बिहारी मज़दूरों के ट्रेन किराए पर केजरीवाल और नीतीश सरकार आमने-सामने: प्रेस रिव्यू

बिहार की नीतीश कुमार सरकार और दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के बीच शनिवार को प्रवासी मज़दूरों के ट्रेन किराए को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो गई.

द हिंदू अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ लॉकडाउन की वजह से फंसे बिहारी मज़दूरों के ट्रेन किराए के मसले पर दोनों राज्य सरकारों के मंत्री विवाद में उलझ गए.

विवाद की शुरुआत उस वक़्त हुई जब शुक्रवार को दिल्ली सरकार के श्रम मंत्री गोपाल राय ने ट्वीट किया, "श्रमिकों को लेकर दिल्ली से मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार के लिए रवाना हुई ट्रेन. ट्रेन में सवार सभी 1200 लोगों का किराया देगी अरविंद केजरीवाल सरकार."

गोपाल राय के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार सरकार के जलसंसाधन मंत्री और जेडीयू नेता संजय झा ने दिल्ली सरकार पर ट्रेन किराए को लेकर 'सस्ती लोकप्रियता वाली राजनीति' करने का आरोप लगाया.

संजय झा एक चिट्ठी शेयर किया और कहा कि दिल्ली सरकार ने बिहार सरकार से मज़दूरों के किराए के नाम पर साढ़े छह लाख रुपए मांगे थे.

उन्होंने कहा, "अरविंद केजरीवाल जी! झूठ के साथ समस्या यही है कि आप भूल जाते हैं कि कब क्या बोल चुके हैं? अब देखिए न, आपके मंत्री गोपाल राय ट्विटर पर सफ़ेद झूठ बोल रहे हैं कि दिल्ली से मुज़फ्फरपुर आने वाली ट्रेन का किराया आपकी सरकार देगी, फिर चिट्ठी भेजकर हमसे पैसे भी मांगते हैं."

पर बात यही ख़त्म नहीं हुई. गोपाल राय ने संजय झा का जवाब देते हुए शनिवार को ट्वीट किया, "ये सच है कि दिल्ली सरकार ने बिहार सरकार को चिट्ठी लिखा था. ये भी सच है कि कल दिल्ली सरकार ने 1,200 श्रमिकों का किराया रेलवे को देकर उन्हें मुजफ्फरपुर के लिए रवाना कर दिया. लेकिन ये भी सच है कि बिहार सरकार की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया."

उधर, इस बहस पर प्रशांत किशोर का कहना है, "रेलवे 85% सब्सिडी दे रहा है. केंद्र पैसे ले नहीं रहा और राज्य तो किराए के साथ कई और सुविधाएँ देने का दावा कर रहे हैं. अब तो विडम्बना ये कि विपक्ष ने भी सबका किराया देने की बात कही हैं. अगर सबलोग इतना कुछ कर रहे हैं तो मज़दूर इतने बेबस क्यों हैं और उनसे ये पैसे ले कौन रहा है?"

कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर डोभाल की मीटिंग

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया.

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार अजित डोभाल ने सेना और अर्धसैनिक बलों के शीर्ष अधिकारियों से नियंत्रण रेखा के रास्ते चरमपंथियों की घुसपैठ को रोकने के इंतज़ाम को और सख़्त करने के लिए कहा है.

उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा, बारामूला और सोपोर इलाक़े में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने के मद्देनज़र ये उच्चस्तरीय बैठक हुई थी.

इस इलाक़े में एक कर्नल रैंक के अधिकारी समते छह सैनिकों की मौत हुई है. इसी क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने लश्कर के बड़े कमांडर हैदर का ख़ात्मा किया.

अख़बार के मुताबिक़ एक ख़ुफ़िया अलर्ट पहले ही जारी की गई थी कि चरमपंथी गुट जैश-ए-मोहम्मद सेना और अर्धसैनिक बलों के ठिकानों पर सोमवार को फिदायीन हमले कर सकता है.

वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि अजीत डोभाल ने भारत की पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तानी वायु सेना की बढ़ी हुई गतिविधियों पर भी चर्चा की.

इससे पहले प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत पर आरोप लगाया था कि वो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया सैनिक कार्रवाई करने के लिए बहाने खोज रहा है.

अमित शाह और ममता बनर्जी के बीच विवाद

प्रवासी मज़दूरों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि प्रवासी मज़दूरों की घर वापसी के लिए ज़रूरी व्यवस्था करने में पश्चिम बंगाल की सरकार नाकाम रही है.

इस पर ममता बनर्जी ने गृह मंत्री पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है.

गृह मंत्रालय का कहना है कि पश्चिम बंगाल के प्रवासी मज़दूर अन्य राज्यों में फंसे हुए हैं और घर वापस लौटना चाहते हैं. जहां वे रह रहे हैं, वहां की राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने ज़रूरी इंतजाम किए हैं लेकिन पश्चिम बंगाल की सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

इससे पहले बंगाल में कोरोना संक्रमितों की संख्या को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद हो चुका है. केंद्र सरकार ने ये आरोप लगाया था कि राज्य सरकार सेंट्रल टीम के साथ सहयोग नहीं कर रही है.

बैंकों के साथ एक और धोखाधड़ी

रामदेव इंटरनेशनल के तीन प्रवर्तकों के ख़िलाफ़ सीबीआई ने हाल ही में केस दर्ज किया है.

अमर उजाला अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ कंपनी के प्रमोटर्स पर आरोप है कि उन्होंने छह बैंकों की कंसोर्शियम को 411 करोड़ का नुक़सान पहुंचाया.

अधिकारियों ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने के पहले ही राम देव इंटरनेशनल के प्रवर्तक देश छोड़कर जा चुके थे.

इस कंसोर्शियम में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के अलावा कैनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, आईडीबीआई, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया और कॉर्पोरेशन बैंक शामिल थे.

राम देव इंटरनेशनल के प्रमोटर्स बासमती चावल के निर्यात से जुड़े हुए थे.

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