कोविड-19 आर्थिक पैकेजः निर्मला सीतारमण के ‘नए ढाँचागत सुधार’ आख़िर कितने नए हैं?
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Author, कीर्ति दुबे
पदनाम, फ़ैक्ट चेक टीम
वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण ने पाँच चरणों में 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का पूरा विवरण देश के सामने रखा है. वन नेशन, वन राशन कार्ड के ज़रिए प्रवासी मज़दूरों को उनके काम के ठिकाने पर फ्री अनाज और छोटे-मझोले व्यवसाय के लिए क़र्ज़ में रियायतों के ऐलान किए गए हैं.
'आत्मनिर्भर भारत' पैकेज के तहत बीते शनिवार को किए गए चौथे ऐलान में स्ट्रक्चरल रिफ़ॉर्म यानी संरचनात्मक बदलाव की नीतियों का विवरण सामने रखा गया.
इसमें कोयला खनन को कमर्शियल करने, एविएशन में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) लाना और बिजली सेक्टर में जिस रिफॉर्म का ज़िक्र करते हुए भारत सरकार ने इसे कोविड-19 के आर्थिक पैकेज की तरह पेश किया है जबकि ये सारे सुधार या तो पहले से ही ड्राफ्ट के तौर पर मंत्रालयों में पेश किए जा चुके थे या तो कइयों पर आख़िरी मुहर लगाने पर लंबे समय से विचार चल रहा था.
संक्रमण की हालत जानने के लिए ज़िले का नाम अंग्रेज़ी में लिखें
देखिए कि इन ढाँचागत बदलावों में आख़िर नया क्या है?
खानों का व्यवसायिकरण
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ऐलान - वित्त मंत्री ने सबसे पहले कोयला खादानों को लेकर कहा, "कोयला खादानों को व्यावसायिक खनन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. इसके लिए प्रति टन क़ीमत तय न करके रेवेन्यू के आधार पर दाम तय किए जाएंगे. इससे कोयला के क्षेत्र में हम आत्मनिर्भर बन सकेंगे और कोयले आयात कम हो जाएगा. 50 ऐसे ब्लॉक को आवंटन के लिए उपलब्ध कराया जाएँगा."
हक़ीकत - अक्टूबर, 2014 को भारत सरकार ने एक अध्यादेश जारी करके कोयला खनन पर 41 साल पुराने सरकारी एकाधिकार को तोड़ते हुए प्राइवेट कंपनियों के कमर्शियल माइनिंग का रास्ता साफ़ किया था. कोयला खनन (स्पेशल प्रोविजन) 2014 अध्यादेश के मुताबिक़ ये कंपनियां अपने इस्तेमाल के लिए या बेचने के लिए खनन कर सकती हैं. भारतीय और विदेशी कंपनियां, सरकार और प्राइवेट कंपनियों के वेंचर्स को अध्यादेश के तहत कमर्शियल माइनिंग का अधिकार देने की बात कही गई थी.
इसके बाद साल 2015 में आई इस रिपोर्ट में कहा गया कि केंद्र, राज्य सरकारों को ऐसे कोल ब्लॉक आवंटित करेगी जो इस समय ऑपरेशनल नहीं हैं. इससे निकलने वाला कोयला राज्य सरकार बेच सकेगी या कमर्शियल माइनिंग के लिए खोल सकेगी.
फ़रवरी 2018 में, कोयला खनन (स्पेशल प्रोविजन) 2014 अध्यादेश लाने के चार साल बाद कैबिनेट ने कमर्शियल माइनिंग की बोली लगाने की प्रक्रिया क्या होगी इसके नियम तय किए. इसमें विदेशी और घरेलू दोनों तरह की कंपनियों को बोली लगाने का अधिकार दिया गया. साथ ही, ये भी तय हुआ कि ये कंपनियां कोयले की क़ीमत ख़ुद तय करेंगी, कोयला निर्यात करने की छूट होगी और कंपनियां चाहें तो इसे बाज़ार में बेच भी सकती हैं.
