कोरोना वायरस: लॉकडाउन कब और कैसे ख़त्म होगा?

    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

लॉकडाउन कब और कैसे खुलेगा? इस सवाल के जवाब से पहले नज़र डालें, बीते दिनों राज्य सरकारों की तरफ़ से आए इन बयानों पर:

"हमारे पास कोई चारा नहीं है. लॉकडाउन को जारी रखना चाहिए. मैं माननीय प्रधानमंत्री से अपील करता हूं कि लॉकडाउन 15 अप्रैल के बाद भी जारी रखा जाए. इसमें झिझकने की कोई ज़रूरत नहीं है."

  • के चंद्रशेखर राव, मुख्यमंत्री, तेलंगाना

"मीडिया में पिछले कुछ दिनों से चल रहा था कि लॉकडाउन 14 अप्रैल के बाद बढ़ सकता है, इसको देखते हुए लोगों में संवेदनशीलता बढ़ी है. अभी ये कहा नहीं जा सकता कि 14 अप्रैल के बाद भी क्या होगा. एक भी केस हमारे प्रदेश में रह जाता है तो लॉकडाउन खोलना उचित नहीं रहेगा."

  • अवनीश अवस्थी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

"केंद्र ने राज्यों से सुझाव मांगा है, राज्यों को अपने यहां की स्थिति देख कर इस पर निर्णय लेना चाहिए. राजस्थान लॉकडाउन करने वाला सबसे पहला राज्य था."

  • अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री, राजस्थान

"महाराष्ट्र सरकार चरणबद्ध तरीक़े से लॉकडाउन को अलग-अलग इलाक़ों में खोलने पर विचार कर रही है."

  • राजेश टोपे, स्वास्थ्य मंत्री, महाराष्ट्र सरकार

"अगर 14 अप्रैल या फिर 20 अप्रैल को लॉकडाउन खुलता है और असम के बाहर रुके असमिया युवक-युवतियां एक साथ राज्य में लौटते हैं तो उन सभी को 14 दिनों के क्वारंटाइन पर भेजना संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि सरकार के पास इतनी तादाद में क्वारंटाइन करने की व्यवस्था फ़िलहाल नहीं है."

  • हिमंत बिस्वा सरमा, स्वास्थ्य मंत्री, असम

ये सभी बयान हैं देश के तमाम बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री और अधिकारियों के. इन सभी बयानों से स्पष्ट है कि 14 अप्रैल के बाद पूरे देश भर में एक साथ लॉकडाउन नहीं खुलने वाला.

कुछ राज्य सरकार अपनी तरफ़ से भी कुछ प्रतिबंध लगाए रखने के पक्ष में हैं.

तो फिर कैसे खुलेगा ये लॉकडाउन? क्या है सरकार का ब्लूप्रिंट? इस पर बीबीसी ने बात की एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया से. रणदीप गुलेरिया सरकार की ओर से कोविड-19 के लिए बनाई गई 11 समितियों में से एक के प्रमुख भी हैं.

कहां हटेगा, कहां रहेगा लॉकडाउन?

डॉ. गुलेरिया के मुताबिक़ जिन हॉटस्पॉट एरिया में कोरोना संक्रमण के बढ़ने की प्रतिदिन रफ्तार आज भी दोगुनी है, उन इलाक़ों में लॉकडाउन को फ़िलहाल के लिए नहीं हटाया जा सकता.

ये संभव भी नहीं होगा, क्योंकि वहां लॉकडाउन हटाने का मतलब होगा, कोविड-19 के मरीज़ो का एकदम से बढ़ जाना.

जिन जगहों पर आज तक कोई कोरोना के मामले सामने नहीं आए हैं. वहाँ हम धीरे-धीरे लॉकडाउन हटा सकते हैं.

पूरे देश में कुल 274 ऐसे ज़िले हैं, जहां अब तक कोरोना के मरीज़ मिले हैं. देश भर में 700 से ज्यादा ज़िले हैं.

ऐसे में लगता है कि 14 अप्रैल के बाद तक़रीबन 450 ज़िलों में लॉकडाउन में ढील दी जा सकती है.

किस आधार पर सरकार करेगीफ़ैसला?

देश भर में कोरोना संक्रमण के अब तक 4000 से अधिक मामले आ चुके हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ फ़िलहाल हम हर पांचवे दिन मरीज़ो की संख्या को डबल कर रहे हैं.

केंद्र सरकार ने कई बार कहा है कि ये रफ्तार और धीमी होती अगर तबलीग़ी जमात मरकज़ से इतनी बड़ी संख्या में मरीज़ सामने नहीं आते.

सरकार को लॉकडाउन पर कोई भी फ़ैसला करने से पहले कुछ विषयों पर ज़्यादा ध्यान देना पड़ेगा.

डॉ. गुलेरिया की मानें तो सरकार अपना फ़ैसला 4 मुद्दों को ध्यान में रखते हुए करेगी.

पहला- लॉकडाउन आगे जारी रखने पर अर्थव्यवस्था पर कितना बड़ा असर पड़ेगा. क्या सरकार आगे उसकी भरपाई करने में सक्षम होगी?

दूसरा - क्या लॉकडाउन खोलना बड़ी आबादी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा?

तीसरा - उद्योग जगत के सवालों को भी सरकार को लॉकडाउन के फ़ैसले के साथ जोड़ कर देखना होगा. लॉकडाउन को आगे बढ़ाना या ख़त्म करना भारत के निर्यात-आयात, दूसरे देशों के साथ रिश्तों और देश के बाक़ी उद्योग पर कितना असर डाल रहा है.

