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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए टाटा ट्रस्ट देगा 500 करोड़ रुपये
टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा ने भरोसा दिलाया है कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में 500 करोड़ रुपये की मदद करेंगे.
उनकी ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत और दुनिया में इस समय वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और कोविड-19 से लड़ने के लिए तुरंत आपातकालीन सहायता की आवश्यकता है.
इसके बाद बयान में कहा गया है कि टाटा ट्रस्ट सभी समुदायों को सशक्त और सुरक्षित करने की अपनी प्रतिज्ञा को दोहराता है और 500 करोड़ रुपये का वादा करता है.
यह 500 करोड़ रुपये फ़्रंटलाइन पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए चिकित्सा, रेस्पिरेटरी सिस्टम, टेस्टिंग किट्स आदि में इस्तेमाल किए जाएंगे.
कोविड-19 को लेकर शनिवार को की गई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि आज एक दिन में कोरोना वायरस के 149 नए मामले सामने आए और दो मौतें हुईं.
इसके साथ ही देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या 873 हो चुकी है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया का बयान
मानवाधिकारों पर काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने बयान जारी कर कहा है कि कोविड-19 महामारी से लड़ाई में प्रवासी मज़दूर और ग़रीबों को ज़रूरी चीज़ों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
एमनेस्टी ने अपने बयान में कहा कि 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की थी.
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के एग्ज़िक्युटिव डायरेक्टर अविनाश कुमार ने कहा कि कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए भारत को ये सभी क़दम उठाने ज़रूरी हैं लेकिन इसके साथ ही इस लड़ाई में कोई भी नीति बनाते वक़्त समाज के बेहद कमज़ोर तबके को भी ध्यान में रखना चाहिए.
अविनाश कुमार ने कहा कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से लाखों लोग फंसे हुए हैं और वो खाने-पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और दुर्भाग्य से इन लोगों के लिए कोविड-19 से अधिक ख़तरा राज्य की मशीनरी बन गई है, सभी परिस्थियों में भी यातना और दर्द पहुंचाने वाला सलूक बंद होना चाहिए, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में भी इसको उचित नहीं ठहराया जा सकता.
एमनेस्टी इंडिया ने मांग की है कि भारत सरकार और विभिन्न राज्य उचित क़दम उठाते हुए उन लोगों के लिए कोई उपाय करे जिनकी नौकरी इस लॉकडाउन के कारण जा चुकी है और सरकार ज़रूरतमंद लोगों की मूलभूत सुविधाओं जैसे कि खाना, पानी और साफ़-सफ़ाई का बंदोबस्त करे.
लॉकडाउन के बाद घर लौट रहे 7 मज़दूरों की मौत
कर्नाटक के पेड्डा गोलकुंडा में ट्रक और वैन की टक्कर में सात मज़दूरों की मौत हो गई.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पुलिस ने बताया है कि शुक्रवार को देर रात यह घटना शहर के बाहर हुई और यह मज़दूर अपने घर लौट रहे थे. मरने वालों में दो बच्चे भी शामिल हैं.
ट्रैफ़िक पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर विश्व प्रसाद ने बताया है कि 31 मज़दूर वैन में मौजूद थे, दुर्घटना के समय पांच लोगों की मौक़े पर ही मौत हो गई जबकि दो की अस्पताल में इलाज के समय मौत हुई.
चार मज़दूरों का इलाज अभी भी जारी है जिसमें से एक की हालत नाज़ुक है.
उन्होंने बताया कि यह मज़दूर सूर्यापेट में एक सड़क परियोजना में काम कर रहे थे और लॉकडाउन के बाद कर्नाटक के रायचुर में अपने घर जा रहे थे.
असिस्टेंट कमिश्रनर प्रसाद ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि आम से लदा ट्रक गुजरात जा रहा था.
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