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बिहार के विधायक ने क्यों किया उद्धव ठाकरे और विजय रूपाणी को फ़ोन?
- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, भोजपुर (बड़हरा) से, बीबीसी हिंदी के लिए
''सर...नमस्कार! सीएम साहब बोल रहे हैं?''
''जी, बोलिए, "उद्धव" बोल रहा हूं.''
''सर, मैं बिहार से आरजेडी विधायक सरोज यादव बोल रहा हूं. मेरे यहां के कुछ लेबर आपके यहां दो-तीन जगह फंस गए हैं. उन लोगों के पास खाने को भी पैसा नहीं है.''
''आप चिंता न करें, सिर्फ़ जगह बोल दें.''
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भोजपुर के बड़हरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक सरोज यादव की फ़ोन पर हुई इस बातचीत का ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल है.
सरोज यादव ने इसके अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से भी सूरत, अहमदाबाद और वहां के दूसरे अन्य शहरों में फंसे बिहार के मज़दूरों के लिए फ़ोन करके मदद मांगी है. वो ऑडियो क्लिप भी वायरल है.
क्यों मांगनी पड़ी मुख्यमंत्री से मदद?
कोरोना वायरस के कारण घोषित लॉकडाउन में बिहार के हज़ारों मज़दूर और अन्य कई लोग बाहर फंसे हुए हैं. ये लोग अपने लिए मदद और वापस आने की लगातार मांग भी कर रहे हैं. विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरे हुए है. लेकिन, बिहार सरकार लॉकडाउन के दौरान बाहर फंसे लोगों को वापस बिहार बुलाने पर तैयार नहीं दिख रही है.
पटना हाईकोर्ट को दिए जवाब में सरकार ने कहा है कि "ऐसे वक़्त में बाहर से लोगों को बुलाना लॉकडाउन का उल्लघंन होगा. हालांकि सरकार की तरफ़ से अपने उन सभी लोगों को जो बाहर फंसे हुए हैं, मदद की जा रही है."
मज़दूरों और छात्रों को वापस नहीं बुलाने के नीतीश सरकार के फ़ैसले पर इसके पहले भी राजनीति गरमा चुकी है जब दिल्ली सरकार के बिहार के प्रवासी मज़दूरों को बसों से भेजने के निर्णय का बिहार सरकार ने पुरज़ोर विरोध किया था.
विधायक सरोज यादव फ़ोन पर जब गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से सूरत और अहमदाबाद में फंसे मज़दूरों के लिए मदद मांग रहे थे. उस वक्त रूपाणी ने मदद का आश्वासन तो दिया, साथ ही यह भी कहा था कि "आप नीतीश जी से एक बार बात करो. उनसे परमिशन लो. फिर हम आपके यहां के सारे मज़दूरों को भेज देंगे."
अपने मुख्यमंत्री को चिंता नहीं!
बीबीसी ने सरोज यादव से बात की और पूछा कि क्या उन्होंने मज़दूरों के मसले पर अपने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात की?
सरोज कहते हैं, "अपने मुख्यमंत्री से तो पूरा विपक्ष कह रहा है. प्रतिपक्ष के हमारे नेता तेजस्वी यादव तो बाहर फंसे मज़दूरों और छात्रों को वापस बुलाने के लिए मुहिम भी चला रहे हैं. हमारी पार्टी की तरफ़ से कई बार सरकार से ये बात कही गई. लेकिन हमारे मुख्यमंत्री जी को मज़दूरों की कोई चिंता नहीं है."
उन्होंने आगे कहा, "सरकार के अब तक के रवैए से आसानी से समझा जा सकता है. लेकिन हमें अपने लोगों की चिंता है. न केवल मेरे विधानसभा और ज़िले के, बल्कि समूचे बिहार के मज़दूरों के फ़ोन आ रहे हैं. लोग भूखे हैं. इसलिए हमें मजबूर होकर दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करनी पड़ी."
सरोज यादव के मुताबिक़ उनकी जानकारी में महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में क़रीब 650 से ज़्यादा बिहार के मज़दूर फंसे हैं. गुजरात में ऐसे मज़दूरों की संख्या हज़ारों में है.
तो क्या, हो पायी मज़दूरों की मदद?
विधायक सरोज यादव ने जिन मज़दूरों की मदद के लिए गुजरात और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को फ़ोन किया, क्या उनकी मदद हो पायी? यह जानने के लिए हमने फ़ोन पर उन मज़दूरों से भी बातचीत की जिनके डीटेल विधायक ने साझा किए थे.
मुंबई के ठाणे पूर्वी के कोपरी पांखुरी इलाक़े में फंसे मज़दूर हरिवंश चौधरी जो मूल रूप से भोजपुर के त्रिभुआनी सोहरा के रहने वाले हैं, कहते हैं, "विधायक जी के फ़ोन करने के बाद हमें यहां की पुलिस और प्रशासन से उसी दिन मदद मिल गई थी. यहां के कलेक्टर ख़ुद आए थे राशन-पानी लेकर. अब हमारे पास इतना है कि 15-20 दिन गुज़ारने में दिक्क़त नहीं आएगी."
इसके अलावा विधायक ने महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले में फंसे एक स्टील फ़ैक्ट्री (GSW) में काम करने वाले मज़दूरों के लिए भी मदद मांगी थी. वहां क़रीब 400 मज़दूर हैं. उन्हें भी राशन-पानी मिल चुका है.
सूरत में नहीं मिली मदद
सरोज यादव ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी से जिन मज़दूरों के लिए मदद मांगी उनमें से सूरत में रहने वाले मज़दूरों को अभी तक मदद नहीं मिल सकी है.
सरोज ख़ुद इसके बारे में कहते हैं, "अहमदाबाद, राजकोट और वडोदरा में फंसे मज़दूरों को मदद वहां के डीएम और एसपी से ही बात करने से मिल गई. लेकिन, वहां के मुख्यमंत्री से कहने के बावजूद भी अभी तक सूरत में फंसे हज़ारों मज़दूरों तक किसी तरह की मदद नहीं पहुंची है. वे लोग तीन दिनों से भूखे हैं. वहां के डीएम कहते हैं कि हमारे पास ऐसे साढ़े चार लाख मज़दूर हैं. मुझे लगता है वे लोग कोरोना से भले संक्रमित न हों, भूख से ज़रूर मर जाएंगे."
बहरहाल, बाहर फंसे मज़दूरों और छात्रों को वापस लाने का मुद्दा बड़ा बनता जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बिहार देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जो इस लॉकडाउन के दौरान अपने यहां के बाहर फंसे लोगों को वापस बुलाने को तैयार नहीं है.
हालांकि अब केंद्र सरकार ने दूसरे राज्यों में फँसे मज़दूरों, छात्रों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने की अनुमति दे दी है.
गृह मंत्रालय ने इस बारे में एक नया दिशानिर्देश जारी किया है. इसके अनुसार ऐसे लोग केवल समूहों में आ-जा सकेंगे और यात्रा से पहले उनकी स्क्रीनिंग होगी. इसके लिए यात्रियों को भेजने और अपने यहाँ आने देने वाले राज्यों को आपस में सहमति करनी होगी. साथ ही इन यात्रियों को सड़क मार्ग से भेजा जाएगा.
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