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कोरोना वायरस: भारत के फल और सब्ज़ी बाज़ार बन रहे हैं हॉटस्पॉट
- Author, अपर्णा अल्लूरी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाँच मई को दक्षिण भारत में तैनात ज़िलाधिकारी भरत गुप्ता को पता चला कि चेन्नई का विशाल कोयमबेडु बाज़ार अस्थायी रूप से बंद किया जा रहा है.
कारण था:-बाज़ार में कई विक्रेता और मज़दूर कोरोना वायरस पॉज़िटिव पाए गए थे. इन मज़दूरों और छोटे विक्रेताओं को चेन्नई और इससे सटे इलाक़ों में कोरोना संक्रमण फैलने से जोड़कर देखा जा रहा था.
भरत गुप्ता को इस बाज़ार के बारे में अच्छी तरह पता था क्योंकि उनके ज़िले चित्तूर (आंध्र प्रदेश) से किसान रोज़ ट्रकों में टमाटर भरकर कोयमबेडु भेजते थे. चूंकि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश पड़ोसी राज्य हैं इसलिए दोनों के बीच सब्ज़ियों का ये व्यापार नियमित रूप से होता आया है.
ज़िलाधिकारी भरत गुप्ता इस बात से और घबरा गए कि सब्ज़ियां लेकर आने वाले इन ट्रकों को स्थानीय लोग चलाते हैं और उनके साथ कई दूसरे लोग भी होते हैं. जैसे कि ख़लासी या सफ़ाई में मदद करने वाला शख़्स, जो बिकने वाली सब्ज़ियों का पैसा इकट्ठा करते हैं. ये लोग हर शाम सात बजे के लगभग चित्तूर से निकलते हैं और अगले दिन दोपहर तक वापस आते हैं.
छह मई को चित्तूर के अधिकारियों ने उन सभी लोगों की टेस्टिंग शुरू कर दी जो 20 अप्रैल या उसके बाद कोयमबेडु बाज़ार में गए थे. कोयमबेडुर बाज़ार में सब्ज़ियां सप्लाई करने वाले आंध्र प्रदेश के अन्य ज़िलों ने भी ऐसा ही किया.
बुधवार तक चित्तूर में कोविड-19 संक्रमण के 43 नए मामले दर्ज किए गए. इनका सम्बन्ध कोयमबेडु बाज़ार से हो सकता है.
केयमबेडु बाज़ार बना 'सुपर स्प्रेडर'
इस बीच तमिलनाडु के 2,000 से ज़्यादा कोरोना संक्रमण मामलों को कोयमबेडु बाज़ार से जोड़कर देखा जा रहा है. इस बाज़ार से जुड़े मामले राज्य में संक्रमण के कुल मामलों के एक तिहाई से भी ज़्यादा हैं.
भारत में कोविड-19 संक्रमण के 85 हज़ार से ज़्यादा मामले हैं. देश में पिछले दो महीनों से लॉकडाउन है लेकिन इस दौरान किराने की दुकानें, फल और सब्ज़ियों के बाज़ार आंशिक रूप से खुले रहे हैं क्योंकि इन्हें ‘ज़रूरी सामानों’ की श्रेणी में रखा गया है.
अब इन्हीं बाज़रों में से एक, भारत के सबसे बड़े सक्रिय क्लस्टर का स्रोत बन गया है. कोयमबेडु संक्रमण मामला इतना आगे बढ़ गया है कि इससे देश की खाद्य आपूर्ति कड़ी बाधित होने का ख़तरा है.
ये जानकर हैरानी नहीं होनी चाहिए कि इस पूरी घटना ने लोगों में ग़ुस्सा भड़का दिया है और ‘दोषी’ कौन है, इस पर चर्चा छिड़ गई है. लेकिन इससे यह भी साफ़ हुआ है कि भारत के भीड़भाड़ वाले बाज़ारों को नियंत्रित करना कितना मुश्किल है. ख़ासकर, फलों और सब्ज़ियों के बाज़ार में तो फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग किसी ख़्वाब सा है.
किसने किसको संक्रमित किया?
चेन्नई के बीचो-बीच स्थित कोयमबेडु बाज़ार एशिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है.
यहां थोक और फुटकर दुकानों में अनाज, फल, सब्ज़ियां और फूल बिकते हैं. रोज़ लाखों लोग इस बाज़ार में आते हैं. इसके अलावा बाज़ार में ट्रक ड्राइव और दिहाड़ी मज़दूर भी आते हैं.
चेन्नई सिटी कॉर्पोरेशन के अधिकारी डी कार्तिकेयन कहते हैं, “हमने पर्याप्त सतर्कता बरती है. जब कोई महामारी आती है तो यह शहर में हर जगह फैलती ही है.”
