कोरोना वायरस: राजस्थान के आदिवासी बहुल गांवों को कैसे बचाया जा रहा है कहर से

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, जयपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान में अब तक मिले कोरोना के 430 मामलों में 90 फ़ीसदी शहरी इलाक़ों से हैं. वहीं ग्रामीण इलाक़ों में लोगों की जागरुकता भी देखने को मिल रही है.
राजस्थान के उदयपुर संभाग के सलूंबर ब्लॉक की आदिवासी बहुल बनोड़ा ग्राम पंचायत. जहां महिलाओं के समूह ग्रामीणों को कोरोना से बचाव के लिए जागरुक कर रहे हैं.
घर घर जा कर लोगों को कर रहीं जागरुक
बनोड़ा गांव की उजाला मित्र नाराणी बाई बताती हैं, "हम लोगों को घरों में रहने, मुंह पर कपड़ा बांधने, घर से बाहर नहीं निकले और दूरी बना कर रहने के लिए समझा रहे हैं."
वह बताती हैं कि, यहां अधिकतर आदमी बाहर कमाने जाते हैं जो अब गांवों में आ गए हैं. इन सबको आने के बाद गांव घर से दूर अलग रखा गया और अब सभी घरों में हैं.
महिलाएं गांव में घर-घर जा कर लोगों को करोना के बारे में जागरुक कर रही हैं. लोगों से घर से बाहर नहीं निकलने का भी आह्वान कर रही हैं.
यह आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण अशिक्षित या कम पढ़ी-लिखी आबादी है. लेकिन महामारी के इस दौर में बिना शिक्षा के भी यह कोरोना के ख़िलाफ़ जागरुकता की अलख जगा रही हैं.
नारायणीं कहती हैं कि, जिन गांव वालों को राशन नहीं मिल रहा है उनकी सूची बना कर पंचायत में दी है.

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इस दौरान किसी भी सामाजिक कार्य का आयोजन नहीं करने के लिए भी लोगों को कह रही हैं. खेतों में काम करने के दौरान भी दूरी बनाए रखने के लिए बता रही हैं.
कोरोना के लक्षणों को बताते हुए लोगों को स्थानीय चिकित्सालय में जांच कराने के लिए जोर दे रही हैं. हालांकि, सीएचसी नर्स पुष्पा मेहता का कहना है कि इस गांव में फिल्हाल सभी स्वस्थ हैं.
उदयपुर के आजीविका ब्यूरो संस्थान की दृष्टि अग्रवाल बताती हैं, "यहां आदिवासी महिलाओं को जागरुक करने के लिए उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और राजसमंद में 12 हज़ार महिलाओं को उजाला समूह से जोड़ा गया है. इन समूह के ज़रिए हर गांव से एक महिला मित्र बनाया गया जो अपने साथ अन्य महिलाओं को जागरुक कर अपने हितों के लिए आवाज़ उठा रही हैं."
दृष्टि आगे कहती हैं, "इन महिलाओं को इनके लिए सरकारी योजनाओं के प्रति जागरुक करते हैं, फिर यह अपने गांव और अन्य लोगों को जागरुक कर उनके हितों के लिए आवाज़ उठाती हैं. यहां अधिकतर महिलाएं ही रहती हैं क्योंकि पुरुष अन्य राज्यों में कमाने जाते हैं. इसलिए अब महिलाएं ही अपने हितों और गांव में जनहित कार्यों के लिए लगातार प्रयासरत हैं."
बाहर से आए लोगों को 14 दिन क्वारंटीन में रखा
लॉकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों से अपने घरों के लिए निकले मजदूरों के संक्रमित होने की बहुत संभावनाएं जताई जा रहीं थीं. इसी बीच बानोड़ा ग्राम मंचायत में भी दिल्ली, गुजरात, मुंबई समेत अन्य राज्यों से आए लोगों को उनके घरों से 14 दिन तक दूर रखा गया.

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बनोड़ा सीएचसी की नर्स पुष्पा मेहता बताती हैं कि, इस गांव में तीन बार में बाहर से आने वाले 262 लोगों को घरों से दूर गांव में ही क्वारंटीन किया. उजाला समूह की महिलाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से ही यह सब संभव हुआ है और अब सभी स्वस्थ हैं.
गंगुबाई, राजुबाई, कमरुबाई और नारायणीबाई समेत ऐसी बहुत सी उजाला समूह की महिलाएं हैं, जिन्होंने पंचायत स्तर और सीएचसी की नर्सिंग स्टाफ़ को बताया कि कौन कौन लोग बाहर से आए हैं. फिर सभी को क्ववारंटीन कराया और बीमारी के बारे में जागरुक भी किया.
युवा कर रहे स्वच्छता के प्रति जागरुक
बनोड़ा ग्राम पंचायत में छह राजस्व गांव शामिल हैं. इन सभी गांवों में बाहर कमाने के लिए गए युवा, जो अब लौट कर आ चुके हैं. उन्होंने मिलकर एक संगठन भी बनाया है.
इसी पंचायत के निवासी रमेश बताते हैं, "केरपुरा गांव के युवाओं के प्रयास से महीना भर पहले एकलव्य युवा मोर्चा संगठन बनाया. सभी बाहर से आए कमाने वाले युवा हैं जिनके साथ मिल कर पंचायत से दवाई लेकर गांवों के हर घर में छिड़काव कर रहे हैं."
युवाओं का संगठन जो लोगों को खास कर स्वच्छता पर ध्यान दे रहा है.
वह कहते हैं कि, महिलाएं कोरोना से बचाव पर लोगों को जागरुक कर रही हैं तो हम स्वच्छता से कोरोना बचाव का प्रयास कर रहे हैं.

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सरकारी योजनाओं के लाभ दिलाने के लिए भी प्रयास
हर गांव में उजाला समूह की इन महिलाओं को उजाला मित्र बनाया है. यह महिलाएं लोगों को खाद्य सुरक्षा और कोरोना के दौरान मिल रहे लाभ भी वंचितों तक पहुंचान के लिए आवाज़ उठा रही हैं.
बनोड़ा ग्राम पंचायत के सचिव दिनेश मीणा कहते हैं, "यह महिलाएं लोगों को जागरुक करने के लिए बेहद प्रयास कर रही हैं और लोग इनकी बातों को मान भी रहे हैं. विधवाओं व अन्य लोग जिन्हें राशन नहीं मिल पा रहा है, उनकी सूची भी यह लेकर आईं जिसे हमने आगे भेजा है. जल्द ही राशन मिल जाएगा."
राजस्थान के जनजाति क्षेत्रिय विभाग मंत्री अर्जुन लाल बामणिया ने बीबीसी हिंदी को बताया, "आदिवासियों के घर दूर दूर ही होते हैं, एसे में वह सोशल डिस्टेंसिंग की पालना शुरू से ही कर रहे हैं. लोगों को जागरुक कर रहीं यह महिलाएं कोरोना योद्धाओं से कम नहीं हैं."
मंत्री बामणिया आगे कहते हैं, "आने वाले समय में हम सरकार से हम कहेंगे कि आदिवासियों की आवश्यकताओं के लिए नई योजना लाकर के जनजाति भाइयों को लाभांवित करेंगे. हम किसी भी तरह से इनको परेशान नहीं होने देंगे यह हमारा प्रयास रहेगा."


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