कोरोना: सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर छत्तीसगढ़ में शराब की 'होम डिलीवरी'

    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से

छत्तीसगढ़ सरकार ने सोमवार से शराब की 'होम डिलीवरी' यानी घर पहुंचाने की सेवा शुरू करने का फ़ैसला लिया है.

इसके लिये प्लेसमेंट एजेंसियों से 'डिलीवरी ब्वॉय' की भी नियुक्ति करने के आदेश जारी किये गये हैं.

राज्य के आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कहा, "कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना ज़रूरी है. इसलिये हमने शराब की घर पहुंचाने की सेवा का फ़ैसला लिया है. फ़िलहाल यह सेवा बड़े शहरों में लागू की जायेगी."

कवासी लखमा के अनुसार ग्राहक अपनी पसंद की शराब का आर्डर मोबाइल फ़ोन से दे सकेंगे. इसके बाद सरकार न्यूनतम डिलीवरी शुल्क लेकर उनके घर तक शराब पहुंचाने का काम करेगी.

राज्य सरकार ने मार्च से बंद शराब दुकानों को भी सोमवार से खोलने का फ़ैसला लिया है. अभी तक एक व्यक्ति को इन दुकानों से 2 बोतल से अधिक शराब ख़रीदने पर पाबंदी थी.

लेकिन सरकार के नये फ़ैसले के अनुसार कोई भी ग्राहक अब 6 बोतल शराब ख़रीद सकता है.

इसके अलावा शराब दुकानों को सुबह से ही खोले जाने का फ़ैसला भी लिया गया है. सरकार के नये फ़ैसले के अनुसार अब सुबह आठ बजे से शाम 7 बजे तक शराब की बिक्री होगी.

इधर, राज्य सरकार के इस फ़ैसले का विरोध भी शुरू हो गया है.

असल में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी शराबबंदी को लेकर लगातार आवाज़ उठाती रही है. विपक्ष में रहते हुये भूपेश बघेल ने शराबबंदी को लेकर कई बड़े प्रदर्शन किये थे.

यहां तक कि कांग्रेस पार्टी ने चुनाव के समय राज्य में शराबबंदी लागू करने की घोषणा भी की थी.

लेकिन राज्य में 2018 में सत्ता में आने के बाद से कांग्रेस पार्टी की सरकार ने शराबबंदी के मामले में एक अध्ययन समिति बना कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

आज की तारीख़ में राज्य में देशी शराब की 337 और विदेशी शराब की 313 दुकानें हैं, जिनका संचालन राज्य सरकार ही करती है. देश में प्रति व्यक्ति शराब की खपत के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल है.आंकड़ों में देखें तो 2018-19 में राज्य सरकार को शराब बिक्री से 4700 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला था. छत्तीसगढ़ उन राज्यों में रहा है, जिन्होंने केंद्र सरकार के आदेश से पहले ही लॉकडाउन घोषित कर दिया था.

हालांकि इसके बाद भी राज्य में शराब बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई थी.

लेकिन जब इसे लेकर विरोध शुरू हुआ तो राज्य सरकार ने 23 मार्च से शराब दुकानों को बंद करने का फ़ैसला लिया.अब जबकि राज्य में सोमवार से सरकारी कार्यालयों में कामकाज शुरू किये जा रहे हैं, तब शराब दुकानों को भी खोला जा रहा है. लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर शराब की घर पहुंचाने की सेवा को लेकर अभी से सवाल उठने लगे हैं.

भाजपा विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा, "छत्तीसगढ़ में शराब को प्रोत्साहित करने के लिये राज्य सरकार ने शराब की घर पहुंचाने की सेवा शुरू करने का फ़ैसला लिया है. यह अत्यंत ही आपत्तिजनक है. सरकार को इस फ़ैसले को वापस लेना चाहिये."

धरमलाल कौशिक ने कहा कि लॉकडाउन में लोगों की शराब की आदत छूट गई है. ऐसे में शराबबंदी का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी को इसकी पहल करनी चाहिये.

कौशिक ने कहा, "यह महात्मा गांधी का जन्म शताब्दी वर्ष है. सरकार चाहे तो इस अवसर का लाभ उठा कर शराबबंदी कर सकती है. इसका कार्यान्वयन का इससे बेहतर अवसर नहीं होगा."

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