अपनी कोशिशों का उदाहरण देते हुए वो बताते हैं कि बाज़ार में पहले 24 संक्रमण के मामले 24 अप्रैल को सामने आए थे. यानी लॉकडाउन लागू होने के एक महीने बाद.
सबसे पहले 54 साल की एक सब्ज़ी विक्रेता के संक्रमित होने का पता चला था जो पुलियन्तोप्पु जैसी घनी आबादी वाली बस्ती में रहती थीं. पुलियन्तोप्पु चेन्नई में संक्रमण का हॉटस्पॉट है.
डी. कार्तिकेयन कहते हैं, “ये साफ़ नहीं है कि महिला ने बाज़ार में आने वाले लोगों को संक्रमित किया या वो ख़ुद उनसे संक्रमित हुईं. ये मुर्गी और अंडे वाली कहानी जैसा है.पहले क्या आया?”
संक्रमण की लंबी कड़ी
कार्तिकेयन का कहना है कि सब्ज़ी बेचने वाली महिला ने उन्हें उन 45 लोगों तक पहुंचाने में मदद की जो कोरोना पॉज़िटिव थे. इनमें से चार लोग इसी बाज़ार में काम करते थे. इसके बाद बाज़ार के बाहर दुकान चलाने वाले एक नाई कोरोना पॉज़िटिव पाया गया.
कार्तिकेयन बताते हैं, “उस नाई ने 100 से ज़्यादा लोगों के बाल काटे थे. उनमें से 25 लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं. इनमें 20 वो दिहाड़ी मज़दूर हैं जो बाज़ार में काम करते हैं.”
इसके बाद कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और टेस्टिंग का दूसरा दौर शुरू हुआ. इसमें ट्रक ड्राइवरों, सामान चढ़ाने-उतारने वाले दिहाड़ी मज़दूरों, फल, सब्ज़ी और फूल बेचने वालों का टेस्ट किया गया.
चेन्नई और पूरे तमिलनाडु में उन लोगों का टेस्ट किया गया जो बाज़ार में सामान-बेचने या खरीदने आते हैं. इसके साथ ही उन लोगों का भी टेस्ट किया गया जो साथ में रिक्शे या बस से सफ़र करते हैं. और सभी लोगों ने अधिकारियों को अपने परिजनों और संपर्क में आने वाले लोगों से मिलवाया.
कोयमबेडु से संक्रमण मामले आने के बाद तमिलनाडु और चेन्नई में संक्रमण लगातार बढ़ा है.
इस दौरान चेन्नई से सटे चेंगलपट्टु और तिरुवल्लूर ज़िलों में भी सैकड़ों नए मामले सामने आए है. कडलूर ज़िले में कोयमबेडु बाज़ार में काम करने वाले 114 लोग महज एक दिन में कोरोना पॉज़िटिव पाए गए.
कडलूर चेन्नई से 200 किलोमीटर दूर है. एक अन्य ज़िले, अरियलूर में 80 फ़ीसदी संक्रमण के मामले कोयमबेडु बाज़ार से जुड़े हैं. यहां भी बहुत से कोरोना संक्रमित लोग दिहाड़ी मज़दूर हैं. आंध्र प्रदेश के सात ज़िलों में शुक्रवार को कुल 28 लोग कोविड-19 पॉज़िटिव पाए गए. ये सभी कोयमबेडु बाज़ार में गए थे.
आठ मई को तमिलनाडु के अधिकारियों ने कहा था कि राज्य में कोरोना के 1,589 मामले कोयमबेडु बाज़ार से जुड़े हैं. अगले ही दिन यह संख्या 1,867 पहुंच गई थी.
इस पूरे मामले के बाद अब तमिलनाडु 10 हज़ार से भी ज़्यादा संक्रमण मामलों के साथ भारत के उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं.
अब एक सवाल सबके मन में है: ये बाज़ार बंद क्यों नहीं किया गया.
ग़लती किसकी है?
डी कार्तिकेयन कहते हैं कि बाज़ार बंद करने से बहुत से बड़ी संख्या में किसानों और मज़दूरों की रोजी-रोटी प्रभावित होती.
उन्होंने कहा, “पूरे चेन्नई और आस-पास के इलाकों के लिए ये बाज़ार अकेला फ़ूड सप्लाई लिंक है. यहां रोज़ लगभग 5,000 टन फलों और सब्ज़ियों का कारोबार होता है. रोज़ लगभग 400 ट्रक इस बाज़ार में आते हैं.”
यानी स्पष्ट ख़तरों के बावजूद बाज़ार खुला रहा.
कार्तिकेयन कहते हैं कि उन्होंने बाज़ार में भीड़ करने के लिए कई कोशिशें की. उन्होंने कई दुकानों को शहर के अलग-अलग जगहों पर शिफ़्ट करने का प्रस्ताव रखा लेकिन व्यापारियों ने इससे इनकार कर दिया.
