कोरोनिल: बाबा रामदेव की 'कोरोना वाली दवा' की जाँच होने तक आयुष मंत्रालय ने प्रचार-प्रसार पर लगाई रोक
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Author, प्रशांत चाहल
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की ओर से कोविड-19 की दवा खोज लेने के दावों को लेकर मीडिया में छपी रिपोर्टों पर संज्ञान लिया है और साफ़ तौर पर कहा है कि कथित वैज्ञानिक अध्ययन के दावों की सच्चाई और विवरण के बारे में मंत्रालय को कोई जानकारी नहीं है.
मगर पतंजलि के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण ने इसे 'कम्युनिकेशन गैप' बताते हुए यह दावा किया है कि 'उनकी कंपनी ने आयुष मंत्रालय को सारी जानकारी दे दी है.'
बालकृष्ण ने अपने ट्वीट में लिखा है कि "यह सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन व गौरव देने वाली है. क्लीनिकल ट्रायल के जितने भी तय मानक हैं, उन 100 प्रतिशत पूरा किया गया है."
पतंजलि ग्रुप ने मंगलवार सुबह 'कोरोनिल टैबलेट' और 'श्वासारि वटी' नाम की दो दवायें लॉन्च कीं जिनके बारे में कंपनी ने दावा किया है कि 'ये कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज हैं.'
पतंजलि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थान के संयोजक स्वामी रामदेव ने दावा किया है कि "कोविड-19 की दवाओं की इस किट को दो स्तर के ट्रायल के बाद तैयार किया गया है. पहले क्लीनिकल कंट्रोल स्टडी की गई थी और फिर क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल भी किया जा चुका है."
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आयुष मंत्रालय के सवाल
दवा लॉन्च होने के कुछ ही घंटे बाद आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से कहा कि वो जल्द से जल्द उस दवा का नाम और उसके घटक बताए जिसका दावा कोविड-19 का उपचार करने के लिए किया जा रहा है.
साथ ही मंत्रालय ने यह भी कहा कि पतंजलि संस्थान नमूने का आकार, स्थान, अस्पताल जहाँ अध्ययन किया गया और आचार समिति की मंजूरी के बारे में विस्तृत जानकारी दे.
मंत्रालय के बयान के मुताबिक़ पतंजलि को इस बारे में सूचित किया गया है कि दवाओं के इस तरह के विज्ञापन पर रोक है.
इस तरह के विज्ञापन ड्रग एंड मैजिक रिमेडीज़ (आपत्तिजनक विज्ञापन) क़ानून, 1954 के तहत आते हैं.
कोरोना महामारी को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी निर्देशों में भी इस बारे में साफ़तौर पर कहा गया है और ये आयुर्वेदिक दवाओं के विज्ञापन पर भी लागू होता है.
मंत्रालय ने 21 अप्रैल, 2020 को एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें ये बताया गया था कि आयुष मंत्रालय की देखरेख में कोविड-19 को लेकर शोध अध्ययन कैसे किया जाएगा.
आयुष मंत्रालय ने साफ़ कहा है कि जब तक इन तमाम मामलों की जाँच नहीं हो जाती, इस दवा से जुड़े दावों के बारे में विज्ञापनों पर रोक लगी रहेगी.
इसके साथ ही मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार के लाइसेंसिंग प्राधिकरण से दवा के लाइसेंस की कॉपी माँगी है और प्रोडक्ट के मंज़ूर किये जाने का ब्यौरा भी माँगा है.
वीडियो कैप्शन, बाबा रामदेव ने कोरोना वायरस की दवा कोरोनिल पेश की, मरीज़ों के ठीक होने के दावा
अन्य महत्वपूर्ण विभागों को भी जानकारी नहीं
भारत में कोविड-19 की टेस्टिंग और इस बीमारी के उपचार की रणनीति बनाने के लिए ज़िम्मेदार - भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को भी इस दवा की कोई जानकारी नहीं है.
आईसीएमआर के महानिदेशक प्रोफ़ेसर बलराम भार्गव ने बीबीसी से बातचीत में पतंजलि द्वारा विकसित इन दवाओं के बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया.
उनसे पूछा गया था कि 'क्या कोरोनिल नाम की इस दवा को कोविड-19 के मरीज़ों के इलाज में कारगर कहना सही होगा?' इसके जवाब में प्रोफ़ेसर भार्गव ने कहा, "मैं ऐसी किसी दवा पर टिप्पणी नहीं करना चाहूँगा. पर आईसीएमआर इस दवा से संबंधित किसी भी प्रयास में शामिल नहीं रहा."