जनवरी, 2020 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खनन और बिक्री के नियमों में ढील दी और इसके साथ ही उन कंपनियों के लिए भी रास्ता साफ़ हो गया जो बिजली, धातु और माइनिंग की इंडस्ट्री से बाहर की हैं यानी कोयला खनन को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने का रास्ता मोदी सरकार के पहले कार्यकाल से ही जारी है. छह साल से इसकी क़वायद जारी है, इसे अब कोविड-19 के आर्थिक पैकेज का हिस्सा बना दिया गया है.
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एविएशन सेक्टर ऐलान में क्या नया है?
'आत्मनिर्भर भारत' पैकेज में एविशन सेक्टर को लेकर भी ढांचागत बदलाव का ऐलान किया गया.
ऐलान- भारतीय एयरस्पेस (वायु क्षेत्र) का लगभग 60 फ़ीसदी हिस्सा ऐसा है जिसे हवाई यातायात के लिए बिना किसी रोक-टोक के इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी एयरलाइन लंबा रास्ता तय कर रही हैं, इससे हवाई यात्राओं में इस्तेमाल होने वाला ईंधन भी ज़्यादा लगता है.
वर्तमान समय में पैसेंजर विमान भारतीय एयरस्पेस का 60 फ़ीसदी हिस्सा ही उड़ान का रास्ता तय करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. 40 फ़ीसदी एयरस्पेस का ऐसा हिस्सा है जहां से पैसेंजर विमानों को उड़ान की मनाही है. ऐसे में कई बार विमानों को सफ़र तय करने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है.
शनिवार को वित्तमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अब एयरलाइन को भारतीय एयरस्पेस के इस्तेमाल से जुड़ी पाबंदियों में ढील दी जाएगी ताकि उड़ानें सरल और कम समय में हो सकें. इससे 1000 करोड़ प्रति साल का फ़ायदा एविएशन सेक्टर होगा. इससे समय की बचत के साथ पर्यावरण पर भी सकरात्मक असर होगा.
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हक़ीक़त - जून, 2019 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एएआई) और अमरीकी एयरक्राफ्ट कंपनी बोइंग के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया. ये एक टेक्निकल असिस्टेंस अग्रीमेंट है जिसका मकसद एयर ट्रैफ़िक मैनेजमेंट का रोड मैप तैयार करना है, ताकि एयरस्पेस का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके. एएआई के चेयरमैन गुरूप्रसाद ने इस समझौते पर समाचार एजेंसी एएनआई से कहा था, "इस तरह की टेक्नॉलजी और ग्लोबल प्रैक्टिस से हम अपनी एयरस्पेस की क्षमता को और बढ़ा सकेंगे. ये भारत को आसमान में और सशक्त बनाएगा."
यानी एयरस्पेस के इस्तेमाल को लेकर वित्त मंत्री ने जो ऐलान किया है उसकी शुरूआत बीते एक साल पहले ही हो चुकी है और ये कोई नई पहल नहीं है.
भारत में कोरोनावायरस के मामले
यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.
राज्य या केंद्र शासित प्रदेश
कुल मामले
जो स्वस्थ हुए
मौतें
महाराष्ट्र
1351153
1049947
35751
आंध्र प्रदेश
681161
612300
5745
तमिलनाडु
586397
530708
9383
कर्नाटक
582458
469750
8641
उत्तराखंड
390875
331270
5652
गोवा
273098
240703
5272
पश्चिम बंगाल
250580
219844
4837
ओडिशा
212609
177585
866
तेलंगाना
189283
158690
1116
बिहार
180032
166188
892
केरल
179923
121264
698
असम
173629
142297
667
हरियाणा
134623
114576
3431
राजस्थान
130971
109472
1456
हिमाचल प्रदेश
125412
108411
1331
मध्य प्रदेश
124166
100012
2242
पंजाब
111375
90345
3284
छत्तीसगढ़
108458
74537
877
झारखंड
81417
68603
688
उत्तर प्रदेश
47502
36646
580
गुजरात
32396
27072
407
पुडुचेरी
26685
21156
515
जम्मू और कश्मीर
14457
10607
175
चंडीगढ़
11678
9325
153
मणिपुर
10477
7982
64
लद्दाख
4152
3064
58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह
3803
3582
53
दिल्ली
3015
2836
2
मिज़ोरम
1958
1459
0
स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
11: 30 IST को अपडेट किया गया
ऐलान - वित्त मंत्री सीतारमण ने विमानों के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ के लिए भारत को ग्लोबल हब बनाने का ऐलान किया. मौजूदा वक्त में एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस और रिपेयरिंग का काम भारत से बाहर होता है. स्ट्रक्चरल रिफॉर्म के बाद में भारत में ये काम हो सके उसके लिए ज़रूरी इकोसिस्टम को खड़ा करने की बात कही गई.
