मूडीज़ का मूड बिगड़ा, 22 सालों में पहली बार घटाई भारत की रेटिंग - प्रेस रिव्यू
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रेटिंग एजेंसी मूडीज़ इन्वेस्टर्स सर्विस ने सोमवार को भारत की रेटिंग ये कहते हुए घटा दी है कि धीमी आर्थिक वृद्धि के कारण पैदा हुए जोखिम को कारगर तरीके से ख़त्म करने वाली नीतियों को लागू करने में पॉलिसीमेकिंग संस्थाओं के सामने चुनौतियां पेश आने वाली हैं.
अख़बार 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' के अनुसार एजेंसी ने भारत की रेटिंग 'बीएए2' से घटाकर 'बीएए3' कर दिया है. एक बयान जारी कर एजेंसी ने कहा है कि धीमी आर्थिक वृद्धि के कारण जो स्थिति पैदा हुई है उसकी वजह से सरकार की वित्तीय स्थिति बिगड़ सकती है और देश के वित्तीय क्षेत्र में तनाव रह सकता है.
अख़बार के अनुसार, 22 साल पहले भारत के परमाणु परीक्षण करने के बाद मूडीज़ ने 19 जून 1998 में भारत की रेटिंग कम की थी. इसके साथ ही भारत की रेटिंग अब 'एसएंडपी' और 'फिच' की दी गई रेटिंग के बराबर हो गई है. इन दोनों ने भारत को सबसे कम निवेश ग्रेड 'बीबीबी माइनस' में रखा था.
इस ख़बर पर अख़बार 'द इकोनॉमिक्स टाइम्स' ने अपने पहले पन्ने पर कहा है कि 14 साल में पहली बार 2017 में मूड़ीज़ ने भारत की रेटिंग बढ़ाई थी और एक तरह से मोदी सरकार की लाई गई आर्थिक नीति पर मुहर लगाई थी.
हालांकि मूड़ीज़ ने अब कहा है कि मौजूदा स्थिति कोविड-19 महामारी के कारण नहीं है बल्कि आर्थिक सुधारों के कमज़ोर कार्यान्वयन के कारण है. एजेंसी ने कहा है, "आज जारी रेटिंग कोरोना वायरस महामारी के मद्देनज़र है ज़रूर लेकिन ये कोरोना महामारी के असर के कारण नहीं है."
अख़बार के अनुसार एजेंसी ने कहा है कि कोरोना महामारी से पहले भारत की जो क्रेडिट प्रोफ़ाइल बिगड़ी है उसके कारण अर्थव्यवस्था में जोखिम बढ़ा है. 2017 में मूडीज़ ने भारत की रेटिंग 'स्थिर' से 'सकारात्मक' करते हुए कहा था कि जीडीपी, नोटबंदी, नॉन परफॉर्मिंग लोन्स को लेकर उठाए गए कदम, आधार कार्ड, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांस्फर के कारण ऐसा किया जा रहा है.
इससे पहले बीते साल मूडीज़ ने भारत की रेटिंग पर अपने आउटलुक को बदलते हुए इसे 'स्थिर' से 'नकारात्मक' किया था और कहा था कि आर्थिक विकास की स्थिति पहले की तुलना में कम हुई है और सुस्त अर्थव्यवस्था को लेकर जोखिम बढ़ा है.
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हासिल कर लेंगे 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का लक्ष्य - पीयूष गोयल
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर रेल मंत्री और वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि उन्हें इस बात का भरोसा है कि देश 5 ट्रिलियन यानी 50 खरब की इकोनॉमी ज़रूर बनेगी.
वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी तनाव और कुछ देशों और महाद्वीपों के बीच जारी ट्रेड वॉर के बावजूद और पूरे साल अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच भारत अपने लिए रास्ता खोजने में सक्षम था लेकिन अब कोरोना महामारी का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
'द इंडियन एक्सप्रेस' अख़बार को दिए साक्षात्कार में पीयूष गोयल ने कहा कि जनवरी से अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर असर पड़ने लगा था और मार्च में देश में लॉकडाउन लगाया गया जिससे अर्थव्यवस्था को झटका लगा.