भारत सरकार के केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि ''सामान्य परिस्थितियों में एक दवा को विकसित करने, उसके क्लीनिकल ट्रायल पूरे होने और उसकी मार्केटिंग शुरू करने में कम से कम तीन साल तक का समय लगता है. असामान्य परिस्थितियों में इसकी गति बढ़ाई जा सकती है, फिर भी एक नई दवा को बाज़ार में आने में दस महीने से एक साल तक का समय लगता है.''
लेकिन पतंजलि ने कुछ ही हफ़्तों में 'कोरोनिल' नाम की इस दवा को तैयार कर बाज़ार में लाने का 'कारनामा' किया है.
सीडीएससीओ के इस अधिकारी ने नाम ना ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा कि ''उनके विभाग को पतंजलि की इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल की कोई सूचना नहीं थी.''
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पतंजलि के लिए शोध किसने किया?
दवा लॉन्च करने के बाद पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने बीबीसी से बातचीत में यह दावा किया था कि 'उनके संस्थान ने एक थर्ड पार्टी की मदद से क्लीनिकल ट्रायल किये हैं जिनमें पाया गया है कि कोरोनिल का सेवन करने वाले 100 प्रतिशत कोविड-19 के मरीज़ों को राहत मिली.'
यहाँ ये थर्ड पार्टी - जयपुर का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (निम्स) है जो एक निजी विश्वविद्यालय निम्स का हिस्सा है और पिछले एक दशक से भी अधिक समय से शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय है.
जयपुर में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ के अनुसार यह एक स्व-वित्त पोषित संस्थान है और यहाँ विद्यार्थी ना केवल चिकित्सा विज्ञानं बल्कि इंजीनियरिंग, दंत विज्ञान, प्रबंधन और तकनीकी विषयों में भी पढ़ाई के लिए दाखिला लेते हैं.
जयपुर के बाहरी क्षेत्र में जयपुर-दिल्ली राजमार्ग पर निम्स का बड़ा परिसर है और विश्वविद्यालय के अनुसार निम्स को सरकार से मान्यता प्राप्त है.
दवा लॉन्च के समय निम्स के चांसलर डॉक्टर बीएस तोमर स्वामी रामदेव के बगल में ही बैठे थे. पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड का कहना है कि डॉक्टर बीएस तोमर के निर्देशन में ही इस दवा के शोध का काम पूरा हुआ है.
निम्स विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी विनोद सोनी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि "पतंजलि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थान और निम्स विश्वविद्यालय के बीच बीते दो वर्षों से करार है. इसके तहत शोध कार्य होते रहते हैं. जयपुर में कोविड-19 के जो मरीज़ सामने आये हैं, उनमें से कुछ को प्रशासन के कहने पर निम्स में भर्ती किया गया था. उनमें से क़रीब 100 मरीज़ों पर हमने ट्रायल किया जो क़रीब 21 दिन चला. हम उन्हें आयुर्वेदिक दवाएं देते थे. अधिकांश लोग ठीक हुए. हम मानते हैं कि ये हमारी दवाओं का असर है."
पर सरकारी अस्पतालों में क्वारंटीन में रह रहे अधिकांश लोग अपनी इम्युनिटी से ख़ुद ही ठीक हो रहे हैं! इस पर विनोद सोनी ने कहा, "मगर हमारा मत है कि ये लोग आयुर्वेदिक औषधियों से ठीक हुए और यही हमारे दावे का आधार है."
भारत में होम्योपैथी और यूनानी पद्धति में विश्वास रखने वाले भी यह दावा करते हैं कि उनकी पद्धति में कुछ ऐसी दवाएं हैं जो कोविड-19 के असर को कम कर सकती हैं, पर वे अब तक उनकी 100 प्रतिशत सफ़लता की गारंटी देने की स्थिति में नहीं हैं.
लेकिन पतंजलि कंपनी की 100 फ़ीसद सफ़लता की गारंटी ने इस दवा के इर्द-गिर्द एक चर्चा खड़ी कर दी है, वो भी तब, जब पतंजलि की दवाओं को किसी सम्मानित केंद्रीय एजेंसी से अनुमोदन नहीं प्राप्त हुआ है.
पर आचार्य बालकृष्ण दावा करते हैं कि "आयुर्वेद से कोरोना वायरस महामारी का पूर्ण उपचार संभव है."
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.