लॉकडाउन: कांग्रेस-बीजेपी के बसों के झगड़े में पिस रहे प्रवासी मज़दूर
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Author, कमलेश मठेनी
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश में प्रवासी मज़दूरों को उनके घरों तक पहुंचाने वाली कांग्रेस की बसों का विवाद गहराता जा रहा है.
कांग्रेस की क़रीब 500 बसें राजस्थान उत्तर प्रदेश की सीमा पर खड़ी हैं और दोनों राष्ट्रीय पार्टियां एक-दूसरे पर राजनीति करने का आरोप लगा रही हैं.
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कांग्रेस का आरोप है कि यूपी सरकार बसों को बिना कारण आगे नहीं जाने दे रही जबकि बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस ने बसों की फ़र्ज़ी जानकारी दी है. ऐसी बसों को चलने देना ग़ैर-क़ानूनी होगा.
यूपी सरकार ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का वो प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था जिसमें उन्होंने 1000 बसें मज़दूरों की मदद के लिए भेजने की पेशकश की थी. लेकिन इसके बाद ये मामला क़ानूनी कार्रवाई और सियासत में अटक गया है.
कांग्रेस नेताओं पर एफ़आईआर
कांग्रेस पार्टी का दावा है कि उन्होंने बसें आगरा के पास राजस्थान सीमा पर पहुंचा दी हैं. राज्य सरकार ने बसों को नोएडा और ग़ाज़ियाबाद लाने के लिए कहा था लेकिन अब आगरा से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
अब यूपी सरकार की ओर से कहा आया है कि कई बसों के दस्तावेज़ पूरे नहीं हैं तो कई बसों में ट्रक, ट्रॉली, बाइक और स्कूटर की नंबर प्लेट लगाई गई है. ऐसे में बसों को जाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है.
बसों की ग़लत जानकारियां उपलब्ध कराने के आरोप पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और प्रियंका गांधी वाड्रा के सचिव के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है. अजय कुमार लल्लू को आगरा बॉर्डर पर धरना देने के चलते हिरासत में भी लिया गया था लेकिन उन्हें आगरा में ज़मानत मिल गई थी. उसके बाद उन्हें लखनऊ पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया. अब उन्हें लखनऊ ले जाया गया है.
इसके अलावा गौतमबुद्ध नगर में भी लॉकडाउन के नियम तोड़ने को लेकर कांग्रेस के 50-60 लोगों पर एफ़आईआर की गई है.
गौतमबुद्ध नगर एडीसीपी रणविजय सिंह ने न्यूज़ एजेंसी एएनाई को बताया, “कल हमें किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े 50-60 लोगों के एक्सप्रेसवे पर खड़े होने की जानकारी मिली थी. वो लोग धारा-144 और लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे. 50 लोगों के ख़िलाफ़ संबंधित धाराओं में एफ़आईआर की गई है.”
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इस मामले पर यूपी कांग्रेस के उपाध्यक्ष पंकज कुमार मलिक ने कहा, “बीजेपी के लोग राजनीति कर रहे हैं. हमने कहा है कि हमारी जितनी बसें ठीक हैं कम से कम उन्हें तो जाने की इजाज़त दे दीजिए. हमने इसलिए ज़्यादा बसें भेजी थीं ताकि कुछ में दिक्क़त आ भी जाए तो बची हुई बसें भेज दी जाएं. प्रियंका गांधी ने भी कहा था कि अगर कोई ख़ामी है तो हमें बताएं, हम उनमें सुधार करके भेजेंगे. यूपी सरकार ने ख़ुद 879 बसों की अनुमति दी थी. लेकिन, अब बसें रोक दी हैं.”
पंकज मलिक ने कहा, “हमारी 500 बसें आगरा बॉर्डर पर तैयार खड़ी हैं. ये अनुमति दे दें तो हम एक घंटे में बसें नोएडा-ग़ाज़ियाबाद पहुंचा देंगे. 500 बसें हमने दिल्ली की तरफ़ से दी हैं. लेकिन, हमें रोक रखा है और अब कांग्रेस नेताओं पर एफ़आईआर भी दर्ज कर ली है. हम मिलकर चलना चाहते हैं ताकि मज़दूरों को उनके घर पहुंचाया जा सके. हम बार-बार यही प्रयास करेंगे कि हम मज़दूरों को उनके घर पहुंचा पाएं.”
क्या है पूरा मामला
प्रियंका गांधी ने 16 मई को प्रवासी श्रमिकों के लिए एक हज़ार बसें भेजने की यूपी सरकार से अनुमति मांगी थी. सोमवार को राज्य सरकार ने उन्हें यह कहते हुए इसकी अनुमति दी कि बसों का विवरण चालक और परिचालक के साथ उपलब्ध कराया जाए.
पहले राज्य सरकार को बसों का विवरण ना दिए जाने को लेकर विवाद हुआ. बीजेपी का कहना था कि उन्हें विवरण नहीं मिला जबकि कांग्रेस का कहना था उन्होंने सभी बसों की जानकारियां दे दी हैं.