चौथा - ग़रीब आप्रवासी मज़दूरों की हालात. उन तक सरकार अपनी कितनी पहुंच बना पाई है. उनकी समस्याएं क्या हैं और क्या उसका निदान सरकार पूरी तरह से कर पा रही है.

यही वजह है कि केंद्र ने लॉकडाउन पर राज्य सरकारों से सुझाव भी मांगा है. बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी अलग-अलग राजनीतिक दलों से बातचीत कर उनसे भी इस विषय पर चर्चा करने वाले हैं.

लॉकडाउन कैसे हटा सकता है?

डॉ. रणदीप गुलेरिया के मुताबिक़ लॉकडाउन हटाने के दो ही तरीक़े हैं. पहला तरीक़ा है ग्रेडेड या चरणबद्ध तरीक़े से लॉकडाउन हटाना.

दूसरा तरीक़ा है कुछ इलाक़ों में पूरी तरह से सामान्य जन जीवन दोबारा शुरू कर दिया जाए, जहां अब तक कोरोना के एक भी मरीज़ सामने ना आए हों.

डॉ रणदीप ग्रेडेड लॉकडाउन हटाने के पक्ष में बात करते हैं.

उनके मुताबिक़ पूरी तरह से लॉकडाउन उन्हीं इलाक़ों में हटाया जा सकता है जहां एक भी मामला अब तक सामने ना आए हों. लेकिन भारत के लिए ये संभव नहीं दिखता.

उनके मुताबिक़ तब ये ख़तरा भी रहेगा कि दूसरे संक्रमित या प्रभावित इलाक़े से लोग वहां ना चले जाएं.

सरकार को ऐसे इलाक़ों से लोगों की आवाजाही को मॉनिटर करने की ज़रूरत होगी. इसलिए वो मानते हैं कि सरकार को हॉटस्पॉट को अलग तरीक़े से डील करना होगा और नॉन हॉटस्पॉट एरिया को अलग तरीक़े से.

'हॉटस्पॉट' यानी देश के वो इलाक़े जहां दूसरे इलाक़ों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा मामले सामने आए हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन हॉटस्पॉट्स की पहचान की है और स्थिति नियंत्रित करने के लिए ख़ास रणनीति भी बनाई है, ताकि यहां से कम्युनिटी ट्रांसमिशन की आशंका को टाला जा सके.

इनमें से कुछ हॉटस्पॉट हैं - दिल्ली (निज़ामुद्दीन और दिलशाद गार्डन), नोएडा, मेरठ, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, कासरगोड और पथानामथिट्टा.

हालांकि ये हॉटस्पॉट, हर दिन और बदलती परिस्थिति के साथ लगातार बदलते रहते हैं. नए सरकारी आदेश के मुताबिक़ भारत में कुल 21 हॉटस्पॉट हैं.

डॉ गुलेरिया मानते हैं कि हॉटस्पॉट इलाक़ों को 14 अप्रैल के बाद भी दूसरे इलाक़ों से पूरी तरह कट-ऑफ़ रखने की ज़रूरत होगी.

इसका मतलब ये कि उन इलाक़ों में ट्रेन, बस, फ्लाइट से आवाजाही पर पूरी तरह पाबंदी लगानी होगी. नहीं तो जिन जगहों पर अभी कोई केस नहीं है वहां भी कोरोना के मरीज़ देखने को मिल सकते हैं.

लॉकडाउन पर फ़ैसला करते समय सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी किन फ्लाइट्स को उड़ने की इजाज़त देनी है, और किन ट्रेनों को दोबारा ट्रैक पर दौड़ने की अनुमति देनी है.

चरणबद्ध तरीक़े से लॉकडाउन खोलने का मतलब भी यही होता है. उनके मुताबिक़ पहले एक ज़िले को कोरोना फ्री करें, फिर दूसरे को, और जहां-जहां कोरोना मरीज़ो की संख्या शून्य पहुंचे फिर वहां लॉकडाउन पूरी तरह खोलें और तभी दूसरे इलाक़े से लोगों को वहां आने दें.

विदेश से आने वाली उड़ानों पर पाबंदी कब तक?

लॉकडाउन में सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि आख़िर विदेश से आने वाले लोगों पर सरकार कब तक रोक लगाए रख सकती है?

डॉ गुलेरिया का मानना है कि भारत में कोरोना का संक्रमण विदेशों से आने वाले लोगों के साथ ही आया है. इसलिए सरकार को विदेश से आने वालों को सीधे क्वारंटाइन में भेजने का प्रवाधान किया जा सकता है.

एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग और टेस्टिंग को बढ़ाने की आवश्यकता है. इसलिए अब हमने रैपिड टेस्टिंग की भी गाइडलाइन जारी कर दी है. गुरुवार से देश में इसकी शुरुआत हो जाएगी.

कब होगी स्थिति स्पष्ट?

रणदीप गुलेरिया के मुताबिक़ 10 अप्रैल से 12 अप्रैल के बाद केंद्र सरकार के पास ज़्यादा डेटा आ जाएगा. तब स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी कि लॉकडाउन का कितना असर पड़ा है और किन इलाक़ों पर पड़ा है.

तब सरकार ये तय करने की स्थिति में होगी कि कोरोना का ग्राफ़ अब भी बढ़ रहा है या फिर थोड़ा 'फ्लैट' हुआ है. इसलिए केंद्र सरकार 10-12 अप्रैल के बीच अपने अगले क़दम की घोषणा कर सकती है.

मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने जानकारी दी कि लॉकडाउन कब और कैसे ख़त्म होगा इस पर सरकार ने अभी तक कोई फ़ैसला नहीं लिया है.

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