पीटीआई के समर्थन में आए प्रेस संगठन, कहा चीनी राजदूत का इंटरव्यू कर निभाई ज़िम्मेदारी- आज की बड़ी ख़बरें

पीटीआई न्यूज़

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प्रेस एसोसिएशन और ऑल इंडिया वुमेंस प्रेस कोर (आइडब्ल्यूपीसी) ने प्रसार भारती के रवैए पर चिंता प्रकट की है.

प्रसार भारती ने समाचार एजेंसी पीटीआई को चेतावनी दी है कि वह उसकी सेवाएँ लेना बंद कर सकता है क्योंकि प्रसार भारती के मुताबिक़ समाचार एजेंसी "राष्ट्रीय हितों के अनुरूप काम नहीं कर रही है".

पिछले दिनों समाचार एजेंसी पीटीआई ने लद्दाख में भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव के सिलसिले में भारत में चीनी राजदूत का इंटरव्यू किया था.

प्रेस एसोसिएशन और आइडब्ल्यूपीसी का कहना है कि समाचार एजेंसी पीटीआई अपनी पेशेवर ज़िम्मेदारी निभा रही है. दोनों मीडिया संगठनों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह विडंबना ही है कि इमरजेंसी की 45वीं बरसी के घंटों के भीतर पीटीआई जैसी संस्था को निशाना बनाया जा रहा है.

पीटीआई की न्यूज़ कवरेज को "राष्ट्रहित के खिलाफ़" बताए जाने पर इस बयान में कहा गया है कि "ऐसा लगता है कि प्रशासन इस बात को समझ पाने में नाकाम रहा है कि स्वतंत्र, वस्तुपरक और निष्पक्ष मीडिया लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है."

चीन

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इमेज कैप्शन, भारत में चीन के राजदूत सुन वेइडोंग का इंटरव्यू पीटीआई ने किया था

इससे पहले प्रसार भारती ने शनिवार को एक पत्र भेजकर कहा था कि पीटीआई की न्यूज़ रिपोर्टिंग राष्ट्र हित में नहीं है. यह पत्र प्रसार भारती के प्रमुख समीर कुमार ने लिखा है. समीर कुमार का यह पत्र पीटीआई के मार्केटिंग प्रमुख के नाम गया है.

पत्र में कहा गया है, ''पीटीआई के संचालन को लेकर संपूर्णता में चीज़ों को देखा जा रहा है. प्रसार भारती पीटीआई से अपने संबंधों को आगे भी जारी रखने को लेकर समीक्षा कर रहा है. इस संदर्भ में जल्द ही फ़ैसले से अवगत करा दिया जाएगा.''

पूरा विवाद भारत और चीन में सीमा पर तनाव को लेकर उपजा है. 15 जून को दोनों देशों की सेना में हिंसक झड़प हुई थी और इसमें भारत के 20 जवानों की मौत हो गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस ने पीटीआई को भेजे पत्र का डिटेल छापा है. प्रसार भारती ने अपने पत्र में लिखा है कि पीटीआई को संपादकीय मामलों को लेकर फिर से चेदावनी दी गई है. पत्र में कहा गया है कि पीटीआई की संपादकीय चूक के कारण ग़लत ख़बर लोगों के बीच फैली और इससे जनहित को नुक़सान हुआ है.

प्रसार भारती दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो चलाता है. यह केंद्र सरकार के अधीन है लेकिन एक स्वायत्त संस्था है. 2013 से प्रसार भारती पीटीआई की सेवाओं के लिए हर साल 9.15 करोड़ रुपए का भुगतान करता है. हालांकि 2017 से प्रसार भारती ने 25 फ़ीसदी भुगतान को रोक रखा है. प्रसार भारती का कहना है कि वो सेवा शर्तों को लेकर पीटीआई से फिर से बात करना चाहता है.

चीन

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भारत में चीन के राजदूत सुन वेइडोंग का पीटीआई ने इंटरव्यू किया था. इस इंटरव्यू के सिर्फ़ तीन सवाल और उनके जवाब को भारत में चीनी दूतावास की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है. अपने इंटरव्यू में सुन ने सीमा पर तनाव के लिए भारत पर आरोप लगाए थे. इंटरव्यू में चीनी राजदूत से सवाल पूछा गया था कि क्य अब तनाव ख़त्म हो जाएगा तो सुन वेइडोंग ने कहा था कि यह दायित्व भारत का है न कि चीन का.

