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जनता कर्फ़्यू के समय भी जारी रहेगा शाहीन बाग़ का धरना
नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ शाहीन बाग़ में जारी महिलाओं का धरना ख़त्म होता हुआ नहीं दिख रहा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ ये महिलाएं रविवार को भी अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से खुद पर रविवार के दिन जनता कर्फ़्यू लगाने की अपील की है.
दिल्ली से नोएडा को जोड़ने वाली इस सड़क पर महिलाएं नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ दिसंबर से ही धरने पर बैठी हुई हैं.सोमवार को दिल्ली सरकार ने निर्देश जारी किए थे जिसके तहत शादी के मौकों को छोड़कर 50 से ज़्यादा लोगों के एक जगह पर इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई थी. बाद में 50 की निर्धारित संख्या को घटाकर 20 कर दिया गया है.
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ़ किया था कि ये निर्देश शाहीन बाग़ पर लागू होंगे. शुक्रवार को महिला प्रदर्शनकारियों ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि एक वक़्त में उनके धरने में 50 से ज़्यादा महिलाएं शरीक नहीं होती है.
नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "रविवार को हम छोटे-छोटे टेंट में बैठेंगे. एक टेंट में केवल महिलाएं होंगी और दो तंबुओं के बीच का फासला एक मीटर से ज़्यादा होगा."
रिज़वाना नाम की एक अन्य महिला ने कहा कि प्रदर्शन कर रही महिलाएं हर सावधानी बरत रही हैं और वे हमेशा बुर्का पहनती हैं. नियमित रूप से हाथ साफ़ करते रहने की हमारी आदत है. हम हर रोज़ पांच वक़्त की नमाज पढ़ते हैं. और हर बार हाथ धोते हैं.
पीके बनर्जी का निधन
मशहूर भारतीय फ़ुटबॉलर पीके बनर्जी का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को कोलकाता में निधन हो गया, वे 83 वर्ष के थे. बनर्जी के परिवार में उनकी बेटी पाउला और पूर्णा हैं, जो नामचीन शिक्षाविद् हैं. उनके छोटे भाई प्रसून बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा सांसद हैं.
वर्ष 1962 के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता, तेज तर्रार स्ट्राइकर प्रदीप कुमार बनर्जी निमोनिया के कारण साँस की बीमारी से जूझ रहे थे. उन्हें पार्किंसन, डिमेंशिया और हार्ट प्रॉब्लम भी थी. वे भारतीय फ़ुटबॉल के स्वर्णिम दौर के साक्षी रहे.
23 जून 1936 को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के बाहरी इलाक़े मोयनागुरी में जन्मे बनर्जी का परिवार विभाजन से पहले उनके चाचा के यहाँ जमशेदपुर आ गया था. पीके बनर्जी ने राष्ट्रीय टीम के लिए 84 मैचों में 65 अंतरराष्ट्रीय गोल दागे थे.
साल 1992 में जकार्ता एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के अलावा, बनर्जी ने 1960 के रोम ओलंपिक में भारत का नेतृत्व किया जहाँ उन्होंने फ्रेंच टीम के ख़िलाफ़ बराबरी का गोल दाग मैच को 1-1 से ड्रॉ करवाया था.
इससे पहले बनर्जी ने 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और क्वार्टर फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया पर 4-2 से जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. फ़ीफ़ा ने 2004 में उन्हें अपने सौ साल पूरे होने पर 'ऑर्डर ऑफ़ मेरिट' से सम्मानित किया था.
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