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कश्मीर की हालत स्थिर लेकिन नाज़ुक, LoC पर हलचल-लेफ़्टिनेंट जनरल बीएस राजू-प्रेस रिव्यू
भारतीय सेना की सबसे प्रतिष्ठित चिनार कोर की कमान संभालने वाले लेफ़्टिनेंट जनरल बीएस राजू का कहना है कि कश्मीर में मौजूदा हालात स्थिर है लेकिन नाजुक हैं.
यह बात उन्होंने अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कही.
एलओसी के पास स्थिति के बारे में पूछने पर लेफ़्टिनेंट जनरल राजू ने कहा कि हाल के दिनों में नियंत्रण रेखा पर उथल-पुथल बढ़ी है क्योंकि आतंकवादी पाकिस्तानी सेना की मदद से भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान पिछले कई दशक से आतंकवादियों की फ़ंडिंग और सीमापार घुसपैठ में उनकी मदद करता आ रहा है. पीओके के सभी आतंकी कैंप और लॉन्च पैड भरे हुए हैं. हमने घुसपैठ की कई कोशिशें नाकाम की हैं और पाकिस्तानी सेना इन आतंकियों की मदद के लिए लगातार सीज़फ़ायर का उल्लंघन कर रही है. हमने इन उल्लंघनों का त्वरित और माकूल जवाब दिया है."
कश्मीर घाटी में आंतरिक सुरक्षा के महौल के बारे में पूछे जाने पर लेफ़्टिनेंट जनरल ने कहा कि कश्मीर की वर्तमान स्थिति स्थिर लेकिन नाजुक है. उन्होंने कहा, "सभी सुरक्षाबलों का प्रमुख मक़सद शांति बनाए रखना ही है और इसके लिए हम सब मिलकर काम कर रहे हैं. सुरक्षाबलों की कार्रवाई की वजह से ही यहां हालात लगभग सामान्य बने हुए हैं."
बीएस राजू ने कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में उन्हें कश्मीर की जनता से काफ़ी सहयोग मिला है. उन्होंने कहा, "कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग में हमें कश्मीरी अवाम से अभूतपूर्व समर्थन मिला है."
कश्मीर: प्रशासन ने कहा, 4जी इंटरनेट नहीं दे सकते
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि घाटी में इंटरनेट का इस्तेमाल 'आतंकी गतिविधियों' को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है.
बुधवार को प्रशासन ने कश्मीर में इंटरनेट सेवा को 2जी तक सीमित करने के अपने फ़ैसले को सही बताया और कहा कि 'इंटरनेट एक्सेस मूलभूत अधिकार नहीं है.'
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एक याचिका का जवाब देते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कहा कि 'अभिव्यक्ति की आज़ादी संविधान में वर्णित मूल अधिकार है लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवा बाधित की जा सकती है."
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कश्मीर में 4जी इंटरेनट सेवा की बहाली की अपील की गई थी.
प्रशासन ने हलफ़नामा दायर कर अपना पक्ष रखते हुए कहा, "10 जनवरी के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद से कश्मीर में सोशल मीडिया पर लगी हर तरह की पाबंदी हटा ली गई है लेकिन अगर इंटरनेट स्पीड 2जी तक सीमित नहीं रखी गई तो इसका इस्तेमाल अफ़वाह, फ़ेक न्यूज़ और हैवी फ़ाइल्स के ट्रांसफ़र के लिए किया जा सकता है. हाऊ स्पीड इंटरनेट का इस्तेमाल आतंकी संगठनों द्वारा हमलों को अंजाम देने के लिए भी किया जा सकता है."
यह हलफ़नामा जम्मू-कश्मीर के गृह सचिव शालीन काब्रा ने दायर किया. उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी आतंकी संगठन इंटरनेट के ज़रिए कश्मीरी युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने के लिए भड़का रहे हैं. लेकिन 2जी स्पीड के इंटरनेट से इसकी आशंका कम हो जाती है."
गांवों में कोरोना संक्रमण के कम मामले
हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के जो इलाक़े कोरोना वायरस संक्रमण से अछूते हैं, उनमें से अधिकतर ग्रामीण हैं.
अख़बार लिखता है कि ज़्यादातर ग्रीन ज़ोन वाले इलाके गांवों में है और इसलिए तीन मई के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में लॉकडाउन से छूट मिलने की उम्मीद है.
केंद्र सरकार ने देश के 170 ज़िलों को कोविड-19 संक्रमण का हॉटस्पॉट घोषित किया था. हॉटस्पॉट वो ज़िले हैं जहां बड़ी संख्या में संक्रमण के मामले सामने आए हैं. इसके अलावा 207 ज़िले नॉन-हॉटस्पॉट ज़ोन घोषित किए गए थे. ये वो इलाके हैं जहां सीमित संख्या में कोरोना संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं.
भारत के 731 ज़िलों में 300 से ज़्यादा ज़िले ऐसे हैं जहां कोविड-19 संक्रमण का असर नहीं है. इन्हें ग्रीन ज़ोन माना गया है.
अलविदा इरफ़ान...
मशहूर भारतीय अभिनेता इरफ़ान ख़ान के निधन की ख़बर को सभी अख़बारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है.
जनसत्ता में छपे कार्टून में बादलों में से झांकती इरफ़ान की भावपूर्ण आंखें दिखाई गई हैं.
वहीं, इंडियन एक्सप्रेस में छपे कार्टून में लिखा है-इरफ़ान ख़ान मास्क लगाकर भी कोई भी किरदार निभा सकते थे.
पंजाब केसरी की ख़बर का शीर्षक है-आंखों से अदाकारी में माहिर इरफ़ान नहीं रहे
हिंदुस्तान ने लिखा है- 'न हन्यते' यानी जिसे कभी मारा न जा सके.
इसके अलावा लगभग सभी अख़बारों ने पहले पन्ने पर एंकर स्टोरी और फ़ीचर प्रकाशित कर इरफ़ान ख़ान को श्रद्धांजलि दी है.
ये भी पढ़ें: इरफ़ान ख़ान को हमने वो नहीं दिया जिसके वो हक़दार थे
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