हक़ीक़त - सीतारमण ने 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत को एमआरओ हब बनाने का ऐलान 2019-20 के आम बजट के दौरान किया था. इसका ज़िक्र बजट में विस्तार से मिलता है. उस वक़्त भी इसे भारत के लगातार कमज़ोर होते एविशन सेक्टर को बढ़ाने और मज़बूत बनाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा था.
इस साल मार्च में ही एमआरओ पर लगने वाले जीएसटी दर को 18 फ़ीसदी से घटाकर पाँच फ़ीसदी की स्लैब में रखा गया था. साथ ही इस पर पूरा इनपुट टैक्स क्रेडिट दिया जाएगा. यानी टैक्स भरते समय इस धनराशि को कंपनियां घटा सकेंगी.
हालांकि वित्त मंत्री ने इस बात को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान माना कि इसका बजट के दौरान भी ऐलान किया गया था. लेकिन फिर भी इसे कोविड-19 के दौर में नए स्ट्रक्चरल रिफ़ॉर्म की तरह पेश किया गया. पावर सेक्टर के रिफॉर्म आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत ऊर्जा के क्षेत्र में ढांचागत बदलावों की बात कही गई है.
ऐसा मेडिकल टेस्ट जिससे साबित हो सके कि किसी शख्स को कोरोना वायरस था और अब उसमें कुछ इम्युनिटी आ गई है. यह टेस्ट खून में एंटीबॉडीज का पता लगाता है, जिन्हें बीमारी से लड़ने के लिए शरीर पैदा करता है.
बिना लक्षण वाले
ऐसा शख्स जिसे बीमारी हुई मगर उसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए. कुछ स्टडीज से पता चला है कि कोरोना वायरस का शिकार हुए कुछ लोगों में तेज़ बुखार या कफ़ जैसे आम लक्षण नहीं नज़र आए.
कोरोना वायरस
वायरस समूह में से एक वायरस जिससे मनुष्यों या जानवरों में गंभीर या हल्की बीमारी हो सकती है. पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस से कोविड-19 बीमारी हो रही है. सामान्य सर्दी या इंफ्लूएंजा (फ़्लू) फैलाने वाले दूसरे तरह के कोरोना वायरस हैं.
कोविड-19
कोरोना वायरस की वजह से फैल रही बीमारी का सबसे पहले पता 2019 के अंत में चीन के वुहान में लगा. यह मूलरूप में फ़ेफ़ड़ों पर असर डालता है.
संक्रमण की तेज़ी को रोकना
ट्रांसमिशन की दर को कम करना ताकि चार्ट पर प्रदर्शित किए जाने पर मामलों की संख्या के आधार पर पीक को फ्लैट कर कर्व को नीचे लाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके.
फ़्लू
इंफ्लूएंजा का संक्षिप्त नाम. एक वायरस जो कि सीजनल बीमारियों में मनुष्यों और जानवरों में फैलता है.
सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता
एक बड़ी आबादी तक पहुंचने के बाद किस तरह से एक बीमारी का फैलाव सुस्त पड़ता है.
लड़ने में सक्षम
ऐसा शख्स जिसका शरीर किसी बीमारी के सामने टिक सके या उसे रोक दे वह इससे इम्यून कहा जाता है. एक बार जब कोई शख्स कोरोना वायरस से उबर जाता है तो ऐसा माना जाता है कि वह एक निश्चित अवधि तक इस बीमारी का फिर से शिकार नहीं हो सकता.
वायरस के असर करने की अवधि
किसी बीमारी का शिकार होने और उसका लक्षण दिखाई देना शुरू होने के बीच की अवधि
लॉकडाउन
आवाजाही या रोज़ाना की ज़िंदगी पर पाबंदियां, जिनमें सार्वजनिक इमारतें बंद हैं और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन को कड़े उपायों के तौर पर लागू किया गया है."
