कोरोना वायरस: सस्ता धमन 1 वेंटिलेटर फेल कैसे हो गया?

    • Author, टीम बीबीसी गुजराती
    • पदनाम, नई दिल्ली

कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों के बीच गुजरात के राजकोट की एक कंपनी के बनाए धमन 1 नाम के सस्ते वेंटिलेटर के नाकाम होने की ख़बरें आ रही हैं.

इस मामले में अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के अधीक्षक ने एक पत्र लिख कर गुजरात मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीएमएससीएल) को जानकारी दी है.

इस पत्र में लिखा गया है कि कोरोना मरीज़ों के इलाज के लिए जीएमएससीएल ने जो धमन 1 और एजीवी वेंटिलेटर सिविल अस्पताल को दिए थे उनका प्रयोग किया गया था लेकिन एनेस्थिसिया विभाग के प्रमुख का कहना है कि कोरोना के मरीज़ों में ये दोनों वेंटिलेटर उम्मीद के अनुरूप सही नतीजे नहीं दे पाए हैं.

पत्र में कहा गया है कि 1,200 बेड वाले कोविद -19 अस्पताल में हाई एंड 50 आईसीयू वेंटिलेटर (वयस्क) की ज़रूरत है वहीं आईकेडीआरसी किडनी अस्पताल में भी 50 वेंटिलेटर आश्यकता है जो तुरंत मुहैया कराए जाएं.

पत्र में ये भी कहा गया है कि गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल के साथ यूएन मेहता अस्पताल में हुई बैठक का भी ज़िक्र किया गया है.

क्या फेल हो गया है धमन वेंटिलेटर?

गुजरात में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और ऐसी हालत में धमन 1 के अपेक्षानुसार काम न करने की ख़बर आने से विवाद खड़ा हो गया है.

कोरोना संक्रमितों और इस वायरस से होने वाली मौतों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र के बाद गुजरात देश में दूसरे नंबर पर है. यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या 11,378 है जबकि इससे मरने वालों आंकड़ा 659 है.

धमन 1 वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनी ज्योति सीएनसी की मीडिया प्रभारी शिवांगी लखानी ने बीबीसी से सहयोगी पत्रकार विपिन टंकारिया को बताया कि "वेंटिलेटर की क्वालिटी के मामले मे कंपनी ने गांधीनगर स्थित इलक्ट्रोनिक्स एंड क्वालिटी डेवेलपमेंट सेंटर से अप्रूवल लिया है. बोर्ड ने गुणवत्ता देख कर ही अप्रूवल दिया है जिसके बाद ही वेंटिलेटर बनाए और बेचे गए."

वो कहती हैं कि मीडिया में आ रही ख़बरें उनके लिए भी चौंकाने वाली हैं. वो कहती हैं, "अब इसमें क्यों त्रुटि बताई जा रही है ये अभी हमें समझ नहीं आया है. हमने ये मशीनें गुजरात सरकार को बेची नहीं हैं बल्कि दान में दी हैं. हमने जितने वेंटिलेटर दिए हैं उनमें कोई समस्या नहीं है."

ज्योति सीएनसी के वेबसाइट के मुताबिक़ कंपनी ने कहा था कि वो कोरोना महामारी का सामना करने के लिए 1,000 वेंटिलेटर बना कर गुजरात सरकार को दान में देगी.

ज्योति सीएनसी ने वेंटिलेटर का जो मॉडल तैयार किया था उसे अहमदाबाद सिविल अस्पताल में प्रयोग के लिए रखा गया था. उस वक़़्त प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी वहां मौजूद थे.

कोरोना मरीज़ों को ध्यान में रख कर बनाया था वेंटिलेटर

उस वक़्त कंपनी की तरफ़ से शिवांगी लखानी ने कहा था, "कोरोना संक्रमित मरीज़ों को ध्यान में रख कर ही धमन 1 वेंटिलेटर बनाया गया है. इस तरह के मरीज़ को प्रेशर बेस्ड वेंटिलेटर की ज़रूरत होती है. धमन 1 में इसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है."

उन्होंने कहा था कि "इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए 25 लोगों की एक टीम ने मिलकर 10 दिन में इस वेंटिलेटर का प्रोटोटाइप मॉडल तैयार किया. इसे अहमदाबाद सिविल अस्पताल में रखा गया था."

"इसके बाद गांधीनगर स्थित इलक्ट्रोनिक्स एंड क्वालिटी डेवेलपमेंट सेंटर में इसकी जाँच करवाई गई और फिर इसे सर्टिफ़िकेट के लिए भेजा गया. इसके बाद उनसे सर्टिफ़िकेट मिलने के बाद इसे अहमदाबाद सिविल अस्पताल में टेस्टिंग के लिए रखा गया था."

"सर्टिफ़िकेट आने के बाद ही गुजरात सरकार ने हमें इसके लिए कहा था. अस्पताल में टेस्टिंग के लिए जो वेंटिलेटर रखे गए थे उनके हमें सकारात्मक नतीजे मिले थे. सिविल अस्पताल के मेडिकल स्टाफ़ ने भी इसका टेस्टिंग किया था."

उनका कहना था, "आम तौर पर बाज़ार में एक अच्छे वेंटिलेटर की क़ीमत पाँच से छह लाख होती है लेकिन धमन 1 की क़ीमत केवल एक लाख रुपये रखी गई थी. ज़रूरतमंद लोगों तक वेंटिलेर पहुंचे इसलिए सप्लायर्स ने रियायत दी है."

कैसे बनाया गया था धमन 1?

कोरोना के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति से निबटने के लिए अहमदाबाद के ज़िला कलेक्टर ने इलाक़े से सभी बिज़नेसमैन से एक बैठक की थी. इस दौरान ज्योति सीएनसी के मुख्य प्रबंध निदेशक पराक्रम सिंह जडेजा भी शामिल थे.

उस बैठक में कहा गया था कि आने वाले वक़्त में अधिक वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ेगी. इसके बाद इस बात को ध्यान में रखते हुए कि देश में अधिकतर वेंटिलेटर विदेश से आयात किए जाते हैं, ज्योति सीएनसी ने देश में ही वेंटिलेटर बनाने का फ़ैसला किया.

शिवांगी लखानी ने अब कहा है कि "ज्योति सीएनसी मेडिकल वस्तुएं सप्लाई करती है. धमन 1 इसका पहला वेंटिलेटर हैं और इस पर अभी संशोधन चल रहा है."

लेकिन अब धमन के नतीजे अपेक्षारूप न आने के अस्पताल के दावे के बाद इस मुद्दे पर विवाद छिड़ गया है.

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