इसके बाद बसों को लखनऊ लाने के लिए कहा गया. जब कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई तो पाँच-पाँच सौ बसें ग़ाज़ियाबाद और नोएडा के बस अड्डों पर पहुँचाने की अनुमति दी गई.
लेकिन, अब बसें आगरा सीमा पर फँसी हुई हैं. कांग्रेस बसें बेवजह रोकने का आरोप लगा रही है और बीजेपी बसों की ग़लत जानाकिरयां देने का.
क्या कहती है बीजेपी
बीजेपी के राज्य प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने फ़र्ज़ीवाड़ा किया है और सरकार ऐसी बसों में मज़दूरों को बैठाकर उनकी सुरक्षा को ख़तरे में नहीं डाल सकती है.
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राकेश त्रिपाठी ने कहा, “कांग्रेस से बसों की सूची मांगी गई थी जैसे उनके चालक, परिचालकों के नंबर और बसों के फिटनेस के काग़ज़. किसी बस को परिचालन की अनुमति तभी मिलती है जब वो सभी मानकों को पूरा करती हो. लेकिन, कांग्रेस ने जो सूची उपलब्ध कराई उसमें कई बसों के नंबर फ़र्ज़ी हैं, कई गाड़ियों का फिटनेस, आरसी और इंश्योरेंस नहीं है. ऐसी असुरक्षित गाड़ियों में हम उत्तर प्रदेश में किसी को यात्रा करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं. ये ग़ैर-क़ानूनी काम होगा.”
“कांग्रेस इस बात को समझने की बजाए नाटक कर रही हैं और क़ानून का उल्लंघन कर रही है. राज्य सरकार ने बसें लखनऊ लाने के लिए कहा था लेकिन कांग्रेस के अनुरोध पर उन्हें नोएडा ग़ाज़ियाबाद जाने की अनुमति दी गई. लेकिन, अब उनकी बसों में गड़बड़ियां निकल आई हैं तो उन्हें कैसे जाने दे सकते हैं. वह यूपी में अराजकता फैलाना चाहते हैं. हमने इस पर क़ानूनी कार्रवाई भी की है. ये साफ़ है कि कांग्रेस यूपी में राजनीति करना चाहती है. सरकार निस्वार्थ भाव से मज़दूरों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है.”
बसों के ग़लत नबंर पर यूपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा है कि राज्य सरकार ने राजनीति करने के लिए ग़लत नंबर गढ़े हैं. हमने बसों के नंबर दिए थे और हम उन्हें सार्वजनिक कर सकते हैं. आप उसकी जाँच कर लें.
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राजनीति में फंसे मज़दूर
इस पूरे मामले के बीच अब भी मज़दूर पैदल घर जा रहे हैं और बसों का इंतज़ार कर रहे हैं. लेकिन, दोनों पार्टियों की सियासत में मज़दूरों में जगी मदद की उम्मीद कहीं गुम हो गई है.
मज़दूरों पर हो रही इस राजनीति पर हिंदुस्तान टाइम्स की यूपी में सीनियर रेज़िडेंट एडिटर सुनिता एरॉन कहती हैं, “अगर कांग्रेस ने 1000 बसें कही थीं और वो 200 बसें भी दे पा रही थी तो उसे भी स्वीकार करना चाहिए था. जिन बसों में समस्या नहीं है उन्हें चलाया जा सकता है. ये ऐसा समय है जहां कहीं से भी मदद आती है तो उसे अपनाना चाहिए. इसे इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाना चाहिए.”
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बसों को लेकर साफ़तौर पर दोनों दल आमने-सामने आ गए हैं. तीन दिनों से आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं. लेकिन, क्या इसे मामले का इतना बड़ा राजनीतिक फ़ायदा मिल सकता है जितना बड़ा इस पर विवाद हो गया है.
इस पर सुनीता एरॉन कहती हैं कि अगर कांग्रेस ये सोच रही है कि इन बसों के ज़रिए यूपी सरकार की नाकामी दिखाई जा सके तो ये ग़लत है. वहीं, अगर बीजेपी ये सोच रही है कि इससे कांग्रेस को कुछ फ़ायदा होगा, ये सोचना भी ग़लत है. दरअसल, दोनों पार्टियों में अविश्वास है और राजनीति इस स्तर पर चली गई है कि हर मुद्दा उसी से संचालित हो रहा है. इससे चुनाव में किसी को फ़ायदा नहीं होने वाला है. ये सब देखकर लोग बस दुखी हो रहे होंगे कि देश की राजनीति किस स्तर पर पहुंच गई है.
इस बीच प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया है कि कांग्रेस 500 और बसों को भेज रही है. सरकार उनकी भी जाँच कर सकती है.
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वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा लखनऊ पार्टी मुख्यालय नेहरू भवन पर बसों को रोके जाने और प्रदेश अध्यक्ष की ग़ैर-क़ानूनी हिरासत और कांग्रेस नेताओं पर दर्ज किये गए फ़र्ज़ी मुक़दमों के ख़िलाफ़ धरना दिया जा रहा है.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
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अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
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गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.