शुरुआत
किसी क्लस्टर या अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार से बीमारी के कई मामले सामने आना.
महामारी
किसी गंभीर बीमारी का कई देशों में एकसाथ तेजी से फैलना महामारी कहलाता है.
एकांतवास
किसी संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसकी जद में आए लोगों को अलग रखना.
सार्स
सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक कोरोना वायरस का ही प्रकार है जो कि एशिया में 2003 में शुरू हुआ था.
सेल्फ-आइसोलेशन
घर पर ही रहना और अन्य लोगों से सभी तरह के संपर्क से बचना ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.
सामाजिक दूरी
अन्य लोगों से दूर रहना ताकि बीमारी के ट्रांसमिशन की रफ्तार कम की जा सके. सरकार की सलाह है कि अपने साथ रह रहे लोगों के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से न मिलें. साथ ही सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से भी बचें.
आपातकालीन स्थिति
किसी संकट के वक्त सरकार द्वारा रोज़ाना की जिंदगी पर पाबंदी लगाने के मकसद से उठाए गए कदम. इसमें स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाना और यहां तक कि सैन्य बलों को तैनात करना ताकि रेगुलर इमर्जेंसी सेवाओं को सपोर्ट किया जा सके."
लक्षण
संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की कोशिश के तौर पर इम्यून सिस्टम से किसी बीमारी के संकेत. कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में दिक्कत होना है."
टीका
ऐसा इलाज जिससे शरीर एंटीबॉडीज पैदा करता है, जो कि बीमारी से लड़ता है और आगे के संक्रमण से लड़ने की इम्युनिटी देता है."
वेंटीलेटर
ऐसी मशीन जो कि ऐसे वक्त पर शरीर के लिए सांस लेने का काम करती है जब फ़ेफ़ड़े काम करना बंद करने लगते हैं.
विषाणु
एक छोटा सा एजेंट जो कि किसी जीवित सेल के भीतर अपनी कॉपी बना लेता है. वायरस की वजह से ये सेल मरने लगती हैं और शरीर की सामान्य केमिकल प्रक्रियाओं को अवरुद्ध कर देती हैं जिससे बीमारी हो जाती है.
मुख्य कहानी नीचे जारी है
ट्रांसलेटर
इन सभी शब्दों का क्या मतलब है?
ऐलान - केंद्र शासित राज्यों में बिजली उत्पादन का निजीकरण किया जाए यानी बिजली पैदा करने वाली कंपनियां प्राइवेट होंगी. इससे लोगों को पर्याप्त बिजली मिलेगी और बिजली सप्लाई की कमी का भार ग्राहकों को नहीं ढोना होगा. इंडस्ट्री को इससे बल मिलेगा और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी. इस मॉडल की शुरूआत हम यूनियन टेरेटरी से कर रहे हैं और आशा है कि बाक़ी राज्य भी इसे देखकर अपने राज्य में लागू करेंगे. इससे क्रॉस सब्सिडी भी घटेगी.
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हक़ीक़त - मई 2018 में एक ड्राफ्ट तैयार किया गया जो टैरिफ़ प़ॉलिसी, 2016 में रिफॉर्म की बात करता है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जिन-जिन स्तर पर सुधार की बात कही है वही उपाय इस ड्राफ़्ट में सुझाए गए हैं.
दरअसल ये फ़ैसला इसलिए भी लेना अहम है क्योंकि मौजूगा वक़्त में राज्य की बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों पर 80 हज़ार करोड़ की देनदारी है.
दो साल पहले जिन सुझाव का ड्राफ्ट सरकार के पास पहुंच चुका है उसको लागू करने में दो साल का वक्त लग चुका है. इन तीन सेक्टर में जिस रिफ़ॉर्म का ज़िक्र किया गया है वे सभी या तो सरकार की पहले से जारी पहल है या लंबे वक्त से सरकार की लिस्ट में शामिल रही है. कोविड-19 के वक्त में इनमें से कोई ऐसी नीति नहीं है जो बिलकुल नई हो या जिसका ज़िक्र पहली बार सरकार ने किया हो.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.