अप्रैल के आख़िर में तमिलनाडु ने तीन दिनों के लिए ज़्यादा कड़े लॉकडाउन का ऐलान किया था और बड़ी संख्या में लोग बाज़ारों में सामान इकट्ठा करने के लिए जुटे थे.
कोयमबेडु के दुकानदारों ने बीबीसी तमिल सेवा को बताया कि 25 अप्रैल को हज़ारों लोग बाज़ार में आए थे और भीड़ इतनी थी कि ‘हिलने की जगह भी नहीं थी’.
28 अप्रैल को सरकार ने सभी रीटेल दुकानें बंद करा दीं और फल, सब्ज़ी और फूलों की दुकानें शहर के दूसरे जगहों पर शिफ़्ट करा दीं. सिर्फ़ थोक दुकानों को ही खुले रहने की अनुमति थी. लेकिन फिर 30 अप्रैल को तीन दिन का लॉकडाउन ख़त्म हुआ और बाज़ार में भारी भीड़ इकट्ठा हुई.
कार्तिकेयन बताते हैं कि संक्रमण के मामले लगातार बढ़ने के बाद आख़िरकार अधिकारियों को बाज़ार ‘जबरन’ बंद कराना पड़ा. हालांकि व्यापारी इस फ़ैसले से ख़ुश नहीं थे.
'बाज़ारों में फ़िजिकल डिस्टेंगिंग यानी सपना'
साफ़-सफ़ाई की बहुत कोशिशों के बाद भी दिल्ली की आज़ादपुर मंडी और चेन्नई के कोयमबेडु जैसे बाज़ारों के ‘सुपर स्प्रेडर’ बनने का ख़तरा है.
अधिकारियों ने कुछ दुकानों को दूसरे बाज़ार में शिफ़्ट किया है लेकिन कारोबारी कोयमबेडु बाज़ार को खोले जाने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि नए बाज़ार में सिर्फ़ कुछ सौ दुकानें ही खोली जा सकती हैं.
कोयमबेडु सब्ज़ी विक्रेता संघ के प्रमुख जीडी राजशेखर ने बीबीसी से कहा, “लॉकडाउन के 40 दिनों के दौरान बाज़ार खुला रखना एक ग़लती थी. मैंने अधिकारियों को कई सलाहें दी थीं लेकिन उन्होंने हमें सुनने से इनकार कर दिया था.”
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीसामी ने संक्रमण फैलने के लिए व्यापारियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कारोबारियों पर सरकारी नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया है.
वहीं, व्यापारियों का कहना है कि शहरों के बड़े बाज़ार ऐसे नहीं बनाए गए हैं कि वहां फ़िज़िकल डिस्टेसिंग नियमों का पालन किया जा सके.
दिल्ली की आज़ादुपर मंडी के व्यापारी संघ के सचिव राज कुमार भाटिया का भी मानना है कि ऐसे बाज़ारों में फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा सकता.
क्या ये ख़तरा मोल पाएगी दिल्ली?
एशिया की सबसे बड़ी आज़ादपुर सब्ज़ी मंडी में रोज़ लाखों टन फलों और सब्ज़ियों का कारोबार होता है. लेकिन जल्दी ही ये चिंता का विषय बन गया क्योंकि यहां आने वाले 31 लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए.
कुछ ख़बरों में कहा गया कि पड़ोसी राज्य हरियाणा में कोविड-19 के बढ़ते मामले भी आज़ादपुर मंडी से जुड़े हैं.
आज़ादपुर मंडी में सब्ज़ियों और फलों का दाम तय करने के लिए रोज़ सुबह छह बजे से दोपहर तक बोली भी लगती है. इन सबसे संक्रमण फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है.
भाटिया कहते हैं, “हमें बोली लगाने के लिए एकसाथ लोगों की ज़रूरत पड़ती है लेकिन वायरस के डर से विक्रेता और सप्लायर मंडी से दूर हैं. यहां 28 हज़ार दुकानें हैं लेकिन सामान सिर्फ़ 1,000 के लिए आ पा रहा है.”
फलों और सब्ज़ियो की सप्लाई पहले से ही कम हो रही है. ऐसे में आज़ादपुर मंडी को बंद करने पर वैसा ही हंगामा होगा जैसा कोयमबेडु बाज़ार बंद होने पर हुआ था.
लेकिन क्या दिल्ली इसे खुला रखने का ख़तरा मोल पाएगी?
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(बीबीसी तमिल सेवा के मुरलीधरन काशीविश्वनाथन ने इस रिपोर्ट में सहयोग किया है.)
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