संयोग से इसी इंटरव्यू में चीन के राजदूत ने माना था कि 15 जून को एलएसी पर भारत और चीन की सेना में हुई हिंसक झड़प में चीनी आर्मी के जवान भी हताहत हुए थे. इससे पहले चीन इस पर कुछ भी बोलने से बच रहा था.

पीटीआई बीजिंग से भी पूरे विवाद पर रिपोर्ट कर रहा है. पीटीआई का कहना है कि उसकी तरफ़ से चीनी राजदूत से एलएसी पर चीन की आक्रामकता और नए निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल किए गए थे लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया था.

पीटीआई का रजिस्ट्रेशन 1947 में हुआ था और 1949 से काम करना शुरू कर दिया था. पंजाब केसरी के सीईओ और प्रधान संपादक अभी पीटीआई के चेयरमैन हैं. यह देश की सबसे बड़ी न्यूज़ एजेंसी है और इसकी कमाई मीडिया घरानों के चंदे से होती है.

अमित शाह ने कहा, चीन-पाकिस्तान को ख़ुश करने वाले बयान न दें राहुल गांधी

वीडियो कैप्शन, अमित शाह ने चीन को लेकर राहुल गांधी के हमलों और दिल्ली में कोरोना के हालात पर क्या कहा?

समाचार एजेंसी एएनआई को दिए ख़ास इंटरव्यू में देश के गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के बयान और दिल्ली में कोरोना वायरस की स्थिति से जुड़े सवालों पर जवाब दिए हैं.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भारत-चीन सीमा विवाद और कोरोना वायरस पर अपने ट्वीट के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'सरेंडर मोदी' बताने पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि इस समय ऐसे बयान नहीं देने चाहिए जिससे चीन और पाकिस्तान को ख़ुशी हो.'

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सरेंडर मोदी' हैशटैग के पाकिस्तान और चीन में ट्रेंड होने पर अमित शाह ने कहा, "हम भारत विरोधी प्रोपेगैंडा से निपटने में सक्षम हैं लेकिन जब एक बड़ी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष (राहुल गांधी) इस संकट में ओछी राजनीति करते हैं तो यह उनके लिए और उनकी पार्टी के लिए आत्मचिंतन का विषय है कि उनके हैशटैग को पाकिस्तान और चीन द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है."

उन्होंने कहा, "पार्लियामेंट होनी है, चर्चा करनी है तो आइए चर्चा करेंगे. 62 से लेकर आज तक दो-दो हाथ हो जाए. कोई नहीं डरता चर्चा से. मगर जब देश के जवान संघर्ष कर रहे हैं. सरकार एक स्टैंड लेकर ठोस क़दम उठा रही है, उस वक़्त पाकिस्तान और चीन को ख़ुशी हो, इस प्रकार के स्टेटमेंट किसी को नहीं देने चाहिए."

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उन्होंने कहा, "कोरोना के ख़िलाफ़ भारत सरकार ढंग से लड़ी है. मैं राहुल गांधी को सलाह नहीं दे सकता कुछ वक्रदृष्टा लोग होते हैं जिन्हें सीधी बात भी वक्र दिखती है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमने अच्छे से कोरोना से लड़ाई लड़ी है. मैंने आज तक ऐसा नहीं देखा जब एक व्यक्ति की आवाज़ पर लोग एकजुट दिखें. लोग लॉकडाउन में गए और उन्होंने फ़्रंट पर खड़े लोगों के लिए ताली-थाली बजाई."

अमित शाह के आपातकाल से जुड़ा एक ट्वीट करने पर कांग्रेस ने कहा था कि उनकी पार्टी में अपनी बात रखने के लिए ख़ुद किसी को आज़ादी नहीं है.

इस पर अमित शाह ने कहा, "लोकतंत्र एक व्यापक शब्द है, इन सब दायरों से बाहर निकलकर मैं पूछना चाहता हूं कि बीजेपी में कोई परिवार का आदमी पार्टी अध्यक्ष बना है. इंदिरा गांधी के बाद गांधी परिवार के बाहर का कोई शख़्स अध्यक्ष नहीं बना है."

"आपातकाल को लोगों को याद रखना चाहिए क्योंकि इसने लोकतंत्र की नींव पर हमला किया और इसको लेकर लोगों को जागरुकता रखनी चाहिए. देश के लोकतंत्र पर जो हमला हुआ था उससे जुड़ा मेरा ट्वीट था जो आपातकाल विरोधी था."