गोयल ने कहा. "मैं मानता हूं कि पूरा साल अनिश्चितताओं से भरा रहा लेकिन मुझे यकीन है कि 130 करोड़ जनता की कोशिशों के साथ हम एक आत्मनिर्भर देश बन सकेंगे और अपनी ज़रूरतों को खुद पूरा करने में सक्षम होंगे. मुझे यकीन हैं कि कोरोना महामारी के बाद हम और मज़बूत हो कर निकलेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि आगे बढ़ने के लिए देश अभूतपूर्व कोशिश करे. मुझे लगता है कि हम अब भी 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी ज़रूर बनेंगे लेकिन हो सकता है कि इसमें थोड़ा अधिक वक्त लगे."
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20 लाख वकीलों के सामने रोज़ीरोटी का संकट
लॉकडाउन की वजह से पेशेवर वकीलों के सामने भी रोज़ीरोटी का संकट आ गया है. अंग्रेज़ी अख़ाबर 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' ने इस सिलसिले में पहले पन्ने पर एक रिपोर्ट पब्लिश की है.
अख़बार के मुताबिक़ तकरीबन 20 लाख वकीलों की आजीविका अदालतों में चलने वाली क़ानूनी कार्यवाही पर निर्भर है और लॉकडाउन की वजह से इस देश भर की निचली अदालतें बेहद ही सीमित तरीके से काम कर रही है.
अख़बार का कहना है कि लॉकडॉउन के कारण 20 हज़ार करोड़ रुपये की लीगल प्रैक्टिस इंडस्ट्री संकट का सामना कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लिए कामयाब और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मांग बनी हुई है लेकिन जूनियर वकीलों को ये सहूलियत उस तरह से हासिल नहीं हैं.
बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा, "आपातकालीन परिस्थितियों में थोड़े समय के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअल अदालतों का काम चलाना अपरिहार्य है लेकिन खुली अदालतों में कामकाज जल्द शुरू करना होगा. बड़े शहरों के बाहर ज़्यादातर वकीलों को खाने के लाले पड़ रहे हैं. अदालतों को लंबे समय के लिए बंद नहीं रखा जा सकता है. ज़्यादातर वकीलों के पास न तो कोई काम है और न ही उनकी कोई कमाई रह गई है."
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पाक जासूसों के पास थी भारतीय आर्मी की जानकारी
दिल्ली में जासूसी के आरोप में पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अफ़सरों के पकड़े जाने के बाद पता चला है कि ये दोनों ट्रेनों से ज़रिए सेना की आवाजाही से जुड़ी जानकारी इकट्ठा कर रहे थे.
एक दिन पहले दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने करोल बाग़ के नज़दीक रविवार सवेरे पाकिस्तानी उच्चायोग के तीन अधिकारियों को हिरासत में लिया गया था. बाद में भारत ने इनमें से दो को पर्सोना नॉन ग्राटा यानी अस्वीकृत व्यक्ति घोषित किया और चौबीस घंटों के भीतर हर हाल में भारत से जाने के लिए कहा.
अख़बार 'द हिंदू' में छपी एक ख़बर के अनुसार दिल्ली पुलिस को ख़ुफ़िया एजेंसी से जानकारी मिली थी कि एक पाकिस्तानी एजेंट भारतीय सेना से जुड़ी अहम जानकारी इकट्ठा कर रहा है और वो करोल बाग़ में किसी से मुलाक़ात करने वाला है. इसके बाद पुलिस ने एक योजना बना कर छापा मारा और एजेंट और उससे जानकारी लेने आए व्यक्ति को हिरासत में लिया.
अख़बार के अनुसार ये दोनों पाकिस्तानी उच्चायोग में काम करते थे और उच्चायोग की गाड़ी में ही करोल बाग़ पहुंचे थे.
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गोले प्रत्येक देश में कोरोना वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या दर्शाते हैं.
स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.