कोरोना संक्रमित मांओं ने यहाँ सौ से ज़्यादा बच्चों को जन्म दिया

    • Author, सौतिक बिस्वास
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

मुंबई के लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल अस्पताल में कोरोना से संक्रमित मांओं ने 100 से ज़्यादा स्वस्थ्य बच्चों को जन्म दिया है.

डॉक्टरों ने बताया कि 115 नवजात शिशुओं में से तीन को शुरुआती टेस्ट में कोरोना पॉज़िटिव पाया गया था लेकिन बाद में आई टेस्ट रिपोर्ट में वो निगेटिव पाए गए.

दो संक्रमित गर्भवती महिलाओं की बच्चा पैदा होने से पहले ही मौत हो गई.

मुंबई में संक्रमण के कुल 24,000 मामले अब तक सामने आए हैं और 840 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

संक्रमित महिलाओं में से आधे से ज़्यादा ने ऑपरेशन के माध्यम से बच्चों को जन्म दिया है. इन नवजात शिशुओं में 65 लड़के और 59 लड़कियाँ हैं. डिलीवरी के 22 मामले ऐसे थे जो दूसरे अस्पताल से रेफ़र किए गए थे.

इस बारे में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि इन गर्भवती महिलाओं को घर, बाहर या फिर अस्पताल के वार्ड में संक्रमण हुआ था.

अस्पताल में इन महिलाओं के लिए 40 बेड का विशेष वार्ड तैयार किया गया था. 65 डॉक्टरों और दो दर्जन नर्सों की टीम की देखरेख में इन महिलाओं को रखा गया था.

संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पताल ने गर्भवती महिलाओं के लिए 34 और बेड जोड़ने का फ़ैसला किया है.

इन डिलीवरी में तीन ऑपरेशन थियेटर में आधा दर्जन टेबलों का इस्तेमाल किया गया. डिलीवरी के दौरान नर्स और डॉक्टर पीपीई का इस्तेमाल करते थे.

लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल अस्पताल के प्रसूति रोग विभाग के हेड डॉक्टर अरूण नायक कहते हैं, "हम भाग्यशाली हैं कि ज़्यादातर संक्रमित महिलाओं में संक्रमण के लक्षण बिल्कुल भी नहीं दिख रहे थे. कुछ को बुख़ार था और सांस लेने में तकलीफ़ हो रही थी. हमने उनका इलाज किया और डिलीवरी के बाद वो घर जा सकीं."

"मांएं काफ़ी चिंतित थीं. वो लगातार यह बात पूछ रही थीं कि वो मर सकती हैं लेकिन हम यह कोशिश करें कि बच्चों को कुछ नहीं हो और स्वस्थ्य रहे."

बच्चों के जन्म के बाद मांओं को एक हफ़्ते के लिए विशेष वार्ड में रखा गया था और उन्हें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दिया जा रहा था. इसके बाद उन्हें दस दिनों के लिए एक अलग क्वारंटीन सेंटर में रखा गया था. बच्चों को मांओं से अलग नहीं रखा गया था. मांएं मास्क पहन कर बच्चों को दूध पिलाती थीं. फ़रवरी में चीन के वुहान में एक नवजात शिशु को जन्म के 30 घंटे के बाद ही कोरोना संक्रमित पाया गया था.

दिसंबर के महीने में वुहान में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आया था. मार्च के महीने में शिकागो में कोरोना से संक्रमित एक नवजात की मौत हो गई थी. अमरीका में यह पहली ऐसी मौत थी जो एक साल से कम उम्र के बच्चे की थी. इस महीने की शुरुआत में वेल्स में एक तीन दिन के नवजात की मौत हो गई है. उसकी मां कोरोना पॉज़िटिव थीं.

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडिसिन के शिशु संक्रमण रोग विभाग के डायरेक्टर डॉक्टर एडम रैटनर कहते हैं, "मां से बच्चों को जन्म से पहले या फिर डिलीवरी के समय सांस संबंधी बीमारी के संक्रमण की संभावना बहुत कम होती है."

वो चेतावनी वाले अंदाज़ में कहते हैं, "हालात तेज़ी से बदल रहे हैं और अब इससे संबंधित नए आंकड़े सामने आ सकते हैं."

डॉक्टर रैटनर का कहना है कि अब जो नए आंकड़े सामने आ रहे हैं वो इस तरफ़ इशारा करते हैं कि कोरोना वायरस प्लैसेंटल टिशू में हो सकते हैं.

ऐसी भी रिपोर्टें आ रही हैं कि गंभीर संक्रमण की हालत में गर्भ में भी बच्चों के भ्रूणों की मौत हो रही हैं. डॉक्टर रैटनर इस बारे में कहते हैं कि ये मौतें सीधे संक्रमण के बजाए दूसरी वजहों से भी हो सकते हैं.

वो कहते हैं कि नवजात शिशुओं में 'एंटीबॉडी की प्रतिक्रिया' के लक्षण दिखे हैं जो गर्भ में पल रहे बच्चों में या फिर डिलीवरी के वक़्त संक्रमण के दौरान शुरू हुए हो सकते हैं.

"इन सवालों के पड़ताल करने ज़रूरी हैं और इसके लिए कोरोना से संक्रमित मांओं से जन्म लेने वाले बच्चों की जाँच ज़रूरी है भले ही वो गर्भ में ना संक्रमित हुए हों."

डॉक्टर रैटनर बताते हैं कि उनके अस्पताल में भी कोरोना से संक्रमित मांओं से जन्म लेने वाले बच्चों के कई मामले हैं.

वो कहते हैं, "हम मां का दूध पिलाने की इजाज़त देते हैं लेकिन सुरक्षा का ख्याल रखते हुए ताकि बच्चों को संक्रमण ना हो जाए. जिन नवजातों में संक्रमण के मामले पाए गए हैं, वो आम तौर पर ठीक हो जाते हैं."

मुंबई के लोकमान्य तिलक अस्पताल में संक्रमित मांओं से जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या इसी दौरान जन्म लेने वाले दूसरे बच्चों की तुलना में 20 फ़ीसदी ज़्यादा है.

डॉक्टर नायक बताते हैं, "पिछले हफ़्ते ऐसा वक़्त भी आया जब हम ख़ुद को असहाय महसूस कर रहे थे. 28 साल की एक महिला एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म देकर गुज़र गई. उसका लीवर फेल कर गया था और वो बेसुध हुई जा रही थीं. हमें उस वक़्त लगा कि हम कितने मजबूर हैं. वो लगातार असहाय होकर बोली जा रही थीं क्या कुछ किया जा सकता है?"

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