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कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन में कैसे जी रहे हैं जम्मू-कश्मीर के गुज्जर और बकरवाल
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए देश भर में लगाए गए पूर्ण लॉकडाउन का बड़ा असर भारत प्रशासित जम्मू और कश्मीर में रहने वाले खानाबदोश समुदायों के लाखों लोगों पर पड़ रहा है.
गुज्जर और बकरवाल समुदाय के ये लोग मौसम बदलने के साथ दूसरी जगहों पर चले जाते हैं लेकिन अब आवाजाही पर लगी पाबंदी के कारण एक ही जगह पर फंस गए हैं.
सैकड़ों सालों से जम्मू और कश्मीर के ये समुदाय अप्रैल के पहले सप्ताह में अपने पशुओं को लेकर दूसरी जगह के लिए निकल पड़ते हैं.
एक अधिकारी बताते हैं कि साल 2011 की जनगणना के अनुसार जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में खानाबदोश समुदाय के लगभग 12 लाख लोग हैं. इसमें से क़रीब छह लाख लोग गुज्जर और बकरवाल खानाबदोश समुदायों से हैं जो हर साल छह महीने के लिए दूसरी जगह पर जाते हैं.
इस मौसमी प्रवास के दौरान हज़ारों की संख्या में ये खानाबदोश आदिवासी अपने हज़ारों भेड़, बकरियां, भैंसे, गधे, घोड़े, खच्चर, ऊंट और गायें लेकर पीर पंजाल पार करते हुए कश्मीर घाटी पहुंचते हैं.
गर्मियों की शुरुआत में ये परिवार चारागाहों की तलाश में ऊंची पहाड़ियों की तरफ़ जाते हैं लेकिन जैसे-जैसे सर्दी शुरू होने का वक़्त आता है ये परिवार सांबा, पुंछ, राजौरी और रेयासी जैसी अपेक्षाकृत कम ठंडी जगहों का रुख़ करते हैं.
जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने फ़िलहाल कुछ शर्तों के साथ इन परिवारों को दूसरी जगहों पर जाने की इजाज़त दे दी है, हालांकि गाड़ियों के इस्तेमाल पर (परिवहन पर) रोक लगाई गई है.
बढ़ता तापमान जानवरों के लिए ख़तरनाक़
आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं, नेताओं और स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें अपने साथ पशु और दूसरे जानवर ले जाने की इजाज़त नहीं दी है.
सांबा के रसाना इलाक़े में रहने वाले अमजद ख़ान कहते हैं, "सैंकड़ों सालों से हम अपने पूरे परिवार, अपने बच्चों, जानवरों और ज़रूरी पशुधन के साथ ही दूरी जगह के लिए निकलते हैं, लेकिन इस बार हमें इसकी इजाज़त प्रशासन ने नहीं दी है. कोरोना वायरस के कारण हमारे जाने में पहले ही दो सप्ताह की देरी हो गई है. अप्रैल के पहले सप्ताह से हम ऊंचाई की तरफ़ जाना शुरू कर देते हैं."
"अब तापमान बढ़ रहा है और हमारे जानवरों के लिए भी ख़तरा बढ़ रहा है. अगर ऐसे हालात बने रहे तो हमारे लिए ये घातक होगा. हमारे जानवर ये गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सकते. हम गर्मियों के दौरान कश्मीर और ठंडी पहाड़ी जगहों की तरफ़ जाते हैं."
अमजद ख़ान कहते हैं, "हमें इस महीने का अपना राशन भी नहीं मिला है. हम कई बार राशन डिपो पर भी गए लेकिन हमें खाली लौटना पड़ा. इस इलाक़े में हम 15 परिवार हैं जो अब तक यहीं पर फंसे हुए हैं. हम इंतज़ार कर रहे हैं कि हमें गाड़ियां ले जानी की इजाज़त मिल जाए."
अमजद ख़ान कहते हैं कि प्रशासन की तरफ़ से अब तक एक उन्हें कोई मास्क या सेनेटाइज़र नहीं दिया गया है.
उधमपुर के मानसर में रहने वाले 60 साल के गुज्जर चौधरी मोहम्मद इक़बाल फाबरा ने फ़ोन पर बीबीसी से बात की. उन्होंने कहा "बिना गाड़ियों के हमारे लिए यहां से जाना बेहद मुश्किल है और यही मौजूदा वक़्त में हमारी सबसे बड़ी परेशानी है."
उन्होंने कहा, "इस बात में कोई शक़ नहीं है कि सरकार जो कर रही है हमारी जान बचाने के लिए ही कर रही है. लेकिन कुछ चीज़ें हमारे लिए ज़िंदगी जीने जैसी ज़रूरी है और हम इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते. हमारे कुछ जानवर पहले ही कमज़ोर है, कुछ का प्रसव अभी हुआ है. और गाड़ियों के बिना उन्हें साथ लेकर जाना हमारे लिए नामुमकिन है."
वो कहते हैं, "रमज़ान का महीने आ रहा है, हमें पैदल चलते हुए आगे जाना है और हमारे लिए ये सफर अब मुश्किल और दर्द भरा होगा. हमें जम्मू से श्रीनगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब 300 किलोमीटर की दूरी तय करनी है. हमारे परिवार में बच्चे, महिलाएं, बुज़ुर्ग और पुरुष हैं."
