भारत-चीन सीमा विवाद: दोनों ही पक्ष स्थिति को ठीक से संभाल रहे हैं- चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता

    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने प्रेसवार्ता में भारत के साथ तनाव के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, "कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के ज़रिए, चीन और भारत के बीच हाल के दिनों में प्रभावशाली बातचीत हुई है और भारत-चीन सीमा के पश्चिमी सेक्शन में परिस्थितियों से ठीक से निबटने को लेकर सहमति बनी है."

उन्होंने कहा, "इस वक़्त, दोनों ही देश सीमा पर परिस्थिति को सुधारने के लिए समझौते के तहत क़दम उठा रहे हैं."

प्रेसवार्ता में प्रवक्ता से पूछा गया था कि भारतीय मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि सीमा पर चीन और भारत की सेना के बीच तनाव कम हो रहा है और तीन स्थानों से सेनाएं पीछे हट रही हैं. क्या आप इसकी पुष्टि कर सकते हैं?

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ये तो कहा कि दोनों ही पक्ष स्थिति को ठीक से संभाल रहे हैं लेकिन दोनों ही देशों के बीच तनाव का केंद्र बने पैंगांग झील जैसे स्थानों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.

भारत और चीन के बीच उच्च स्तरीय सैन्य बातचीत के बाद बुधवार को मेजर जनरल स्तर के अधिकारियों के बीच भी वार्ता हुई है.

शनिवार को कॉर्प्स कमांडर स्तर के अधिकारियों के बीच सैन्य तनाव कम करने को लेकर सहमति बन गई थी.

दोनों देशों के बीच जो समझौता हुआ है उसके तहत अभी और बातचीत की जानी है. इस समय भारत-चीन की पश्चिमी सीमा पर कई बिंदुओं पर तनाव है लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में इन बिंदुओं का ज़िक्र नहीं किया है बल्कि सिर्फ़ पश्चिमी सीमा सेक्शन का ज़िक्र किया है.

भारत और चीन के बीच सीमा पर सैन्य तनाव बढ़ने के बाद टकराव की आशंका ज़ाहिर की गई थी लेकिन मंगलवार को ही चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में कहा था कि दोनों देशों के बीच तनाव सैन्य टकराव तक नहीं पहुंचेगा.

भारतीय मीडिया की रिपोर्टों में दावा किया गया था कि चीन के सैनिक भारतीय क्षेत्र में घुस आए हैं. वहीं चीन का कहना था कि भारत ने उसके क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है.

भारत और चीन के बीच लद्दाख में लाइन एफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर सीमा निर्धारित नहीं है. दोनों ही देश एक दूसरे के क्षेत्र में दख़ल का आरोप लगाते रहते हैं.

भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान में कहा था कि चीन के सैनिक अच्छी ख़ासी तादाद में भारतीय सीमा पर आ गए हैं और भारत ने भी बंदोबस्त किया है.

वहीं विपक्षी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी लगातार भारत-चीन सीमा पर तनाव का मुद्दा उठा रहे हैं. बुधवार को किए एक ट्वीट में उन्होंने कहा है कि चीन ने भारत के इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया है जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ामोश हैं.

ऑस्ट्रेलिया ने कहा, चीन के आगे नहीं झुकेंगे

वहीं ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ गया है. गुरुवार को जब ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से पूछा गया कि ऑस्ट्रेलिया कब तक चीन को होने वाले निर्यात में नुक़सान उठाता रहेगा तो प्रधानमंत्री ने कहा कि वो चीन की ओर से किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे.

ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस के स्रोत की अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की थी. इसके बाद से ही चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.

बीते महीने ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ की माँग के बाद डब्ल्यूएचओ की विश्व स्वास्थ्य सभा ने वायरस के स्रोत की चीन में जाँच की माँग को स्वीकार कर लिया था.

मंगलवार को चीन के शिक्षा मंत्रालय ने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया जाकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को इस बारे में फिर से सोचना चाहिए.

ऑस्ट्रेलिया हर साल अंतरराष्ट्रीय छात्रों से 28 अरब डॉलर का कारोबार करता है.

प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा है, "हम खुला व्यापार करने वाले देश हैं, लेकिन मैं कभी भी किसी दबाव के आगे नहीं झुकूंगा, भले ही वो कहीं से भी आए."

हाल के दिनों में चीन ने ऑस्ट्रेलिया से आने वाले मांस पर रोक लगा दी है और जौ पर शुल्क बढ़ा दिया है.

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