रेस में संगठनात्मक चुनाव करवाने की बात कही थी और कई जगहों पर कहा जाता है कि उन्होंने सोनिया गांधी को पार्टी में अलग-थलग करने की कोशिश की.
सोनिया गांधी के तरफ़ से किसी तरह का कोई संदेश जन्म शाताब्दी के मोके पर नहीं आने पर कांग्रेस को क़रीब से जानने वाले तहसीन पूनावाला कहते हैं, "अगर कांग्रेस ने अपनी तरफ़ से, या राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को श्रृद्धांजलि दी है तो ऐसा उन्होंने सोनिया गांधी के कहने पर ही तो किया होगा क्योंकि पार्टी की अध्यक्ष तो वो हैं और सोनिया गांधी का कोई ट्वीटर हैंडिल है नहीं, तो वो अपनी तरफ़ से सोशल मीडिया पर किस तरह संदेश देतीं".
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'बीजेपी के बात बकवास है, राव भारत के महान शख्शियतों में से एक थे और उनके लिए मेरे मन में बहुत आदर है.'
तहसीन पूनावाला का कहना था, "बीजेपी ये तो बताए कि वो अपने नेताओं - एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार, यशवंत सिन्हा के साथ क्या कर रहे हैं; ये सब तो पार्टी के अहम नेताओं में रहे हैं लेकिन आज बाहर हैं क्योंकि नरेंद्र मोदी उन्हें पसंद नहीं करते. राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रखर नेताओं में रहे गोविंददाचार्य का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपीय का मुखौटा वाले बयान के बाद क्या हश्र हुआ ये राजनीति पर नज़र रखने वाले आज भी याद करते हैं".
कांग्रेस से जुड़े एक नेता कहते हैं कि बीजेपी के पास कोई आइकन नहीं है इसलिए वो सरदार पटेल, बीआर अंबेडकर, शास्त्री जी और अब नरसिम्हा राव का गुणगाण कर अपने लोगों के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है.
बीजेपी को राव में दिखने लगी है ख़ूबियां?
प्रधानमंत्री नरेंद्र् मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने रेडियो संदेश में नरसिम्हा राव को याद किया और अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपे लेख के अनुसार कहा कि उनके बारे में एक बात जानने की ज़रूरत है कि निज़ाम ने वंदे मातरम को गाने की इजाज़त नहीं दी थी, राव आज़ादी की लड़ाई में शामिल थे और उन्होंने निजाम के खिलाफ़ अपनी मुहिम को तेज़ किया था.
उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने नरसिम्हा राव को बहुमुखी प्रतिभा वाले व्यक्ति के तौर पर याद किया.
राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई पूछते हैं कि "बार-बार भ्रष्टाचार मुक्त देश की बात करने वाली बीजेपी को राव में ख़ूबियां ही ख़ूबियां कब से दिखने लगीं? क्या वो लखूभाई पाठक भ्रष्टाचार मामले से लेकर, हर्षद मेहता स्टॉक मार्केट घोटोला, चीनी घोटाला और उसी तरह के अन्य दूसरे मामले पूरी तरह से भूल गए हैं?!'
क़िदवई कहते हैं कि नरसिम्हा राव ने तो बाबरी मस्दि ढहाने के मामले को लेकर कहा है कि बीजेपी ने उनके साथ धोखा किया, शायद ये पार्टी के नेताओं को याद नहीं या वो इसे किसी तरह से किनारे करना चाहते हैं.
तारीफ़ के हक़दार हैं राव?
कांग्रेस को जानने वालों का मानना है नेहरू-गांधी परिवार से तनाव के अलावा बाबरी मस्जिद विध्वंस में नरसिम्हा राव की पूरी भूमिका को लेकर पार्टी असहज रही है और उनके समय में हुए घोटालों को नकारा नहीं जा सकता, जब पहली बार भारत के इतिहास में किसी व्यक्ति ने प्रधानमंत्री पर ये आरोप लगाया कि सूटकेस में भरकर पैसे उन तक पहुंचाए गए हैं.
टीआरएस ने भी हैदराबाद के निज़ाम की हुकूमत के ख़िलाफ़ नरसिम्हा राव के आंदोलन की बात की है लेकिन पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर राव निज़ाम की तारीफ़ करते नहीं थकते.
बीबीसी ने जब ये सवाल पार्टी के सासंद नरसैहया गौड़ से किया तो उनका कहना था कि हर किसी की नकारात्मक बातों को याद रखने की हमेशा ज़रूरत नहीं, ये भी एक सच है कि निज़ाम ने सड़कें, अस्पताल से लेकर बांध के बारे में सोचा जो आज भी तेलंगाना की जनता के काम आ रही हैं और हमें वो याद रखने की ज़रूरत है.
बाबरी मस्जिद विध्वंस के मामले में नरसिम्हा राव की भूमिका पर उठे सवाल को लेकर गौड़ ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास तो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय में हुआ, वो भी नहीं भूला जाना चाहिए.
इस बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी भेजकर मांग की है कि हैदराबाद की सेंट्रल यूनिवर्सिटी को नरसिम्हा राव के नाम पर किया जाए.
टीआरएस पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा को कई शहरों में स्थापित करने, उनकी किताबों को छापने और उनके नाम पर स्मारिका जारी करने की बात कह रही है.
इस बीच हैदराबाद के सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने कहा है कि राव न तो आर्थिक और न ही सामाजिक बदलाव लाने वाले उदार व्यक्ति थे, बल्कि वो कांग्रेस के उस स्वार्थी राजनीति का हिस्सा थे जो धोखे से भरा रहा है वो किसी तारीफ़ के हकदार नहीं हैं.
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