भारत-चीन सीमा पर चीनी जवान भारतीय सीमा में आए हैं या नहीं इस सवाल पर अमित शाह बचते दिखे. उन्होंने कहा कि उनका इंटरव्यू सिर्फ़ दिल्ली में कोरोना वायरस की स्थिति पर है इसलिए वो इसी पर ही बोलेंगे.

दिल्ली में कोरोना वायरस पर क्या बोले

गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया के उस बयान का ज़िक्र भी किया जिसमें सिसौदिया ने कहा था कि 31 जुलाई तक दिल्ली में 5.5 लाख संक्रमण के मामले होंगे.

अमित शाह ने कहा कि यह दिल्ली सरकार के अपने आंकड़े होंगे लेकिन 31 जुलाई तक ऐसी नौबत नहीं आएगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के इस फ़ैसले को भी पलटा गया कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में सिर्फ़ दिल्ली के लोगों का इलाज किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला भी लिया गया कि 30 जून तक हर घर का सर्वे किया जाएगा और मास लेवल पर टेस्टिंग बढ़ाई गई है. गृह मंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार की ऑक्सीमीटर, वेंटिलेटर और एंबुलेंस हर चीज़ से मदद की गई है.

एनसीआर के विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय के साथ काम करने पर गृह मंत्री ने कहा कि एनसीआर की पूरी रणनीति तैयार है सब मुख्यमंत्रियों से बात की जाएगी और ढेर सारे फ़ैसले लिए गए हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस लगातार न होने पर उन्होंने कहा कि वो इसी के लिए इंटरव्यू देने बैठे हैं. दिल्ली में कॉम्युनिटी ट्रांसमिशन है या नहीं, इस सवाल पर गृहमंत्री न कहा कि विशेषज्ञों से बात करने पर यह पता चला है कि यह स्थिति अभी दिल्ली में नहीं आई है क्योंकि दिल्ली में रोज़ाना 20,000 टेस्ट हो रहे हैं जिससे मामले पता चल रहे हैं और दिल्ली में घबराने की ज़रूरत नहीं है.

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श्रमिकों के पलायन पर क्या बोले

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि लॉकडाउन के बाद जो सरकार ने कोशिश की उसके बारे में मीडिया ने बताया नहीं. उन्होंने कहा, "11,000 करोड़ रुपये सभी राज्यों को भेजे गए और उनसे श्रमिकों के लिए व्यवस्था करने को कहा गया.

श्रमिकों के लिए अस्पताल और क्वारंटीन सेंटर बनाए गए. प्रधानमंत्री ने ट्रेन चलाने का फ़ैसला लिया और 1 करोड़ 20 लाख से अधिक मज़दूर दूर राज्यों में भेजे गए और पड़ोसी राज्यों के मज़दूर बसों से भेजे गए. बहुत दुख भरे दृश्य आए उसका दुख है."

रोज़गार के सवाल पर उन्होंने कहा कि हाल में एक योजना लागू हुई है और मरनेगा के दिन एवं वेतन बढ़ाए गए हैं, यह एक अस्थाई स्थिति है और परिस्थितियां ठीक होने के बाद लोग अपने पुराने रोज़गार की ओर लौटेंगे और कुछ लोग वापस लौट भी रहे हैं.

म्यांमारः रख़ाइन प्रांत में सेना के 'क्लियेरेंस ऑपरेशन' से फैला डर

रख़ाइन प्रांत

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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ताज़ा हिंसा में दर्जनों लोग मारे गए हैं और दसियों हज़ार को अपना घर छोड़ना पड़ा है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि उत्तरपश्चिमी म्यांमार में लड़ाई तेज़ हुई है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तुरंत क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है.

रख़ाइन प्रांत से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक हज़ारों गांववालों को अपने गांवों को छोड़कर भागना पड़ा है.

सेना ने चेतावनी दी है कि वह बौद्ध विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाने की तैयारी कर रही है. सेना ने इसे 'क्लियेरेंस ऑपरेशन' कहा है.रख़ाइन प्रांत में बौद्ध विद्रोही अधिक स्वायत्ता की मांग कर रहे हैं.

2017 में इसी प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ भी सेना ने अभियान चलाया था. लाखों अल्पसंख्यक रोहिंग्या लोगों को अपना घर छोड़कर पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण लेनी पड़ी थी जहां आज भी वो राहत शिविरों में हैं.

हालांकि सेना के बयान के बाद सरकार ने कहा है कि बौद्ध विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सीमित और छोटा अभियान चलाया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ताज़ा हिंसा में दर्जनों लोग मारे गए हैं और दसियों हज़ार लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है.

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