पहाड़ियों का सफ़र मुश्किल होगा
मोहम्मद इक़बाल कहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान उनके लिए जानवरों के लिए चारा इकट्ठा करना और दवाइयां ख़रीदना मुश्किल हो रहा है.
वो कहते हैं, "अगर हम घर से निकल कर चारा नहीं इकट्ठा करें तो भी बाज़ारों से पशुखाद्य नहीं ख़रीद सकते क्योंकि बाज़ार बंद हैं और जहां कहीं कुछ दुकानें खुली हैं वहां पशुखाद्य नहीं है. और तो और ज़रूरत पड़ने पर हम पशु चिकित्सकों से संपर्क नहीं कर सकते. इन सभी कारणों से हमको काफ़ी नुक़सान हो रहा है."
इक़बाल पूछते हैं कि कारोना महामारी के दौर में कश्मीर घाटी के ऊपरी हिस्सों तक हमारा सफ़र आसान नहीं होगा.
इधर प्रशासन का कहना है कि कोरोना संकट को देखते हुए सभी तरह की उचित प्रक्रिया और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन किया जा रहा है.
जम्मू और कश्मीर के आदिवासी मामलों के निदेशक मोहम्मद सलीम ख़ान कहते हैं, "हमने खानाबदोशों के मौसमी प्रवासन की अनुमति दी है और ये प्रक्रिया शुरू हो गई है. ये अनुमति फिलहाल केवल पैदल यात्रा तक ही सीमित है. अगर कोई व्यक्ति गाड़ियों का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए आवेदन करके अनुमति लेनी होगी. फिलहाल कोरोना को फैलने से रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं और प्रक्रिया का पालन करना होगा."
जम्मू और कश्मीर गुज्जर बोर्ड के सदस्य और गवर्नर के सलाहकार फारूक़ अहमद ख़ान ने बीबीसी को बताया कि जहां तक परिवहन का मामला है, एक प्रक्रिया है जिसका कई लोग पालन कर रहे हैं और उन्हें परिवहन सुविधा के लिए अनुमति भी दी जा रही है.
आदिवासी कार्यकर्ता और ट्राइबल रीसर्च एंड कल्चरल फाउंडेशन के संस्थापक जावेद राही कहते हैं कि परिवहन का मुख्य साधन घोड़े हुआ करते थे लेकिन अब इनकी संख्या घट कर केवल 62,000 रह गई है.
वो कहते हैं, "ऐसे में प्रशासन को भारवाहक और ट्रक जैसी गाड़ियों के इस्तेमाल की इजाज़त देनी चाहिए ताकि आदिवासी अपने घर का सामान लेकर ऊपर पहाड़ों तक जा सकें."
शुक्रवार को जम्मू और कश्मीर बोर्ड फ़ॉर डेवलपमेंट ऑफ़ गुज्जर एंड बकरवाल ने एक आदेश जारी किया है. इस आदेश में इलाक़े के संबंधित पुलिस अधिकारियों से गुज़ारिश की है कि वो इस खानाबदोश परिवारों को और इनके साथ केवल जानवरों को ले जाने वाली गाड़ियों को बिना रुकावट जाने दें.
जम्मू के पशु और भेड़ पालन विभाग ने भी इन समुदायों के परिवारों के मौसमी प्रवास के संबंध में एक एडवायज़री जारी की है.
इसमें कहा गया है कि इनके परिवार के किसी सदस्यों को और इनके जानवरों को प्रशासन द्वारा चिन्हित किए गए रेड कैटगरी इलाक़ों (कन्टेमेन्ट ज़ोन) में प्रवेश करने की इजाज़त नहीं होगी. आगे बढ़ने के लिए इन्हें वैकल्पिक मार्ग अपनाने होंगे.
कश्मीर घाटी में प्रशासन ने अब तक 80 इलाक़ों को रेड कैटगरी ज़ोन घोषित किया है.
एडवायज़री में ये भी कहा गया है कि बीमार जानवरों को स्वस्थ जानवरों के झुंड में नहीं रखा जाना चाहिए. साथ ही संभव हो तो बीमार, बुज़ुर्ग और बच्चों को एक जगह से दूसरी जगह जाने से बचना चाहिए.
कश्मीर में कोरोना के अधिक मामले
कश्मीर की पहाड़ियों की तरफ़ जाते वक़्त पारंपरिक तौर पर ये खानाबदोश दूसरे ज़िलों को पार करते हुए गुज़रते हैं.
जम्मू और कश्मीर में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 341 मामले दर्ज किए गए हैं. जहां कश्मीर में 287 कोरोना संक्रमित हैं वहीं जम्मू में 54 लोग इस वायरस की चपेट में हैं. प्रदेश में अब तक कोरोना के कारण पांच मौतें हो चुकी हैं.
कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने कश्मीर में अधिकांश इलाक़ों में मुख्य सड़कों को बंद कर दिया है. साथ ही लोगों की आवाजाही कम करने के लिए और लॉकडाउन लागू करने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड्स भी लगाए हैं.
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