लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था पर कोरोना की मार: प्रेस रिव्यू

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भारत सरकार ने देश में आने वालों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं.

इसके बाद अब ये माना जा रहा है कि इसका असर पहले से मार झेल रही देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

अख़बार कहता है कि साल 2019 में 108.9 लाख पर्यटक भारत आए थे जिनमें से 17.4 लाख केवल मार्च और अप्रैल के महीने में आए थे.

अख़बार के अनुसार 15 अप्रैल तक पाबंदी लगी रही तो इससे न केवल विमानन कंपनियों को नुक़सान होगा बल्कि भारत के पर्यटन उद्योग पर भी बुरा असर पड़ेगा.

बुधवार को भारत सरकार ने 13 मार्च से 15 अप्रैल तक राजनयिक, सरकारी, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, एम्प्लॉयमेंट और प्रोजेक्ट वीज़ा को छोड़कर सभी अन्य प्रकार के वीज़ा निलंबित करने का फ़ैसला किया है.

2010 के आधार पर एनपीआर की बात कर सकती है आम आदमी पार्टी

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार दिल्ली की आम आदमी पार्टी 13 मार्च को विधानसभा का एक ख़ास सत्र बुलाने वाली है.

माना जा रहा है कि सत्र में एनपीआर यानी नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और दिल्ली में कोरोना वायरस की स्थिति पर चर्चा हो सकती है. ये भी माना जा रहा है कि 2010 में बनाए गए एनपीआर यानी नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के आधार पर जानकारी इकट्ठा करने से जुड़ा प्रस्ताव पारित कर सकती है.

दिल्ली में एक अप्रैल से जनगणना 2021 का काम शुरु होने वाला है. जनगणना के साथ-साथ दिल्ली में एनपीआर डेटा भी इकट्ठा किया जाएगा.

अब तक पश्चिम बंगाल, केरल, बिहार और मध्य प्रदेश की सरकारें एनपीआर डेटा इकट्ठा न किए जाने को लेकर अपील कर चुके हैं.

बिहार विधानसभा ने 2010 के एनपीआर फॉर्म के आधार पर डेटा इकट्ठा करने का प्रस्ताव पास किया था.

पोस्टर हटाने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पहुंची कोर्ट

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान लखनऊ में हिंसा फैलाने वालों के पोस्टर लगाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल कर पोस्टर हटाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में स्वत:संज्ञान लेते हुए लखनऊ के ज़िलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को अदालत में तलब किया था और उन्हें पोस्टर्स और होर्डिंग्स को 16 मार्च तक हटाने का आदेश दिया था.

सरकार का कहना है कि हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकारी और निजी संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाया था.

सरकार ने सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने वाले प्रदर्शनकारियों की पहचान कर और नुक़सान की भरपाई करने के लिए होर्डिंग लगाए थे जिनमें प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें लगाई गई थीं और नाम लिखे गए थे.

सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगी.

पड़ोसी राज्य से आए थे दिल्ली के दंगाई: अमित शाह

दिल्ली में हाल में हुई हिंसा पर लोकसभा में हुई चर्चा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सुनियोजित साज़िश के तहत दंगों को अंजाम दिया गया था.

उन्होंने कहा कि इसके लिए पड़ोसी उत्तर प्रदेश से तीन सौ से अधिक लोग दिल्ली आए थे जो एक गहरी साज़िश की ओर इशारा करता है.

शाह ने ये भी कहा कि सरकार जनवरी के बाद से दिल्ली में हवाला के ज़रिए आने वाले पैसों का मूल्यांकन कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.

साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार ख़ास फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही है जिसके माध्यम से क़रीब 1,100 चेहरों की पहचान की गई है और इन लोगों को गिरफ्तार करने के लिए 40 टीमों का गठन किया गया है.

उन्होंने कहा कि सरकार 60 सोशल मीडिया खातों की जाँच भी कर रही है जो दंगा शुरु होने से पहले शुरु हुए थे और बाद में बंद हो गए थे.

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